ध्वन्यात्मक

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

ध्वन्यात्मक का आशय है-सुनी गई ध्वनि का ठीक उसी रूप में लिपिकरण। देवनागरी लिपि में हमारे स्वरयंत्र से निकलने वाली ध्वनि ही लिपिबद्ध की जाती है और उस लिपिबद्ध सामग्री को फिर कोई भी ध्वनि के रूप में व्यक्त करता है तो वही ध्वनि निकलती है। इस प्रकार ध्वनि से लिपि और लिपि से ध्वनि में परिवर्तन करने पर कोई अन्तर नहीं आता बल्कि फिर से वही ध्वनि निकलती है। ध्वन्यात्मकता किसी लिपि को उसके ध्वनि से साम्यता और शुद्धता को दर्शाता है।