हल्दीघाटी का युद्ध

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हल्दीघाटी का युद्ध
तिथि 18/21 जून 1576
स्थान हल्दीघाटी
24°53′32″N 73°41′52″E / 24.8921711°N 73.6978065°E / 24.8921711; 73.6978065Erioll world.svgनिर्देशांक: 24°53′32″N 73°41′52″E / 24.8921711°N 73.6978065°E / 24.8921711; 73.6978065
परिणाम अनिर्णायक
योद्धा
Mewar.svgमेवाड़ Alam of the Mughal Empire.svgमुग़ल
सेनानायक
महाराणा प्रताप
हकीम खाँ सूरी 
राणा पूंजा
डोडिया भीम
मान सिंह झाला 
मान सिंह बीड़ा
रामशाह तनवार 
शालिवान सिंह तोमर 
कृष्णादास चुण्डावत
चंद्रसेन राठौर
आचार्य राघवेन्द्र
अकबर
मान सिंह I
स्येद हासिम
स्येद अहमद खान
बहलोल खान 
मुल्तान खान 
काजी खान 
भोकाल सिंह 
खोरासन 

हल्दीघाटी का युद्ध १८ जून १५७६ ईस्वी में मेवाड़ तथा मुगलों के मध्य हुआ था। इस युद्ध में मेवाड़ की सेना का नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया था। इस युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाले एकमात्र मुस्लिम सरदार थे - हकीम खाँ सूरी।

इस युद्ध में मुगल सेना का नेतृत्व मानसिंह तथा आसफ खाँ ने किया। इस युद्ध का आँखों देखा वर्णन अब्दुल कादिर बदायूनीं ने किया। इस युद्ध को आसफ खाँ ने अप्रत्यक्ष रूप से जेहाद की संज्ञा दी। इस युद्ध में बींदा के झालामान ने अपने प्राणों का बलिदान करके महाराणा प्रताप के जीवन की रक्षा की।[1]

अन्त में यूद्ध अनिर्णायक रहा।

सन्दर्भ[संपादित करें]