कटक

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कटक
कटक स्थित पीठापुर
कटक स्थित पीठापुर
Map of उडी़सा with कटक marked
Location of कटक
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उडी़सा
महापौर श्रीमती निवेदिता प्रधान
सांसद
जनसंख्या
घनत्व
७,५०,००० (२००७ तक )
• ४७८९
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)
१९२ कि.मी²
• १४ मीटर

निर्देशांक: 20°16′N 85°31′E / 20.27°N 85.52°E / 20.27; 85.52

कटक भारत के उड़ीसा प्रान्त का एक नगर है। यह कटक जिला के अन्दर आता है। कटक उड़ीसा का एक प्राचीन नगर है। इसका इतिहास एक हजार वर्ष से भी ज्‍यादा पुराना है। करीब नौ शताब्दियों तक कटक उड़ीया की राजधानी रहा और आज यहां की व्‍यावयायिक राजधानी के रूप में जाना जाता है। केशरी वंश के समय यहां बने सैनिक शिविर कटक के नाम पर इस शहर का नाम रखा गया था। यहां भारत का एक प्रमुख बंदरगाह पारादीप भी स्थित है। यहां के किले, मंदिर और संग्रहालय पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। कटक वर्तमान उड़ीसा की मध्ययुगीन राजधानी था, जिसे पद्मावती भी कहते थे। यह नगर महानदी व उसकी सहायक नदी काठजूड़ी के मिलन स्थल पर बना है।

मुख्य पर्यटन स्थल[संपादित करें]

बाराबती किला[संपादित करें]

यह कटक का सबसे प्रमुख पर्यटक स्‍थल है। महानदी के किनारे बना यह किला खूबसूरती से तराशे गए दरवाजों और नौ मंजिला महल के लिए प्रसिद्ध है। इसका निर्माण गंग वंश ने 14वीं शताब्‍दी में करवाया था। युद्ध के समय नदी के दोनों किनारों पर बने किले इस किले की रक्षा करते थे। वर्तमान में इस किले के साथ एक अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍टेडियम है। पांच एकड़ में फैले इस स्‍टेडियम में 30000 से भी ज्‍यादा लोग बैठ सकते हैं। यहां खेल प्रतियोगिताओं और सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों का अयोजन होता रहता है।

परमहंसनाथ मंदिर[संपादित करें]

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर कटक के बाहरी हिस्‍स्‍से में स्थित है। यहां एक बहुत बड़ा छिद्र है जहां से स्‍वयं पानी निकलता है। यह विशाल छिद्र इस मंदिर की मुख्‍य विशेषता है। इसे अनंत गर्व कहा जाता है।

कदम-ई-रसूल[संपादित करें]

यहां भारत की सबसे अलग मस्जिद है। मुसलमानों की धार्मिक आस्‍था को ध्‍यान में रखकर करवाया था। हिंदू तथा मुसलमान दोनों ही इस स्‍थान का आदर करते हैं। मुख्‍य परिसर के अंदर तीन खूबसूरत मस्जिदें हैं। इनके गुंबद और कमरे बहुत ही आकर्षक हैं। यहां नवाबत खाना नाम का एक कमरा भी है जिसका निर्माण 18वीं शताब्‍दी में किया गया था। एक गुबद के पर पैगंबर मोहम्‍मद के पद चिह्न एक गोल पत्‍थर पर अंकित किए गए हैं।

नदी किनारे दीवार[संपादित करें]

11वीं शताब्‍दी में राजा मराकत केशरी ने नदी पर पत्‍थर की दीवार बनवाई थी। इस दीवार के कारण यह शहर बाढ़ों के कहर से बचा रह सका। इसी वजह से इस शहर को राजधानी बनाया गया था। यह तत्‍कालीन इं‍जीनियरिंग का बेहतरीन नमूना है। यह दिखाती है कि उस समय तकनीक कितनी उन्‍न‍त थी।

सलीपुर ब्रांच संग्रहालय[संपादित करें]

ब्रांच संग्रहालय की स्‍थापना 1979 में की गई थी। इस संग्रहालय में मूर्तियों, शस्‍त्रों, टैराकोटा का प्रदर्शन किया गया है। इनके अलावा यहां वाद्य यंत्र और कागज तथा ताड़ पत्र पर लिखी पांडुलिपियां भी देखी जा सकती हैं। समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, सोमवार और सार्वजनिक अवकाश के दिन बंद

आवागमन[संपादित करें]

वायु मार्ग

यहां का नजदीकी हवाई अड्डा भुवनेश्‍वर का बीजू पटनायक हवाई अड्डा (30 किलोमीटर) है।

रेल मार्ग

कटक दिल्‍ली, कोलकता, मुंबई समेत सभी प्रमुख शहर से जुड़ा है। देश के विभिन्‍न भागों से यहां के लिए नियमित ट्रेनें चलती हैं।

सड़क मार्ग

कटक भुवनेश्‍वर, कोणार्क, पुरी, कोलकता और देश के बाकी हिस्‍सों से सड़कों के जरिए जुड़ा है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

यहाँ पर भारतीय चावल अनुसंधान केन्द़ है।