बेटा (फ़िल्म)

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बेटा
बेटा.jpg
बेटा का पोस्टर
निर्देशक इन्द्र कुमार
निर्माता इन्द्र कुमार
अशोक ठकेरिया
लेखक राजीव कौल
प्रफुल्ल पारेख
कमलेश पांडे (संवाद)
पटकथा

ज्ञानदेव अग्


निहोत्री
अभिनेता अनिल कपूर,
माधुरी दीक्षित,
अरुणा ईरानी,
अनुपम खेर,
लक्ष्मीकांत बेर्डे
संगीतकार आनंद-मिलिंद
छायाकार बाबा आज़मी
वितरक मारुति इंटरनेशनल
प्रदर्शन तिथि(याँ) 3 अप्रैल, 1992
समय सीमा 172 मिनट
देश भारत
भाषा हिन्दी

बेटा इन्द्र कुमार द्वारा निर्देशित 1992 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। मुख्य भूमिकाओं में अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित और अरुणा ईरानी है। यह एक तमिल फिल्म की रीमेक है जिसमें राधा अभिंनेत्री थी। जो बी. पुट्टस्वामय्या द्वारा रचित एक कन्नड़ उपन्यास पर आधारित थी। बेटा 1992 की सबसे बड़ी हिट फिल्म थी। इसने पाँच फिल्मफेयर पुरस्कार जीते थे। इसका संगीत भी काफी लोकप्रिय हुआ था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और उस वर्ष सर्वाधिक कमाई करने वाली फिल्म बनी।

संक्षेप[संपादित करें]

अपनी मां के निधन के बाद, राजू को उसके पिता प्रेम (आकाश खुराना) ने पाला, जो उसकी देखभाल करने में असमर्थ थे और फिर से शादी करने का फैसला करते हैं। वह लक्ष्मी (अरुणा ईरानी) से शादी करते हैं इसे न जाने कि वो एक भयानक और चालाक महिला है। विवाह के तुरंत बाद, उसका भाई, तोताराम (अनुपम खेर) और उसकी पत्नी मैनावती (भारती अचरेकर) घर आ जाते हैं। भाई और बहन दोनों उसके पति को मानसिक रूप से असंतुलित घोषित करते हैं और उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया जाता है। राजू को बिना किसी शिक्षा और कौशल के पाला जाता है और वह अन्य मजदूरों की तरह संपत्ति पर काम करता है।

जब राजू बढ़ा होता है, तो वह अपनी सौतेली माँ के प्रति बहुत समर्पित होता है, जो चाहती है कि वह एक अशिक्षित लड़की से विवाह करे ताकि वह उन पर शासन कर सके। लेकिन राजू लक्ष्मी से शादी कर लेता है, जो शिक्षित है और यह जानने के लिए पर्याप्त चतुर है कि राजू का लाभ उठाया जा रहा है। जब लक्ष्मी राजू की ओर से हस्तक्षेप करती है, तो उसे अपमानित किया जाता है और खुद राजू द्वारा घर को छोड़ने के लिए कहा जाता है। लेकिन लक्ष्मी उसके पिता के कारण रहने का फैसला करती है और राजू से सौम्य व्यवहार करके लक्ष्मी के सारी योजना विफल करती है जिसमें राजू के सौतेले भाई रमेश (आदि ईरानी) के पैसे ऐंठने की योजना शामिल है।

कुछ साल बाद, सरस्वती गर्भवती हो जती है। तो लक्ष्मी को राजू के अजन्मे बच्चे (जो धन का वारिस बनेगा) को दूध में जहर के साथ मारने का प्रयास करती है। सरस्वती, अपनी सास की क्रूरता से सावधान और सतर्क रहती है। उसे इस योजना का पता लगता है और वो अपने पति को सूचित करती हैं। उसने उसके आरोपों पर विश्वास करने से इंकार कर दिया। राजू अपनी सौतेली माँ को साबित करने के लिये दूध पीता है और फिर खांसी में खून उगलता है। इस बिंदु पर, मृत्यु के निकट, राजू को पता चलता है कि वास्तव में सरस्वती ने जो उसकी माँ के बुरे इरादों के बारे में कहा सच है। अपने सामान्य निर्दोष तरीके से, वह कारण पूछता है और कहता है कि धन के लिए उसकी माँ को बस "पूछना" था - वह उसे सब कुछ देने के लिए खुशी से सहमत होता। वह लक्ष्मी को बताता है कि शांति से मरने की उसकी इच्छा पूरी हो जाएगी, अगर वह कम से कम एक बार दुर्भावना के बिना, उसे उसका "बेटा" कहे। उसके शब्द लक्ष्मी को इतना गहराई से छूते हैं कि उसे पता चलता है कि उसकी क्रूरता बहुत दूर तक चली गई है।

राजू के धीरे-धीरे ठीक होने पर फिल्म आगे बढ़ती है। अपनी सांसारिक संपत्ति को "माँ" को देकर वो अपनी पत्नी, पिता और अजन्मे बच्चे के साथ घर छोड़ने के लिए सहमत है। आखिरी पल में, लक्ष्मी ने उन्हें न छोड़ने और अपनी पछतावा साबित करने के लिए विनती की। वह कानूनी दस्तावेजों को फाँड़ देती है और उसे बताती है कि वह जो चाहती है वह उसका "बेटा" है।

मुख्य कलाकार[संपादित करें]

संगीत[संपादित करें]

"बेटा" का संगीत बहुत सफल हुआ था। आनंद-मिलिंद को फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ संगीतकार की श्रेणी में नामांकित किया गया था। लेकिन वह दीवाना के लिये नदीम श्रवण से हार गए। अनुराधा पौडवाल ने सर्वश्रेष्ठ गायिका के लिये लगातार तीसरे साल पुरस्कार प्राप्त किया। आनंद-मिलिंद के अलावा दूसरे संगीतकारों द्वारा संगीतबद्ध गीत एल्बम में तो हैं लेकिन ना तो वो फ़िल्म में प्रस्तुत किये गए हैं और ना ही उन्हें श्रेय दिया गया।

क्र॰शीर्षकगीतकारसंगीतकारगायकअवधि
1."कोयल सी तेरी बोली"समीरआनंद-मिलिंदउदित नारायण, अनुराधा पौडवाल5:38
2."धक धक करने लगा"समीरआनंद-मिलिंदअनुराधा पौडवाल, उदित नारायण7:18
3."धड़कने साँसे जवानी जिंदगानी"दिलीप ताहिरदिलीप सेन-समीर सेनपंकज उधास, अनुराधा पौडवाल5:20
4."सैयाँ जी से छुपके"समीरआनंद-मिलिंदअनुराधा पौडवाल, उदित नारायण7:30
5."सजना मैं मेरी तू मेरा"समीरआनंद-मिलिंदअनुराधा पौडवाल, विपिन सचदेव7:14
6."कितना प्यारा ये चेहरा"देव कोहलीनरेश शर्माअनुराधा पौडवाल, इन्द्रजीत4:40
7."भूल तो माँ से हो नहीं सकती"समीरआनंद-मिलिंदउदित नारायण2:17
8."खुशियों का दिन आया"समीरआनंद-मिलिंदअनुराधा पौडवाल5:57
9."नच मुंडिया नच मुंडिया"देव कोहलीनरेश शर्माअनुराधा पौडवाल, विपिन सचदेव6:47
10."ये दो दिल है चंचल"नक़्श लायलपुरीअमर उत्पलअनुराधा पौडवाल, बबला मेहता6:51

नामांकन और पुरस्कार[संपादित करें]

बेटा फिल्म के लिए माधुरी दीक्षित को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्म फेयर पुरस्कार प्रदान किया गया।

वर्ष नामित कार्य पुरस्कार परिणाम
1993 अनिल कपूर फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार जीत
माधुरी दीक्षित फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार जीत
अरुणा ईरानी फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार जीत
अनुराधा पौडवाल ("धक धक करने लगा") फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका पुरस्कार जीत

साथ ही सरोज खान को "धक धक करने लगा" में नृत्यरचना के लिये फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ था।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]