पांडुरंग शास्त्री आठवले

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
पांडुरंग शास्त्री आठवले
चित्र:Pandurang Shastri Athavale, (1920-2003).jpg
पांडुरंग शास्त्री आठवले
जन्म 19 अक्टूबर 1920
रोहा, महाराष्ट्र, भारत
मृत्यु अक्टूबर 25, 2003(2003-10-25) (उम्र 83)
मुम्बई, महाराष्ट्र, भारत
अन्य नाम दादाजी[1]
व्यवसाय दार्शनिक, प्रवचनकार
जीवनसाथी निर्मला ताई
बच्चे जयश्री तलवालकर (दत्तक)
माता-पिता वैजनाथ शास्त्री
पुरस्कार रेमन मैगसेसे पुरस्कार, टेंपलटन पुरस्कार, Padma Vibhushan in social work[*]

पांडुरंग शास्त्री आठवले (19 अक्टूबर 1920 - 25 अक्टूबर 2003), भारत के दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरू तथा समाज सुधारक थे। उनको प्राय: दादाजी के नाम से जाना जाता है जिसका मराठी में अर्थ 'बड़े भाई साहब' होता है। उन्होने सन् १९५४ में स्वाध्याय आन्दोलन चलाया और स्वाध्याय परिवार की स्थापना की। स्वाध्याय आन्दोलन श्रीमद्भागवद्गीता पर आधारित आत्म-ज्ञान का अन्दोलन है जो भारत के एक लाख से अधिक गावों में फैला हुआ है और इसके कोई लाखो सदस्य हैं। दादाजी गीता एवं उपनिषदों पर अपने प्रवचन के लिये प्रसिद्ध थे।

उन्हें सन् १९९७ में धर्म के क्षेत्र में उन्नति के लिये टेम्पल्टन पुरस्कार (Templton Prize) से सम्मानित किया गया। सन् १९९९ में उन्हें सामुदायिक नेतृत्व के लिये मैगससे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। उसी वर्ष भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]