जनमसाखी

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जनमसाखी (संस्कृत: जन्मसाक्षी) उन रचनाओं को कहते हैं जो सिखों के प्रथम गुरु गुरु नानक का जीवनचरित हैं। पंजाबी साहित्य में जनमसाखियों का बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है। गुरु नानक के देहान्त के बाद समय-समय पर ऐसी रचनाएँ होती रहीं हैं।[1]

विद्यालय जाते हुए बालक नानक
नानक के सिर पर सर्प द्वारा छाया करने का दृश्य देखकर राय बुलार का नतमस्तक होना
मक्का में गुरु नानक देव जी


सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Nikky-Guninder Kaur Singh (2011), Sikhism: An Introduction, IB Tauris, ISBN 978-1848853218, pages 1-8