नंदिनी सत्पथी

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नंदिनी सत्पथी
Nandini-Satapathy.jpg

ओडिशा की पूर्व मुख्यमंत्री
पद बहाल
6 मार्च 1973 – 16 दिसम्बर 1976
पूर्वा धिकारी राष्ट्रपति शासन
उत्तरा धिकारी राष्ट्रपति शासन
पद बहाल
14 जून 1972 – 3 मार्च 1973[1]
पूर्वा धिकारी बिश्वनाथ दास
उत्तरा धिकारी President's rule

जन्म 09 जून 1931
कटक, ओडिशा
मृत्यु 4 अगस्त 2006(2006-08-04) (उम्र 75)
भुवनेश्वर
राजनीतिक दल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस
जीवन संगी देवेंद्र सत्पथी
बच्चे सुपर्णो सत्पथी, तथागत सत्पथी
धर्म हिन्दू
जालस्थल http://www.snsmt.org

नंदिनी सत्पथी (ओड़िया: ନନ୍ଦିନୀ ଶତପଥୀ; 9 जून 1931;– 4 अगस्त 2006) एक भारतीय लेखिका और राजनीतिज्ञ थी। वे जून 1972 से दिसंबर 1976 तक ओडिशा की मुख्यमंत्री रहीं।

प्रारंभिक जीवन[संपादित करें]

सत्पथी का जन्म 9 जून 1931 को हुआ था और वे भारत के कटक के पीथापुर में पली-बढ़ी थे। वह कालिंदी चरण पाणिग्रही की सबसे बड़ी बेटी थीं उनके चाचा भगवती चरण पाणिग्रही ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओडिशा शाखा की स्थापना की थी।

राजनीतिक कैरियर[संपादित करें]

1939 में आठ वर्ष की उम्र में उन्हें यूनियन जैक को खींच कर उतारने और साथ ही कटक की दीवारों पर ब्रिटिश विरोधी पोस्टरों को हाथ से चिपकाने के लिए भी ब्रिटिश पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटा गया था। उस समय यह एक व्यापक रूप से चर्चा की विषय बन गई थी और उसी ने ब्रिटिश राज में भारत की स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में आग में घी का काम किया था।

रेवेंशॉ कॉलेज में ओडिया में अपने स्नातोकत्तर करते हुए, वह कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र शाखा, स्टूडेंट फेडरेशन के साथ जुड़ गई। 1951 में कॉलेज शिक्षा की बढ़ती लागत के खिलाफ ओडिशा में एक छात्र विरोध आंदोलन शुरू हुआ, जो बाद में राष्ट्रीय युवा आंदोलन में बदल गया। सत्पथी इसी आंदोलन के एक युवा नेता थी, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया और नंदिनी सतपथी को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। उसे कई अन्य लोगों के साथ जेल में डाल दिया गया था। जेल में उनकी मुलाकात देवेंद्र सतपथी से हुई जो एक और स्टूडेंट फेडरेशन के सदस्य थे, जिनसे उसने बाद में शादी की थी। (वह बाद में ढेंकनाल से निचले सदन के लिए दो बार चुने गए थे।

1962 में, उड़ीसा में कांग्रेस पार्टी प्रमुख की रूप में उभरी थी। 140 सदस्यों वाली उड़ीसा राज्य विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के 80 से अधिक सदस्य थे। राष्ट्रीय स्तर पर, भारतीय संसद में अधिक महिला प्रतिनिधियों को रखने के लिए एक आंदोलन चल रहा था। असेंबली ने भारत की संसद के ऊपरी सदन (राज्य सभा) में सतपति (तब महिला मंच की अध्यक्ष) का चुनाव किया, जहाँ उन्होंने अपने दो कार्यकाल पूरे किए। 1966 में इंदिरा गांधी भारत की प्रधानमंत्री बनने के बाद, सतपथी प्रधानमंत्री से जुड़ी एक मंत्री बनीं, उनके सूचना और प्रसारण मंत्रालय के विशिष्ट पोर्टफोलियो दिया गया।

वह 1972 में ओडिशा लौट आए, क्योंकि बीजू पटनायक और अन्य लोगों द्वारा कांग्रेस पार्टी छोड़ जाने के कारण हुए रिक्त स्थान की लिए, तब उन्हें ओडिशा के मुख्यमंत्री बना दिया गया। [2] 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 के आपातकाल के दौरान, उन्होंने कई उल्लेखनीय व्यक्तियों को कैद किया, जिनमें नबाकृष्ण चौधुरी और रमा देवी शामिल थे; हालांकि, आपातकाल के दौरान ओडिशा में सबसे कम संख्या में प्रमुख व्यक्ति जेल गए और सत्पथी ने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी की नीतियों का विरोध करने का प्रयास किया। [3] सत्पथी ने दिसंबर 1976 में पद छोड़ दिया। [2] 1977 में आम चुनाव के दौरान वह जगजीवन राम के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों के एक समूह का हिस्सा थीं, जो कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी पार्टी बन गई।

राजीव गांधी के कहने पर सत्पथी 1989 में कांग्रेस पार्टी में फिर से लौट आए। ओडिशा में कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से अप्रिय थी, क्योंकि इसके पिछले दो अवधि की बुरे शाषन की लिए (मुख्य रूप से जानकी बल्लभ पटनायक मुख्यमंत्री के रूप में)। वह गोंदिया, ढेंकनाल [4] से राज्य विधान सभा के सदस्य के रूप में चुने गए और 2000 तक विधानसभा में रहे, तब उन्होंने राजनीति से अपने संन्यास लेने का घोषणा किया; उन्होंने 2000 का चुनाव नहीं लड़ा। वह उस समय प्रभावशाली नहीं रही थी और कांग्रेस पार्टी की ओडिशा शाखा की आलोचक थी।

न्यायिक मुकदमा[संपादित करें]

1977 में, सत्पथी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया और उस समय के भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के संभावित उल्लंघन में उनपर पुलिस जाँच शुरू हुई। जांच के दौरान, उनसे लिखित रूप में कई सवालों पर पूछताछ की गई। उन्होंने किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया जिसपर उनके वकील ने तर्क दिया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 (3) ने उन्हें जबरन आत्म दोष लगाना के खिलाफ सुरक्षा प्रदान की। अदालत ने उनसे सहमति व्यक्त की, और अभियुक्त के अधिकारों को एक वकील के अधिकार और आत्म-उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार की मान्यता के साथ मजबूत किया इसके अलावा यह भी पाया गया कि महिलाओं को पुरुष रिश्तेदारों की उपस्थिति में अपने घरों पर पूछताछ करने का अधिकार है, औपचारिक गिरफ्तारी के बाद ही उन्हें पुलिस स्टेशन में लाने का अधिकार है, और केवल अन्य महिलाओं द्वारा खोजे जाने का अधिकार है।[5] अगले 18 वर्षों में, सत्पथी ने उनके खिलाफ सभी मामलों में जीत हासिल की।

साहित्यिक कैरियर[संपादित करें]

सतपथी ओडिया भाषा में एक लेखक थी उनके काम को कई अन्य भाषाओं में अनुवादित और प्रकाशित किया गया है। उड़िया साहित्य में उनके योगदान के लिए उन्हें 1998 का ​​साहित्य भारती सम्मान मिला। [6][7] उनकी अंतिम प्रमुख साहित्यिक रचना तस्लीमा नसरीन की लज्जा का उड़िया में अनुवाद था। [8]

मृत्यु[संपादित करें]

4 अगस्त 2006 को भुवनेश्वर में उनके घर पर उनकी मृत्यु हो गई। [9]

श्रीमति नंदिनी सतपथी मेमोरियल ट्रस्ट[संपादित करें]

2006 में एक सामाजिक कारण संगठन, श्रीमति नंदिनी सत्पथी मेमोरियल ट्रस्ट (SNSMT), उनकी स्मृति में स्थापित किया गया था। यह ओडिशा के भारत के प्रमुख सामाजिक कारण संगठनों में से एक है।

परिवार[संपादित करें]

उनके दो बेटों में से एक छोटे बेटे तथागत सत्पथी बीजू जनता दल से 4 बार सांसद बने और दैनिक समाचार पत्रों - धारित्री और उड़ीसा पोस्ट के संपादक थे। [10][11][12]

विरासत[संपादित करें]

नंदिनी दिवस 9 जून, स्वर्गीय श्रीमती नंदिनी सत्पथी का जन्मदिन को राष्ट्रीय बेटियां दिवस के रूप में घोषित किया गया है। नंदिनी और दिवस दो संस्कृत शब्द हैं जिनका अर्थ क्रमशः बेटी और दिन होता है। [13]

2013 में 7 वां राष्ट्रीय बेटियाँ दिवस मनाया गया और इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान के राज्यपाल उपस्थित थे। [14] संदर्भ

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Brief History of Odisha Legislative Assembly Since 1937". ws.ori.nic.in. 2011. अभिगमन तिथि 17 अक्टूबर 2013. NAME OF THE CHIEF MINISTERS OF Odisha
  2. "Number 13 is lucky for Mamata Banerjee". NDTV. 14 May 2011. अभिगमन तिथि 9 May 2012.
  3. "The 'Iron lady' of Odisha politics | news.outlookindia.com". news.outlookindia.com. 2012. मूल से 22 फ़रवरी 2014 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 जुलाई 2012. Satpathy's differences with the party high command widened as she criticised the Emergency
  4. https://dhenkanal.nic.in/public-representatives/
  5. Nandini Satpathy v. PL Dani, (1978) 2 SCC 424
  6. "Spotlight". Tribune India. 9 February 1999. अभिगमन तिथि 10 May 2012. Eminent writer and former Chief Minister Nandini Satpathy has won the prestigious Sahitya Bharati Samman Award, 1998, for her outstanding contribution to Oriya literature |year= / |date= mismatch में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  7. "StreeShakti – The Parallel Force". streeshakti.com. 2012. अभिगमन तिथि 10 May 2012. she was awarded the Sahitya Bharati Samman for her contributions to Oriya literature
  8. Sahu, Nandini (14 अक्टूबर 2007). "The Position of Women in Oriya Literature". boloji.com. मूल से 11 मई 2012 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 10 मई 2012. Her last major work was the translation of Taslima Nasreen's 'Lajja' into Oriya
  9. "Nandini Satpathy". odisha360.com. 2012. अभिगमन तिथि 10 May 2012. Smt. Nandini Satpathy died of an illness on 4th August 2006 at her residence in Bhubaneswar.
  10. "Biographical Sketch of Member of 12th Lok Sabha". parliamentofindia.nic.in. 2001. अभिगमन तिथि 10 May 2012. Election Result of Dhenkanal Lok Sabha Constituency
  11. "Tathagata Satpathy(BJD):Constituency- Dhenkanal(ORISSA) – Affidavit Information of Candidate". myneta.info. 2012. अभिगमन तिथि 10 May 2012. Tathagata Satpathy – BJD – Dhenkanal (ORISSA)
  12. "Oriya News Paper Dharitri | Dharitri Newspaper | Dharitri ePaper | Chhutidina". incredibleorissa.com. 2012. अभिगमन तिथि 10 May 2012. This oriya paper first started by late Nandini Satpathy and now running by her son Sri Tathagata Satapathy
  13. "Fair day declared". www.telegraphindia.com (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2019-09-22.
  14. Pioneer, The. "National Daughters' Day on June 8". The Pioneer (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2019-09-22.