चन्द्रपुर

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चन्द्रपुर शहर

चन्द्रपुर (भूतपूर्व नाव: चांदा) यह शहर, पूर्वी महाराष्ट्र राज्य, पश्चिम भारत में वर्धा नदी की एक सहायक नदी इरई और झरपट के तट पर स्थित है। चंद्रपुर का अर्थ है, 'चंद्रमा का घर'। चंद्रपुर में एक इंजीनियरिंग कॉलेज भी है। जंगल औऱ बाघों के लिये पहचाना जाने वाला ये शहर गोंड़कालीन प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरो के लिए भी पहचाना जाता है। महाकाली देवी, अंचलेश्वर मंदिर के साथ 550 वर्ष प्राचीन गोंड राजाओं द्वारा निर्मित किला भी है।

इतिहास[संपादित करें]

12वीं से 18वीं शताब्दी तक चंद्रपुर गोंड वंश की राजधानी था। बाद में नागपुर के मराठा भोंसले ने इसे जीत लिया। 1854 से 1947 में भारत के स्वतंत्र होने तक यह ब्रिटिश मध्य प्रांत का हिस्सा था। यह ब्रिटिश शासन के दौरान चांदा नाम से जाना जाता था। इस स्थान का प्राचीन नाम लोकपुर भी था, जो आगे चलकर इंदुपुर और उसके बाद चन्द्रपुर के नाम से जाना गया। इस ज़िले के प्राचीन स्थल वैरागड, कोसल, भद्रावती और मार्कण्डा हैं। चन्द्रपुर पर काफ़ी लंबे समय तक हिन्दू और बौद्ध राजाओं का शासन रहा है। बाद में गोंड राजाओं ने इस पर अधिकार कर लिया जिन्होंनें 1751 तक यहाँ शासन किया। गोंड़ राजाओं ने पहले शिरपुर, बल्लारपुर फिर चंद्रपुर से अपना राजकारभार किया। लगभग 550 साल गोंड़ शाशकों ने इस प्रदेश पर राज किया है। 1751 में गोंड़ राजाओं से नागपुर के भोसलाओ ने जीत लिया। उसके 1818 में इंग्रेजो के साथ युद्ध के बाद में इसे ब्रिटिश शासन में मिला लिया गया।

यातायात और परिवहन[संपादित करें]

वायु मार्ग[संपादित करें]

चन्द्रपुर का नज़दीकी हवाई अड्डा नागपुर में डॉ॰ बाबा साहेब अम्बेडकर हवाई अड्डा है जो देश के अनेक शहरों से वायु मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।

रेल मार्ग[संपादित करें]

मुंबई-वर्धा-चन्द्रपुर रेल लाइन और दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेल लाइन से महाराष्ट्र का यह ज़िला जुड़ा है। महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के अनेक शहरों से यहाँ के लिए नियमित रेलगाड़ियाँ हैं।

सड़क मार्ग[संपादित करें]

मुंबई नासिक नागपुर चन्द्रपुर हैदराबाद सड़क मार्ग चन्द्रपुर को महाराष्ट्र और देश के अन्य शहरों से जोड़ता है। राज्य परिवहन के अलावा अनेक निजी बसें चन्द्रपुर के लिए चलती हैं।

उद्योग और व्यापार[संपादित करें]

प्रमुख रेल तथा सड़क मार्ग पर स्थित यह शहर आसपास के क्षेत्रों में उगने वाले कपास, अनाज और अन्य फ़सलों का वाणिज्यिक केंद्र है। स्थानीय खनिजों पर आधारित उद्योगों में कोयले की कई खानें तथा शीशे का सामान बनाने के उद्योग शामिल हैं। यह शहर रेशम के कपड़े और अलंकृत चप्पलें जैसे विलास-वस्तुओं के उत्पादन के लिए भी विख्यात है।

जनसंख्या[संपादित करें]

२०११ की जनगणना के अनुसार चन्द्रपुर महानगरपालिका क्षेत्र की जनसंख्या ३,७३,००० है।

पर्यटन[संपादित करें]

पर्यटकों के देखने लायक़ यहाँ अनेक ऐतिहासिक मन्दिर और स्मारक हैं। जिसमे चंद्रपुर का 11 किमी लंबा किला-परकोट जो आज भी सुस्थिति मैं है। इस किले की 4 दरवाजे 5 खिड़कियां, 39 बुरुज है जिसपर घूमकर कुछ हिस्से में हम 'हेरिटेज वॉक' किला पर्यटन कर सकते है। साथ 'प्यार का प्रतीक' समजा जानेवाला रानी हिराई निर्मित 'बिरशाह की समाधी', महाकाली मंदिर, अंचलेश्वर मंदिर, मुरलीधर मंदिर तथा अपूर्ण देवालय, प्राचीन बावडिया ऐतिहासिक धरोहरे है। यहाँ ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प जो बाघों के उत्तम अधिवास के लिए जाना जाता है, हरसाल लाखो पर्यटक इस प्रकल्प को भेट देते है। बाघों के साथ अन्य वन्यजीव भी यहाँ आने वाले सैलानियों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। यह चंद्रपुर के उत्तर में 27 किमी पर ताडोबा राष्ट्रीय उद्यान स्थित है। इसके 45 किमी दक्षिण में मानिकगढ़ वन पर्यावरण सैरगाह है। यहाँ कई प्रकार के बांस व दूसरे वृक्ष, बाघ, तेंदुआ, जंगली कुत्ते, भालू गौर, सांबर, मुंतजाक हिरन जैसे जानवर व अनेक प्रजातियों के जंगली पक्षी पाए जाते हैं। वरोरा में बाबा आमटे इनकी कर्मभूमि रही आनंदवन भी है, जो चंद्रपुर से महज 40 किमी पर स्थित है।