नवपाषाण युग

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अनेकों प्रकार की निओलिथिक कलाकृतियां जिनमें कंगन, कुल्हाड़ी का सिरा, छेनी और चमकाने वाले उपकरण शामिल हैं

नियोलिथिक युग, काल, या अवधि, या नव पाषाण युग मानव प्रौद्योगिकी के विकास की एक अवधि थी जिसकी शुरुआत मध्य पूर्व[1] में 9500 ई.पू. के आसपास हुई थी, जिसे पारंपरिक रूप से पाषाण युग का अंतिम हिस्सा माना जाता है। नियोलिथिक युग का आगमन सीमावर्ती होलोसीन एपिपेलियोलिथिक अवधि के बाद कृषि की शुरुआत के साथ हुआ और इसने "नियोलिथिक क्रांति" को जन्म दिया; इसका अंत भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर धातु के औजारों के ताम्र युग (चालकोलिथिक) या कांस्य युग में सर्वव्यापी होने या सीधे लौह युग में विकसित होने के साथ हुआ। नियोलिथिक कोई विशिष्ट कालानुक्रमिक अवधि नहीं है बल्कि यह व्यावहारिक और सांस्कृतिक विशेषताओं का एक समूह है जिसमें जंगली और घरेलू फसलों का उपयोग और पालतू जानवरों का इस्तेमाल शामिल है।[2]

नई खोजों से पता चला है कि नियोलिथिक संस्कृति का आरम्भ एलेप्पो से 25 किमी उत्तर की तरफ उत्तरी सीरिया में टेल कैरामेल में 10,700 से 9,400 ई.पू. के आसपास हुआ था।[3] पुरातात्विक समुदाय के भीतर उन निष्कर्षों को अपनाए जाने तक नियोलिथिक संस्कृति का आरम्भ लेवंत (जेरिको, वर्तमानकालीन वेस्ट बैंक) में लगभग 9,500 ई.पू. के आसपास माना जाता है। क्षेत्र में इसका विकास सीधे एपिपेलियोलिथिक नैचुफियन संस्कृति से हुआ था जिसके लोगों ने जंगली अनाजों के इस्तेमाल का मार्ग प्रशस्त किया जो बाद में सही मायने में कृषि के रूप में विकसित हुआ। इस प्रकार नैचुफियन को "प्रोटो-नियोलिथिक" (12,500–9500 ई.पू. या 12,000–9500 ई.पू.[1]) कहा जा सकता है। चूंकि नैचुफियन अपने आहार में जंगली अनाजों पर निर्भर हो गए थे और उनके बीच एक तरह की सुस्त जीवन शैली का आरम्भ हो गया था इसलिए यंगर ड्रायस से जुड़े जलवायु परिवर्तनों ने संभवतः लोगों को खेती का विकास करने पर मजबूर कर दिया होगा। 9500-9000 ई.पू. तक लेवंत में कृषक समुदाय का जन्म हुआ और वे एशिया माइनर, उत्तर अफ्रीका और उत्तर मेसोपोटामिया में फ़ैल गए। आरंभिक नियोलिथिक खेती केवल कुछ पौधों तक ही सीमित थी जिनमें जंगली और घरेलू दोनों तरह के पौधे शामिल थे जिनमें एंकोर्न गेहूं, बाजरा और स्पेल्ट (जर्मन गेहूं) और कुत्ता, भेड़ और बकरीपालन शामिल था। लगभग 8000 ई.पू. तक इसमें पालतू मवेशी और सूअर शामिल हुए और स्थायी रूप से या मौसम के अनुसार बस्तियां बसाई गई और बर्तन का इस्तेमाल शुरू हुआ।[4]

नियोलिथिक की सभी सांस्कृतिक तत्व संबंधी विशेषताएं हर जगह एक ही क्रम में दिखाई नहीं दी: निकट पूर्व में आरंभिक कृषक समाज में बर्तनों का इस्तेमाल नहीं होता था और ब्रिटेन में यह बात अस्पष्ट रही है कि आरंभिक नियोलिथिक काल में किस हद तक पौधों का इस्तेमाल हुआ था या स्थायी रूप से बसे हुए समुदायों का भी वजूद था या नहीं। दुनिया के अन्य हिस्सों जैसे अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्व एशिया में स्वतंत्र सभ्यीकरण कार्यक्रमों के फलस्वरूप उनकी अपनी क्षेत्र विशिष्ट नियोलिथिक संस्कृतियों का जन्म हुआ जो यूरोप और दक्षिण पश्चिम एशिया की संस्कृतियों से बिल्कुल अलग था। आरंभिक जापानी समाजों में खेती के विकास से पहले मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता था।[5][6][7]

पेलियोलिथिक के विपरीत जहां एक से अधिक मानव समाजों का वजूद था, केवल एक मानव प्रजाति (होमो सैपियंस) नियोलिथिक तक पहुंचने में कामयाब हुई थी। हो सकता है कि होमो फ्लोरेसिएंसिस लगभग 12,000 साल पहले नियोलिथिक के बिल्कुल प्रारंभ में बचे रह गए हों.

नियोलिथिक शब्द की व्युत्पत्ति यूनानी शब्द νεολιθικός, नियोलिथिकोस से हुई है जिसका विच्छेदन करने पर νέος का मतलब "नियोस " अर्थात् 'नया' और λίθος का अर्थ "लिथोस " अर्थात् 'पत्थर' है और इस तरह का इसका शाब्दिक अर्थ "नव पाषाण युग" है। इस शब्द का आविष्कार 1865 में सर जॉन लुबोक द्वारा एक त्रियुगीन प्रणाली के एक शोधन के रूप में किया गया था।

मिट्टी के बर्तनों के विकास के चरण के आधार पर काल-विभाजन[संपादित करें]

दक्षिण पूर्व एशिया (अर्थात् मध्य पूर्व) में नियोलिथिक के रूप में पहचानी जाने वाली संस्कृतियों का आगमन दसवीं सहस्राब्दी ई.पू. में हुआ था।[1] आरंभिक विकास लेवंत (जैसे प्री-पोटरी नियोलिथिक ए और प्री-पोटरी नियोलिथिक बी) में दिखाई दिया और वहां से यह पूर्व और पश्चिम की तरफ फैलता चला गया। नियोलिथिक संस्कृतियों को 8000 ई.पू. के आसपास दक्षिण पूर्वी एनाटोलिया और उत्तरी मेसोपोटामिया में भी देखा गया है।

चीन के हेबेई प्रोविंस में यिक्सियन के पास प्रागैतिहासिक बेईफुदी साइट में लगभग 5000-6000 ई.पू. की सिशान और जिंगलोंगवा संस्कृतियों के साथ एक समकालीन संस्कृति के अवशेष शामिल हैं और ताइहांग पर्वतों के पूर्व में स्थित ये नियोलिथिक संस्कृतियां दो उत्तरी चीनी संस्कृतियों के बीच के पुरातात्विक खाई को भरती है। खुदाई क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 1200 वर्गमीटर से अधिक है और साइट के नियोलिथिक निष्कर्षों के संग्रह के दो चरण हैं।[8]

नियोलिथिक 1 - प्री-पोटरी नियोलिथिक ए (पीपीएनए)[संपादित करें]

एलेप्पो के उत्तर में 25 किमी दूर टेल कैरामेल में प्रो॰ आर. एफ. माजुरोस्की द्वारा संचालित एक सीरियाई-पोलिश संयुक्त खुदाई टीम को मिले हाल के निष्कर्षों से नियोलिथिक 1 (पीपीएनए) का आरम्भ 10700 से 9400 ई.पू. के आसपास होने का पता चला है।[3] उस साइट की पिछली खुदाई से चार वृत्ताकार टावरों का पता चला था जो ग्यारहवीं सहस्राब्दी और लगभग 9650 ई.पू.[कृपया उद्धरण जोड़ें] के बीच की है।

टेल कैरामेल के निष्कर्षों का पता लगने तक और पुरातात्विक समुदाय के भीतर उसे अपनाए जाने तक लेवंत (जेरिको, फिलिस्तीन और जबील (बाइबलोस), लेबनान) की 9500 से 9000 ई.पू. के आसपास की साइटों को अभी भी नियोलिथिक 1 (पीपीएनए) का आरम्भ माना जाता है। ब्रिटिश संग्रहालय और फिलाडेल्फिया की प्रयोगशालाओं[कृपया उद्धरण जोड़ें] में वैज्ञानिकों द्वारा कार्बन डेटिंग में विभिन्न परिणामों की वजह से निश्चितता के साथ वास्तविक तिथि का निर्धारण नहीं किया गया है।

10000 ई.पू. की गोबेक्ली टेपे में दक्षिण पूर्वी तुर्की में एक आरंभिक मंदिर क्षेत्र को नियोलिथिक 1 आरम्भ माना जा सकता है। इस साइट का विकास खानाबदोश शिकारी जनजातियों द्वारा किया गया था जो इसके आसपास के क्षेत्र में स्थायी निवास की कमी का सबूत है। यह मंदिर क्षेत्र पूजा के लिए मानव द्वारा निर्मित सबसे पुराना ज्ञात स्थल हो सकता है।[9] 25 एकड़ (100,000 मी2) को कवर करने वाले कम से कम सात प्रस्तर वृत्तों में चूना पत्थर के खम्भे हैं जिन पर जानवरों, कीड़ों और पक्षियों की नक्काशी की गई है। संभवतः छतों को सहारा देने वाले इन खम्भों का निर्माण करने के लिए शायद सैकड़ों लोगों द्वारा पत्थर के औजारों का इस्तेमाल किया गया था।

नियोलिथिक 1 की प्रमुख उन्नति वास्तविक खेती थी। प्रोटो-नियोलिथिक नैचुफियन संस्कृतियों में जंगली अनाजों को काट लिया जाता था और शायद पहले से बीज का चुनाव और फिर से बीज बोने का काम किया जाता था। अनाज को पीसकर आटा बनाया जाता था। एमर गेहूं की खेती की जाती थी और जानवरों को झुण्ड में रखा जाता था और पाला (पशुपालन एवं चयनात्मक प्रजनन) जाता था।

इक्कीसवीं सदी में 9400 ई.पू. में जेरिको के एक मकान में अंजीर के अवशेषों का पता चला. ये उत्परिवर्ती किस्म के अंजीर हैं जिनका कीड़ों द्वारा परागण नहीं किया जा सकता है और इसलिए केवल कटाई द्वारा ही पेड़ों को फिर से उगाया जा सकता है। इस सबूत से यह पता चलता है कि अंजीर पहली कृषि फसल थी जो खेती की तकनीक के आविष्कार को चिह्नित करता है। यह अनाजों की पहली खेती से सदियों पहले की बात है।[10]

काफी हद तक नैचुफियन के मकानों की तरह एकल कमरों वाले गोलाकार मकानों के साथ बस्तियां और स्थायी हो गईं। हालांकि इन मकानों को पहली बार मिट्टी की ईंटों से बनाया गया था। पति के पास केवल एक मकान होता था जबकि उसकी हरेक पत्नी आसपास के मकानों में अपने बच्चों के साथ रहती थीं।[कृपया उद्धरण जोड़ें] बस्ती के चारों तरफ पत्थर की एक दीवार और शायद पत्थर का एक टावर (जैसा कि जेरिको में था) होता था। यह दीवार बाढ़ से बचाने या जानवरों को बाड़े में बंद करके रखने की तरह आसपास के समूहों से बचाने का काम करती थी। वहां कुछ बाड़ों का भी इंतजाम है जिनसे अनाज और मांस भण्डारण का पता चलता है।

नियोलिथिक 2 - प्री-पोटरी नियोलिथिक बी (पीपीएनबी)[संपादित करें]

नियोलिथिक 2 (पीपीएनबी) का आरम्भ लेवंत (जेरिको, फिलिस्तीन) में 8500 ई.पू. के आसपास हुआ था।[1] पीपीएनए तिथियों की तरह उपरोक्त उल्लिखित उन्हीं प्रयोगशालाओं के दो संस्करण थे। लेकिन यह पारिभाषिक संरचना दक्षिण पूर्व एनाटोलिया और मध्य एनाटोलिया बेसिन की बस्तियों के लिए सुविधाजनक नहीं है। यह युग मेसोलिथिक युग से पहले था!

बस्तियों के मकान आयताकार और मिट्टी की ईंटों से बने होते थे जहां पूरा परिवार एक या एकाधिक कमरों में एक साथ रहता था। कब्र की खुदाई से एक पूर्वज पंथ का पता चलता है जहां लोग मृतक की खोपड़ियों को संरक्षित करते थे जिन्हें चेहरे के अनुरूप बनाने के लिए मिट्टी से लेप दिया जाता था। केवल हड्डियों के बचने लाश के बाकी हिस्से को बस्ती के बाहर सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता था और उसके बाद उन हड्डियों को बस्ती के भीतर फर्श के नीचे या मकानों के बीच में दफन कर दिया जाता था।

नियोलिथिक 3 - पोटरी नियोलिथिक (पीएन)[संपादित करें]

नियोलिथिक 3 (पीएन) का आरम्भ फर्टाइल क्रेसेंट में 6500 ई.पू. के आसपास हुआ था।[1] तब तक मिट्टी के बर्तनों के साथ हलफियन (तुर्की, सीरिया, उत्तरी मेसोपोटामिया) और उबैद (दक्षिणी मेसोपोटामिया) जैसी विशिष्ट संस्कृतियों का उद्भव हुआ।

चालकोलिथिक अवधि का आरम्भ लगभग 4500 ई.पू. में हुआ था, उसके बाद लगभग 3500 ई.पू. में कांस्य युग का आरम्भ हुआ जिसने नियोलिथिक संस्कृतियों की जगह ली।

क्षेत्र के आधार पर काल-विभाजन[संपादित करें]

फर्टाइल क्रेसेंट[संपादित करें]

9500 ई.पू. के आसपास प्री-पोटरी नियोलिथिक ए (पीपीएनए) चरण से संबंधित पहली पूरी तरह से विकसित नियोलिथिक संस्कृतियां फर्टाइल क्रेसेंट में दिखाई दी। [1] लगभग 10700 से 9400 ई.पू. तक एलेप्पो के उत्तर में 25 किमी की दूरी पर टेल कैरामेल में एक बस्ती स्थापित हुई। इस बस्ती में 9650 के समय की दो मंदिर शामिल थी।[3] प्री-पोटरी नियोलिथिक ए (पीपीएनए) के दौरान लगभग 9000 ई.पू. में लेवंत में दुनिया का पहला ज्ञात नगर जेरिको दिखाई दिया। यह पत्थर और संगमरमर की एक दीवार से घिरा हुआ था जिसमें 2000-3000 लोग रहते थे और यहां पत्थर का एक विशाल टावर भी था।[11] लगभग 6000 ई.पू. में लेबनान, इजायल और फिलिस्तीन, सीरिया, एनाटोलिया और उत्तरी मेसोपोटामिया में हलफ संस्कृति दिखाई पड़ी और जो शुष्क कृषि पर टिकी थी।

दक्षिणी मेसोपोटामिया[संपादित करें]

जलोढ़ मैदानों (सुमेर/एलाम). थोड़ी सी बारिश की वजह से सिंचाई व्यवस्था जरूरी है। 5500 ई.पू. की उबैद संस्कृति.

उत्तरी अफ्रीका[संपादित करें]

बकरी और भेड़पालन संभवतः 6000 ई.पू.[कृपया उद्धरण जोड़ें] में निकट पूर्व से मिस्र पहुंच गया। ग्रीम बार्कर का कहना है "नील घाटी में पालतू जानवरों और पौधों का पहला निर्विवाद सबूत उत्तरी मिस्र में पांचवीं सहस्राब्दी ई.पू. के आरम्भ तक और आगे चलकर दक्षिण में एक हजार साल बाद तक दिखाई नहीं दिया है और दोनों मामलों में यह उन रणनीतियों का हिस्सा है जो अभी भी काफी हद तक मछली पकड़ना, शिकार करना और जंगली पौधों को इकठ्ठा करने पर निर्भर है और इससे यह पता चलता है कि गुजर बसर के तरीके में होने वाले इस तरह के परिवर्तन निकट पूर्व से आने वाले किसानों की वजह से नहीं हुए थे बल्कि यह एक स्वदेश विकास था और इसके साथ ही साथ अनाजों को या तो स्वदेश से या अदला बदली के माध्यम से प्राप्त किया जाता था।[12] अन्य विद्वानों का तर्क है कि मिस्र में खेती और पालतू जानवरों (और साथ ही साथ मिट्टी की ईंटों से मकान, इमारत इत्यादि बनाने की वास्तुकला और अन्य नियोलिथिक सांस्कृतिक विशेषताएं) का प्राथमिक प्रोत्साहन मध्य पूर्व से मिला था।[13][14][15]

यूरोप[संपादित करें]

निओलिथिक यूरोप, में मुख्य संस्कृति परिसरों में से कुछ के वितरण को दर्शाता हुआ नक्शा.4500 ई.पू.
मेसीडोनिया गणराज्य के तुम्बा मदज़री की महामयी देवी
स्कारा ब्रे, स्कॉटलैंड. गृह सज्जा सबूत (अलमारियां)

दक्षिण पूर्व यूरोप में कृषि समाज सबसे पहले 7000 ई.पू.[16] के आसपास और मध्य यूरोप में 5500 ई.पू. के आसपास दिखाई दिया। इस क्षेत्र के सबसे आरंभिक सांस्कृतिक परिसरों में थेसली की सेस्क्लो संस्कृति शामिल है जो बाद में स्तार्सेवो-कोरोस (क्रिस), लाइनियरबैंडकेरामिक और विंका को प्रदान करते हुए बाल्कन में फ़ैल गई। सांस्कृतिक प्रसार और लोगों के प्रवासन के एक संयोजन के माध्यम से नियोलिथिक परम्पराएं पश्चिम और उत्तर की तरफ फैलती हुई लगभग 4500 ई.पू. तक उत्तर पश्चिमी यूरोप तक पहुंच गई। हो सकता है कि विंका संस्कृति ने लेखन की सबसे आरंभिक प्रणाली, विंका चिह्नों का सृजन किया हो हालांकि प्रायः सर्वत्र पुरातत्वविदों ने इस बात को स्वीकार किया है[कौन?] कि सुमेरियन कीलाक्षर स्क्रिप्ट ही लेखन का सबसे आरंभिक वास्तविक रूप था और विंका चिह्नों ने काफी हद तक लेखन के एक वास्तविक विकसित रूप के बजाय पिक्टोग्राम और इडियोग्राम का प्रदर्शन किया।[कृपया उद्धरण जोड़ें] कुकुटेनी-ट्राईपिलियन संस्कृति ने 5300 से 2300 ई.पू. तक रोमानिया, मोल्डोवा और यूक्रेन में बहुत सी बस्तियों का निर्माण किया। गोज़ो (माल्टीज द्वीपसमूह में) और मनाजद्रा (माल्टा) के भूमध्यसागरीय द्वीप पर गगान्तिजा के मेगालिथिक मंदिर परिसर अपनी विशाल नियोलिथिक संरचनाओं के लिए उल्लेखनीय हैं जिनमें से सबसे पुराना परिसर 3600 ई.पू. के आसपास का है। हाइपोजियम ऑफ हल-सफ्लिएनी, पाओला, माल्टा एक भूमिगत संरचना है जिसका पता 2500 ई.पू. के आसपास की गई खुदाई से चला है; वास्तव में यह एक अभयारण्य था जो एक कब्रिस्तान बन गया जो दुनिया का एकमात्र प्रागैतिहासिक भूमिगत मंदिर है जहां माल्टीज द्वीपों की प्रागितिहास में अनोखे पत्थर की मूर्ति में कलात्मकता की झलक मिलती है।

दक्षिण और पूर्व एशिया[संपादित करें]

उत्तर भारत की सबसे आरंभिक नियोलिथिक साइटों में से एक लहुरादेवा जो मध्य गंगा क्षेत्र में स्थित है जो आठवीं सहस्राब्दी ई.पू. के आसपास के सी14 समय का है।[17] अभी हाल ही में गंगा और यमुना नदियों के संगम के पास झुसी नामक एक और स्थान का पता चला है जो अपने नियोलिथिक स्तरों के लिए 7100 ई.पू. की एक सी14 डेटिंग है।[18] लहुरादेवा पर पुरात्वविद राकेश तिवारी की एक नई 2009 रिपोर्ट से नए सी14 डेटिंग का पता चलता है जो चावल से जुडे 8000 ई.पू. और 9000 ई.पू. के बीच के समय का है जो लहुरादेवा को सम्पूर्ण दक्षिण एशिया का सबसे आरंभिक नियोलिथिक साइट बनाता है।

दक्षिण एशिया का एक और पुराना नियोलिथिक साइट 7000 ई.पू. का मेहरगढ़ है। यह "पाकिस्तान के बलूचिस्तान के काची के मैदान में स्थिति है और यह दक्षिण एशिया में खेती (गेंहूं और जौ) और पशुपालन (मवेशी, भेड़ और बकरियां) की दृष्टि से सबसे आरंभिक साइटों में से एक है।[19]

दक्षिण भारत में निलियोथिक का आरम्भ 3000 ई.पू. तक हुआ और यह लगभग 1400 ई.पू. तक कायम रहा जब मेगालिथिक संक्रमण काल का आरम्भ हुआ। कर्नाटक क्षेत्र में 2500 ई.पू. के बाद से शुरू होकर बाद में तमिलनाडु में फैलने वाले ऐशमाउन्ड्स दक्षिण भारतीय नियोलिथिक की एक विशेषता है।

पूर्व एशिया में सबसे आरंभिक साइटों में लगभग 7500 ई.पू. से 6100 ई.पू. तक की पेंगतौशन संस्कृति और लगभग 7000 ई.पू. से 5000 ई.पू. तक की पिलिगंग संस्कृति शामिल है।

'नियोलिथिक' (जिसे इस अनुच्छेद में परिष्कृत पत्थर के हथियारों के रूप में परिभाषित किया गया है) पश्चिम पापुआ (इण्डोनेशियाई न्यू गिनी) के छोटे और अत्यंत दूरवर्ती और अगम्य इलाकों की एक जीवन शैली के रूप में कायम है। परिष्कृत पत्थर की बसूलों और कुल्हाड़ियों का इस्तेमाल आजकल (2008 के अनुसार  सीई) उन क्षेत्रों में किया जाता है जहां धातु के हथियारों की उपलब्धता सीमित है। अगले कुछ वर्षों में यह सब एक साथ समाप्त होने वाला है क्योंकि पुरानी पीढ़ी खत्म हो जाएगी और स्टील ब्लेडों और चेनसॉ का प्रचलन बढ़ जाएगा.

अमेरिका[संपादित करें]

मेसोअमेरिका में लगभग 4500 ई.पू. तक लेकिन शायद ज्यादा से ज्यादा 11,000-10,000 ई.पू. पहले इसी तरह की घटनाओं का एक समूह (अर्थात् फसलों की खेती और अनुद्योगशील जीवनशैलियां) दिखाई दिया हालांकि यहां नियोलिथिक के मध्य से अंतिम दौर के बजाय "प्री-क्लासिक" (या रचनात्मक) शब्द का इस्तेमाल किया गया है और आरंभिक नियोलिथिक के लिए पुरातन युग और पूर्ववर्ती काल के लिए पैलियो-भारतीय शब्द का इस्तेमाल किया जाता है हालांकि इन संस्कृतियों को आम तौर पर नियोलिथिक से संबंधित नहीं माना जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

सामाजिक संगठन[संपादित करें]

मानवरूपी निओलिथिक मूर्ति
निओलिथिक मिट्टी से निर्मित मानवरूपी महिला की मूर्ति

नियोलिथिक युग की अधिकांश अवधि में लोग छोटी जनजातियों के रूप में रहते थे जो कई समूहों या वंशों से बनी होती थीं।[20] अधिकांश नियोलिथिक समाजों की विकसित सामाजिक स्तरीकरण के बहुत कम वैज्ञानिक सबूत मिले हैं; सामाजिक स्तरीकरण काफी हद तक परवर्ती कांस्य युग से जुड़ा हुआ है।[21] हालांकि कुछ परवर्ती नियोलिथिक समाजों ने जटिल स्तरीकृत सरदारी व्यवस्था का निर्माण किया था जो प्राचीन हवाईवासियों जैसी पोलिनिशियाई समाजों की तरह था लेकिन फिर भी ज्यादातर नियोलिथिक समाज अपेक्षाकृत सरल और समतावादी थे।[20] हालांकि नियोलिथिक समाज आम तौर पर पूर्ववर्ती पेलियोलिथिक संस्कृतियों और शिकारी समूह संस्कृतियों की तुलना में स्पष्ट रूप से अधिक पदानुक्रमित थे।[22][23] पशुपालन (8000 ई.पू. के आसपास) के परिणामस्वरूप सामाजिक असमानता में काफी वृद्धि हुई। पशुधन पर कब्ज़ा करने के फलस्वरूप परिवारों के बीच प्रतिस्पर्धा का जन्म हुआ और इसके परिणामस्वरूप पैतृक धन असमानता दिखाई देने लगी। काफी बड़े पैमाने पर मवेशियों के झुण्ड पर काबू पाने वाले नियोलिथिक चरवाहों ने धीरे-धीरे और अधिक पशुधन पर कब्ज़ा किया जिससे आर्थिक असमानता और स्पष्ट हो गई।[24] हालांकि सामाजिक असमानता के सबूत को लेकर अभी भी काफी विवाद है क्योंकि कैटल हुयुक जैसी बस्तियों से घरों और दफ़न स्थलों के आकार के अंतर में व्याप्त अत्यधिक कमी का पता चलता है जिससे पूंजी की अवधारणा के बिना किसी सबूत के साथ एक अधिक समतावादी समाज का संकेत मिलता है हालांकि कुछ घर अन्य घरों की तुलना में थोड़े बड़े और अधिक विस्तृत ढंग से सुसज्जित दिखाई पड़ते हैं।

परिवार और कुटुंब अभी भी काफी हद तक आर्थिक दृष्टि से स्वतंत्र थे और कुटुंब संभवतः जीवन का केन्द्र था। हालांकि मध्य यूरोप में की गई खुदाई से पता चला है कि आरंभिक नियोलिथिक लाइनियर सीरमिक संस्कृतियां ("लाइनियरबैंडकेरामिक ") 4800 ई.पू. और 4600 ई.पू. के बीच गोलाकार खाइयों वाली बड़ी इमारतों का निर्माण करती थीं। इन संरचनाओं (और उनके परवर्ती समकक्ष रचनाएं जैसे उच्चमार्गी बाड़े, दफ़न टीले और हेंज) को बनाने के लिए काफी समय और मजदूरों की जरूरत थी जिससे इस बात का संकेत मिलता है कि कुछ प्रभावशाली व्यक्ति मानव श्रम को संगठित करने और उनका दिशानिर्देश करने में सक्षम थे हालांकि गैर-वर्गीकृत और स्वैच्छिक कार्यों की अभी भी काफी सम्भावना है।

राइन के किनारे स्थित लाइनियरबैंडकेरामिक साइटों में आरक्षित बस्तियों के काफी सबूत मिले हैं क्योंकि कम से कम कुछ गांवों को कुछ समय के लिए एक नोकदार लकड़ियों की मोर्चेबंदी और एक बाहरी खाई से आरक्षित किया गया था।[25][26] इन मोर्चेबन्दियों और हथियार की आघात करने वाली हड्डियों वाली बस्तियों जैसे हर्क्सहीम की खोज की गई है[27] जिससे "...समूहों के बीच व्यवस्थित हिंसा" का पता चलता है चाहे यह किसी नरसंहार या किसी सामरिक कृत्य का क्षेत्र हो और पूर्ववर्ती पेलियोलिथिक की तुलना में नियोलिथिक युग के दौरान युद्ध आदि संभवतः बहुत आम थे।[28] इसने एक "शांतिपूर्ण अनारक्षित जीवन शैली" जीने वाली लाइनियर पोटरी संस्कृति के आरंभिक दृष्टिकोण को त्याग दिया। [29]

श्रम नियंत्रण और अंतर-समूह संघर्ष एक करिश्माई व्यक्ति के नेतृत्व वाले कॉर्पोरेट स्तर या 'जनजातीय' समूहों की विशेषता है; चाहे वह एक वर्ष समूह प्रमुख के रूप में काम करने वाला कोई 'बड़ा व्यक्ति' हो या कोई आद्य-प्रमुख. चाहे मौजूद संगठन की गैर-वर्गीकृत प्रणाली बहस का मुद्दा हो या उसका कोई सबूत न हो जिससे इस बात का स्पष्ट रूप से पता चल सके कि नियोलिथिक समाज किसी हावी वर्ग या व्यक्ति के अधीन काम करती थी जैसा कि यूरोपीय आरंभिक कांस्य युग की सरदार व्यवस्था में होता था।[30] नियोलिथिक (और पेलियोलिथिक) समाजों की स्पष्ट निहित समतावाद की व्याख्या करने वाले सिद्धांतों का निर्माण किया गया है जिनमें से आदिम साम्यवाद की मार्क्सवादी अवधारणा सबसे उल्लेखनीय है।

आश्रय[संपादित करें]

तुज़्ला, बोस्निया और हर्जेगोविना में एक पुनर्निर्मित निओलिथिक गृह

पेलियोलिथिक से नियोलिथिक युग के आरंभिक लोगों के आश्रय में काफी परिवर्तन हुआ। पेलियोलिथिक युग में लोग आम तौर पर स्थायी निर्माण में नहीं रहते थे। नियोलिथिक युग में मिट्टी की ईंटों से बने घर दिखाई देने लगे जिन पर प्लास्टर किया गया था।[31] कृषि के विकास के फलस्वरूप स्थायी मकानों का निर्माण संभव हुआ। दरवाजे छत पर बनाए जाते थे जहां तक पहुंचने के लिए मकानों के भीतर और बाहर दोनों तरफ सीढ़ियों की व्यवस्था थी।[31] छत को अंदर से शहतीरों के सहायता से खड़ा किया जाता था। उबड़-खाबड़ जमीन को मचानों, चटाइयों और खालों से ढंक दिया जाता था जिस पर लोग सोते थे।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

खेती[संपादित करें]

एक कुकुटेनी-ट्राईपिलियन संस्कृति के बारहसिंगे के सींगों से निर्मित हल
एक यूरोपीय निओलिथिक स्थल से प्राप्त की खाद्य पदार्थ और खाना पकाने की सामग्री: चक्की का पाट, जली रोटी, अनाज और छोटे सेब, खाना पकाने वाला मिट्टी का एक बर्तन और सींग और लकड़ी से बने डिब्बे

मानव जीविका और जीवन शैली में एक महत्वपूर्ण और सुदूरगामी परिवर्तन उन क्षेत्रों में खेती करना था जहां सबसे पहले फसलों की खेतीबारी शुरू की गई: अनिवार्य रूप से खानाबदोश शिकारी समूह की जीविका तकनीक या देहाती पारमानवता पर पूर्व निर्भरता को सबसे पहले पूरा किया गया और उसके बाद उत्तरोत्तर उसकी जगह खेतों से उत्पन्न खाद्य पदार्थों पर निर्भरता ने ले लिय. ऐसी भी मान्यता है कि इन घटनाक्रमों पर बस्तियों के विकास का काफी प्रभाव पड़ा था क्योंकि ऐसा माना जा सकता है कि कह्तों को तैयार करने के लिए अधिक समय और मेहनत खर्च करने की बढ़ती जरूरत के लिए अधिक स्थानीयकृत आवास की आवश्यकता थी। यह चलन कांस्य युग में जारी रहा और अंत में नगरों का रूप धारण कर लिया और उसके बाद शहरों और राज्य के रूप में बदल गया जिनकी विशाल जनसंख्या को खेतों की बढ़ती उत्पादकता द्वारा बनाए रखा जा सकता था।

नियोलिथिक युग में आरंभिक कृषि प्रक्रियाओं के आरम्भ से जुडे मानव संपर्क और जीविका के तरीकों के गहरे मतभेद को नियोलिथिक क्रांति का नाम दिया गया है जो 1920 के दशक में ऑस्ट्रेलियाई पुरातत्वविद वेरे गॉर्डन चाइल्ड द्वारा गढ़ा गया शब्द है।

कृषि प्रौद्योगिकी के विकास और बढ़ती विशेषज्ञता का एक संभावित फायदा अतिरिक्त फसलों के निर्माण, दूसरे शब्दों में समुदाय की तत्काल जरूरतों से अधिक भोजन की आपूर्ति की सम्भावना थी। अतिरिक्त फसलों को परवर्ती उपयोग के लिए भंडारित किया जा सकता है या संभवतः अन्य आवश्यक सामग्रियों या सुख-साधनों के लिए अदल-बदल किया जा सकता है। कृषि जीवन सुरक्षा प्रदान करती थी जबकि देहाती जीवन ऐसा करने में असमर्थ थी और अनुद्योगशील कृषक जनसंख्या में खानाबदोश की तुलना में अधिक तेजी से वृद्धि होने लगी।

हालांकि आरंभिक किसानों पर भी सूखे या कीड़ों की वजह से होने वाले अकाल का प्रतिकूल असर पड़ता था। उदाहरणस्वरुप जहां कृषि जीवन का प्रबल साधन बन गया था, इन कमियों की संवेदनशीलता खास तौर पर तीव्र हो सकती थी जो कृषक जनसंख्या को इस हद तक प्रभावित कर सकता था जिसे अन्य प्रकार से संभवतः पूर्व शिकारी समुदायों ने नियमित रूप से अनुभव नहीं किया था।[24] फिर भी कृषि समुदाय आम तौर पर सफल साबित हुए और खेतीबारी के तहत उनका विकास और विस्तार जारी रहा।

इनमें से कई नए नवेले कृषि समुदायों से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन एक तरह का आहार था। क्षेत्र, मौसम, उपलब्ध स्थानीय पौधा और पशु संसाधनों और ग्राम्य जीवन और शिकार के आधार पर पूर्व कृषक आहारों में अंतर था। उत्तर-कृषक आहार सफलतापूर्वक खेती से उत्पन्न अनाजों, पौधों के एक सीमित पैकेज और विभिन्न प्रकार के पालतू जानवरों और पशु उत्पादों तक सीमित था। शिकार और एकत्रीकरण द्वारा आहार का अनुपूरण भूमि की वहन क्षमता से ऊपर जनसंख्या और उच्च अनुद्योगशील स्थानीय जनसंख्या सघनता द्वारा परिवर्तनीय ढंग से बाधित थी। कुछ संस्कृतियों में वर्धित स्टार्च और पौधों की प्रोटीन की तरफ महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। इन आहार संबंधी परिवर्तनों से संबंधित पोषण लाभ और कमियां और आरंभिक सामाजिक विकास पर उनका समग्र प्रभाव अभी भी बहस का मुद्दा है।

इसके अतिरिक्त जनसंख्या का बढ़ा हुआ घनत्व, जनसंख्या की घटी हुई गतिशीलता, पालतू जानवरों की बढ़ी हुई निरंतर निकटता और अपेक्षाकृत घनी जनसंख्या वाले क्षेत्रों का निरंतर व्यवसाय ने स्वच्छता जरूरतों और रोगों के पैटर्न को बदल दिया होता।

प्रौद्योगिकी[संपादित करें]

रोमानिया की एक निओलिथिक शिल्पकृति
एक फर्नीचर को दर्शाती मिटटी की शिल्पकृति; 4900 से 4750 ईसा पूर्व

नियोलिथिक लोग कुशल किसान थे जो फसलों की चौकसी करने, उनकी कटाई करने और उन्हें प्रसंस्कृत करने (जैसे दरांती ब्लेड और पीसने का पत्थर) और खाद्य उत्पादन (जैसे मिट्टी के बर्तन, हड्डी के सामान) के लिए आवश्यक तरह-तरह के औजारों का निर्माण करते थे। वे अन्य प्रकार के पत्थर के औजारों और गहनों का निर्माण करने में भी कुशल थे जिनमें प्रक्षेप्य सूई, माला और मूर्तियां शामिल थीं। लेकिन बड़े पैमाने पर जंगलों को साफ़ करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला परिष्कृत पत्थर की कुल्हाड़ी अन्य सभी औजारों में सर्वश्रेष्ठ था। बसूला की सहायता से उदाहरण के तौर पर आश्रय, संरचनाओं और नावों के लिए लकड़ियों को आकार देने की वजह से नई नवेली कृषि भूमि का इस्तेमाल करने में वे सक्षम हुए.

लेवंत, एनाटोलिया, सीरिया, उत्तरी मेसोपोटामिया और मध्य एशिया के नियोलिथिक लोग भी निपुण निर्माता थे जो मकानों और गांवों का निर्माण करने के लिए मिट्टी के ईंटों का इस्तेमाल करते थे। कैटल होयुक में मकानों को मनुष्यों और जानवरों के विस्तृत दृश्यों के साथ प्लास्टर और पेंट किया जाता था। यूरोप में टट्टरों और चित्रों से लंबे मकानों का निर्माण किया जाता था। मृतकों के लिए विस्तृत कब्रों का निर्माण किया जाता था। ये कब्र खास तौर पर आयरलैंड में काफी तादाद में हैं जहां आज भी कई हजार कब्र मौजूद हैं। ब्रिटिश द्वीपों में रहने वाले नियोलिथिक लोग अपने मृतकों के लिए लंबे स्मारकों और चैंबर मकबरों निर्माण करते थे और उच्चमार्गी शिविरों, हेन्जों, चकमक पत्थरों की सुरंगों और कर्सस समाधियों का निर्माण करते थे। भावी महीनों के लिए खाद्य का संरक्षण करने के तरीकों का पता लगाने के लिए भी यह जरूरी था जैसे अपेक्षाकृत हवाबंद डिब्बों का निर्माण करना और संरक्षक के रूप में नमक जैसे पदार्थों का इस्तेमाल करना।

अमेरिकास और पैसिफिक के लोगों ने यूरोपीय संपर्क के समय तक नियोलिथिक स्तर की औजार प्रौद्योगिकी को बरक़रार रखा। इसके अपवादों में महान झील क्षेत्र में पाए गए तांबे के कुछ हैचेट (कुल्हाड़ी) और स्पियरहेड (भाले की नोक) शामिल हैं। हालांकि इन क्षेत्रों में जटिल सामाजिक-राजनीतिक संगठन, निर्माण प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक ज्ञान एवं भाषाई संर्क्ति के विकास के कई उदाहरण हैं जो अफ्रीका और यूरेशिया की उत्तर-नियोलिथिक घटनाक्रमों के समान हैं। उनमें इंका, माया, प्राचीन हवाई, एज़्टेक, इरोक्युओईस, मिसिसिपियन और माओरी शामिल हैं।

वस्त्र[संपादित करें]

अधिकांश कपड़े संभवतः जानवरों की खाल से बने होते थे, जैसा कि बड़े पैमाने पर मिली हड्डी और सींग की सुइओं से पता चलता है जो कपड़ों की बजाय चमड़े को सिलने के लिए अधिक अनुकूल हैं। हालांकि ऊन के कपड़े और लाइनेन संभवतः ब्रिटिश नियोलिथिक युग में उपलब्ध थे; इस बात का संकेत मिलता खुदाई में प्राप्त छिद्रयुक्त पत्थरों से मिलता है जिनका इस्तेमाल (आकार के आधार पर) शायद धुरी छल्ले या करघे के वजन के रूप में किया जाता था। नियोलिथिक युग में पहने जाने वाले वस्त्र संभवतः ओत्जी द आइसमैन द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों की तरह ही होंगे हालांकि वह न तो ब्रिटिश था और न ही नियोलिथिक (क्योंकि वह परवर्ती ताम्र युग से संबंध रखता था).

शुरुआती बस्तियां[संपादित करें]

यूक्रेन के ट्रिपिलियन संग्रहालय में एक पुनर्निर्मित कुकुटेनी-ट्राईपिलियन झोपड़ी

निओलिथिक मानव बस्तियों में शामिल हैं:

  • सीरिया में टेल कारामेल 10,700-9400 ईपू.
  • ग्रीस में फ़्रांचथी केव, एपिपेलियोलिथिक (10,000 ईपू.) बस्ती, जो 7500-6000 ई.पू. के बीच दोबारा बसी।
  • भारत में लहुरादेवा, 9000 ई.पू.
  • तुर्की में गोबेक्ली टेपे, 9000 ईसा पूर्व
  • लगभग 8350 ईपू के आसपास वेस्ट बैंक, निओलिथिक में एपिपेलियोलिथिक नैचुफियन संस्कृति से उत्पन्न होने वाला जेरिको.
  • तुर्की में नेवली कोरी, 8000 ईसा पूर्व
  • ईरान में गंज दारेह, 7000 ईसा पूर्व
तुर्की के कोन्या प्लेन में काटाल हुयुक की पुरातत्व साइट
  • तुर्की में केटालहोयूक, 7500 ई.पू.
  • चीन में पेंगतौशन संस्कृति, 7500-6100 ई.पू.
  • जॉर्डन में 'ऐन गज़ल, 7250-5000 ई.पू.
  • ईरान में चोघा बोनुट, 7200 ई.पू.
  • भारत में झूसी, 7100 ई.पू.
  • बुल्गारिया में करानोवो, 6200 ई.पू.
  • सर्बिया में पेट्निका, 6000 ई.पू.
  • ग्रीस में सेस्क्लो, 6850 ई.पू. (जिसमें ± 660 वर्षों की त्रुटि की संभावना है)
  • ग्रीस में दिस्पिलियो, 5500 ईसा पूर्व
  • म्यांमार में पडाह-लिन केव्स, 6000 ईसा पूर्व
  • चीन में जिआहू, 7000 से 5800 ई.पू.
  • पाकिस्तान में मेहरगढ़, 7000 ई.पू.
  • नोसस ऑन क्रेते, 7000 ईसा पूर्व
  • मैसेडोनिया गणराज्य में पोरोदीन, 6500 ई.पू.[32]
  • मैसेडोनिया गणराज्य में वर्श्निक (अन्ज़बेगोवो), 6500 ई.पू.[32]
  • इटली में पिज्जो डि बोदी (वारेसे), लोम्बार्डी, 6320 ±80 ई.पू.
  • इटली के फ्रियूली में समरदेंचिया, 6050 ±90 ई.पू.
  • कुकुटेनी-ट्रिपिलन संस्कृति 5500-2750, ई.पू., यूक्रेन, मोल्दोवा और रोमानिया फर्स्ट सौल्ट वर्क्स में.
  • क्वेजों, पलवन, फिलीपिंस में टेबन केव कॉम्प्लेक्स; 5000-2000 ईपू[कृपया उद्धरण जोड़ें]
  • चीन में हेमुदु संस्कृति, 5000-4500 ई.पू., बड़े पैमाने पर चावल का वृक्षारोपण
  • ट्रिपीलियन संस्कृति की लगभग 2000 बस्तियां; 5400-2800 ई.पू.
  • माल्टा में मेगालिथिक मंदिर, 3600 ई.पू.
  • और्नके, स्कॉटलैंड में नैप ऑफ होवार तथा सकरा ब्रे; क्रमशः 3500 ईपू तथा 3100 ईपू से
  • आयरलैंड में बरू ना बोइने; 3500 ईसा पूर्व
  • लगभग 3000 ई.पू. से आयरलैंड में लाउ गुर
  • चीन में लाज़िया, 2000 ई.पू.

दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात निर्मित मार्ग इंग्लैंड का स्वीट ट्रैक लगभग 3800 ईपू पुराना है और दुनिया की सबसे पुरानी मुक्त-खड़ी संरचना गोज़ो, माल्टा का निओलिथिक गन्तिजा का मंदिर है।

संस्कृतियों और स्थलों की सूची[संपादित करें]

स्कारा ब्रे (ओर्कने, स्कॉटलैंड) में खुदाई में निकले आवास; यूरोप के सबसे संपूर्ण निओलिथिक गांव हैं।

नोट: तिथियाँ बहुत अनुमानित हैं और केवल एक मोटे अनुमान के साथ दी गयी हैं; विशिष्ट पाई समय-अवधि के लिए प्रत्येक संस्कृति को देखें.

मीजोलिथिक
अवधि: लेवांत: 20,000 से 9500 ईपू; यूरोप: 9660 से 5000 ईपू; अन्य: 14,000 से 400 ईपू

  • एज़ीलियन संस्कृति
  • बाल्कन मेसोलिथिक संस्कृति
  • कैप्सियन संस्कृति
  • फोसना-हेंसबाका संस्कृति
  • हरिफियन संस्कृति
  • केबारन संस्कृति
  • जोमोन संस्कृति
  • जयूल्मुन संस्कृति
  • कोम्सा संस्कृति
  • कोंगेमोस संस्कृति
  • कुंदा संस्कृति
  • लेपेंस्की वीर संस्कृति
  • मग्लेमोसियन संस्कृति
  • नैचूफियन संस्कृति
  • नेमन संस्कृति
  • नोस्टवेट और लिहुल्ट संस्कृतियाँ
  • सौवेटेररियन संस्कृति
  • टार्देनोइसिअन संस्कृति
  • जार्जियन संस्कृति

आरंभिक नवपाषाण
अवधि: लेवांत: 10,000 से 8500 ईसा पूर्व; यूरोप: 5000-4000 ई.पू.; अन्य: क्षेत्र के आधार पर काफी भिन्नता होती है।

  • बेईक्सिन संस्कृति
  • सिशान संस्कृति
  • डूडेस्टी संस्कृति
  • फ्रान्च्थी गुफा के लोग
    • सबसे प्रारंभिक यूरोपीय निओलिथिक साइट: 20 वीं 3री सहस्राब्दी ई.पू.
  • सेस्क्लो गांव संस्कृति
  • स्टारसेवो-क्रिस संस्कृति
    • (स्टारसेवो-कोरोस-क्रिस संस्कृति के नाम से भी जाना जाता है)

मध्य कालीन निओलिथिक
अवधि: लेवांत: 8500 से 6500 ईसा पूर्व; यूरोप: 4000 से 3500 ई.पू.; अन्य: क्षेत्र के आधार पर काफी भिन्नता होती है।

  • बोडन संस्कृति
    • जिन्शा बस्ती और संक्सीगाडू टीला.
  • कार्डियम पौटरी संस्कृति
  • कॉम्ब सिरेमिक संस्कृति
  • कार्डेड वेयर संस्कृति
  • कोर्टेलोयड संस्कृति
  • कुकुटेनी-ट्राईपिलियन संस्कृति
  • डाडिवन संस्कृति
  • डावेंक्यू संस्कृति
  • डाक्सी संस्कृति
    • चेंगटौशन बस्ती
  • ग्रूव्ड वेयर लोग
    • स्कारा ब्रे, आदि
  • एर्लित्यू संस्कृति
    • जीया राजवंश
  • एरटेबोले संस्कृति
  • हेम्बरी संस्कृति
  • हेमुदु संस्कृति
  • होंग्शन संस्कृति
  • होउली संस्कृति
  • होर्गेन संस्कृति
  • लिआंगझू संस्कृति
  • लीनियर पोटरी संस्कृति
    • गोसेक सर्किल, आदि
  • लोंग्शन संस्कृति
  • मजिअबंग संस्कृति
  • मजियाओ संस्कृति
  • पिलिगंग संस्कृति
  • पेंगतौशन संस्कृति
  • प्फिन संस्कृति
  • प्रीकुकुटेनी संस्कृति
  • क्यूजेलिंग संस्कृति
  • शिजिये संस्कृति
  • ट्रिपिलियन संस्कृति
  • विंका संस्कृति
  • विंडमिल हिल संस्कृति
    • स्टोनहेंज
  • जिंगलोंगवा संस्कृति
    • बेईफुदी साइट
  • जिनले संस्कृति
  • यांगशाओ संस्कृति
    • बान्पो और जिशुइपो बस्तियां.
  • झाओबाओगू संस्कृति

बाद में निओलिथिक
अवधि: लेवांत: 6500 से 4500 ईसा पूर्व; यूरोप: 3500 से 3000 ई.पू.; अन्य: क्षेत्र के आधार पर काफी भिन्नता होती है।

एनियोलिथिक
अवधि: मध्य पूर्व: 4500 से 3300 ईपू.; यूरोप: 3000 से 1700 ईपू.; अन्यत्र: क्षेत्र के अनुसार काफी भिन्नता होती है। अमेरिका क्षेत्र में, कुछ लोगों के अनुसार एनियोलोथिक की समाप्ति 1800 के आसपास हुई थी।

  • बीकर संस्कृति
  • कुकुटेनी-ट्राईपिलियन संस्कृति
  • फनलबीकर संस्कृति
  • गाउडो संस्कृति
  • लेंग्येल संस्कृति
  • वरना संस्कृति

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • बड़ा पत्थर (मेगालिथ)
  • नवपाषाण यूरोप
  • नवपाषाण क्रांति
  • नवपाषाण धर्म
  • नवपाषाण कब्र

  • ओत्ज़ी दी आइसमैन
  • पुरानी दुनिया की प्रमुख प्रागैतिहासिक संस्कृतियों की संक्षिप्त तालिका
  • पाषाण काल
  • द्जेल्फा क्षेत्र की रॉक कला

पादलेख[संपादित करें]

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  2. कुछ पुरातत्वविदों है "समुदाय ग्राम जैसे" निओलिथिक लंबे वकालत की जगह "जल्दी" के साथ एक और वर्णनात्मक शब्द है, है, हालांकि यह व्यापक स्वीकृति प्राप्त नहीं किया है।
  3. [1] Archived 1 अक्टूबर 2011 at the वेबैक मशीन. अन्य शानदार खोज सीरिया में पॉलिश पुरातत्वविदों द्वारा खोजा गया
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संदर्भग्रन्थ[संपादित करें]

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बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]