भिलाला

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बांसुरी बजाता हुआ एक भिलाला

भिलाला (दरबार/ठाकुर) जाति मूल रूप से मिश्रित राजपूत और भील क्षत्रिय जाति है जो के राजपूत योद्धाओं और भील सरदारों/शासक/जमींदारों के विवाह से उत्पन्न हुई। ये मुख्य रूप से मालवा, मेवाड और निमाड़ खण्डवा,खरगोन में रहते हैं। इन्हें दरबार/ठाकुर कहा जाता है और इनके रिति रिवाज और पोशाक राजपूती है और अधिकांश लोगो की रीति रिवाज पुराने ही हैं।[1]

इतिहास[संपादित करें]

इतिहास के अनुसार मान्धाता ओंकारेश्वर का शासन भील शासकों के अधीन था | उसके पश्चात धार के परमार राजवंश, मालवा के सुलतान एवं ग्वालियर के सिंधिया घराने से होता हुआ १८२४ में अंग्रेजों के नियंत्रण में चला गया | अंतिम भील शासक नाथू भील का यहाँ के एक प्रमुख पुजारी दरियाव गोसाईं से विवाद हुआ, जिन्होंने जयपुर के राजा को पत्र द्वारा नाथू भील के खिलाफ सहायता मांगी तब राजा ने उनके भाई एवं मालवा में झालर पाटन के सूबेदार भरत सिंह चौहान को भेजा | अंततः इस विवाद का समापन भरत सिंह द्वारा नाथू भील कि एकमात्र पुत्री से विवाह के रूप में हुआ अन्य राजपूत योद्धाओं ने भी भील कन्याओं से विवाह किये एवं ११६५ ईसवी में मान्धाता में बस गए | इनके वंशज भिलाला कहलाए | भरत सिंह के वंशजों ने लंबे समय तक ओंकारेश्वर पर राज किया | ब्रिटिश राज के दौरान ओंकारेश्वर जागीर के रूप में राव परिवार के पास रहा |[2]

राजपूताना के इतिहास में, भिल्लों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | मुगलों के खिलाफ हल्दीघाटी की लड़ाई में उदयपुर के महाराणा प्रताप को उनकी सैन्य सहायता प्रसिद्ध है। उनका गुरिल्ला युद्ध मेवाड़ की विजय में अकबर के लिए एक बड़ी चुनौती था। महाराणा प्रताप ने भोमट के राजा भीलराजा से सहयोग मांगा था। महाराणा प्रताप ने राज्य के प्रतीक में उन्हें एक प्रमुख स्थान देकर भिल्लों को सम्मानित किया जिसमें राणा प्रताप और भील योद्धा को मेवाड़ के राणा के शाही प्रतीक के दोनों तरफ खड़े दिखाया हैं। इसके बाद राजपूतों और भीलों के बीच, विशेष रूप से भील प्रमुखों के परिवारों के बीच अक्सर अंतर विवाह थे। नतीजतन, भिलाला की एक नई जाति उभरी |[3]

भूतपूर्व भिलाला रियासतों/ठिकाने/जागीर[संपादित करें]

भोपावर, मध्य भारत एजेंसी[4][संपादित करें]

1) भरूड़पुरा : भौमिया राजा : ठाकुर उडीया सिंह (गद्दी - 1885) (भीलाला- चौहान राजपूत से ) राजस्व- 6000, क्षेत्र - 56.98 Sq. Km.

2) मोटा बरखेरा : भूमिअ राजा : ठाकुर नयन सिंह (गद्दी - 1919) (भीलाला- चौहान राजपूत से) राजस्व- 25,000, क्षेत्र - 113.96 Sq. Km.

3) निमखरा, भौमिया, राजा दरीआओ सिंह (गद्दी - 1889) (भीलला- चौहान राजपूत से, मूलतः मारवार से) राजस्व- 6000, क्षेत्र - 235.69 Sq. Km.

4) छोटा बरखेरा, भूमिअ राजा : ठाकुर मुगत सिंह (गद्दी - ?) (भीलाला- चौहान राजपूत से) राजस्व- 18,000, क्षेत्र - 235.69 Sq. Km.

वर्तमान[संपादित करें]

भिलाला एक उपजात है और यह अनुसुचित जनजाति के अंतर्गत आते हैं, इन्हें 'उजला भील' भी कहते हैं। क्योंकि भील शब्द की उत्पत्ति "बिल" से हुई है जिसका द्रविड़ भाषा में अर्थ होता हैं "धनुष" अर्थात धनुष चलाने वाला। ये भीलाली और हिंदी भाषा बोलते है। यह एक हिन्द-आर्य भाषा है, ये लोग मुख्य रूप से खरगोन,खण्डवा,धार ,बडवानी ,निमाड कुछ मालवा में भी रहते हैं।

उल्लेखनीय लोग[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. R C Verma. INDIAN TRIBES THROUGH THE AGES (Kindle Location 412). Publications Division Ministry of Information and Broadcasting Government of India. Kindle Edition.
  2. http://shriomkareshwar.org/HTownInfo.aspx
  3. R C Verma. INDIAN TRIBES THROUGH THE AGES (Kindle Location 407). Publications Division Ministry of Information and Broadcasting Government of India. Kindle Edition.
  4. http://members.iinet.net.au/~royalty/ips/misc/agency_bhopawar.html