कोरबा

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कोरबा
Korba
कोरबा is located in छत्तीसगढ़
कोरबा
कोरबा
छत्तीसगढ़ में स्थिति
निर्देशांक: 22°21′N 82°41′E / 22.35°N 82.68°E / 22.35; 82.68निर्देशांक: 22°21′N 82°41′E / 22.35°N 82.68°E / 22.35; 82.68
देश भारत
प्रान्तछत्तीसगढ़
ज़िलाकोरबा ज़िला
जनसंख्या (2011)
 • कुल2,65,253
भाषा
 • प्रचलितहिन्दी, छत्तीसगढ़ी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड495450
दूरभाष कोड7759
वाहन पंजीकरणCG-12
लिंगानुपात927 /
वेबसाइटwww.korba.gov.in

कोरबा (Korba) भारत के छत्तीसगढ़ राज्य के कोरबा ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।[1][2]

विवरण[संपादित करें]

कोरबा का नाम यहां की जनजाति पहाड़ी कोरवा के आधार पर रखा गया है। यह छत्तीसगढ़ की ऊर्जाधानी (ऊर्जानगरी) भी कहलाती है, क्योंकि यहां छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (पूर्ववर्ती छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल) और एनटीपीसी के अलावा कई निजी कंपनियों के विद्युत संयंत्र संचालित हैं। यहां की पहचान एशिया के सबसे बड़े खुले कोयला खदान (ओपन कास्ट माइन) गेवरा माइंस की वजह से भी है, जो साउथ ईस्टर्न कोल फिल्ड्स (एसईसीएल) द्वारा कोरबा कोयला क्षेत्र में संचालित कई अंडरग्राउंड और ओपनकास्ट माइन्स में से एक है। इसके अलावा यहां भारत का सबसे बड़ा एल्युमिनियम संयंत्र भारत एल्युमिनियम कंपनी (बालको) स्थित है, जिसे एनडीए शासनकाल में निजी हाथों में सौंप दिया गया था।

भूगोल[संपादित करें]

कोरबा की स्थिति 22°21′N 82°41′E / 22.35°N 82.68°E / 22.35; 82.68 पर है। यहाँ की औसत ऊँचाई २५२ मीटर (826 फीट) है।

अर्थव्यवस्था[संपादित करें]

कोरबा का अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी है यहाँ ४५ प्रतिशत उद्द्योग से और ५० प्रतिशत कृषि और ५ प्रतिशत अन्य साधनों से आय प्राप्त होती है यहाँ पर कृषि के लिए जल संसाधन अच्छी स्रोत है इसके साथ ही सिंचाई के लिए नहरे निकली गयी है

कालोनी[संपादित करें]

कोरबा शहर लगभग कालोनियों से भरा हुआ है यहाँ एन टी पी सी बालको एच टी पी पी एस ई सी एल की कालोनियों से बसा हुआ है साथ ही कालोनियों का परस्पर प्रेम सदभाव वाले माहौल देखने को भी मिलता है

प्रमुख आकर्षण[संपादित करें]

चैतुरगढ़[संपादित करें]

चैतुरगढ़ को लाफागढ़ के नाम से भी जाना जाता है। कोरबा जिला मुख्यालय से 70 कि॰मी॰ दूर पाली के पास 3060 मी. ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण राजा पृथ्वी देव ने कराया था। यह एक किले जैसा लगता है। इसमें तीन प्रवेश द्वार हैं। इन प्रवेश द्वारों के नाम मेनका, हुमकारा और सिम्हाद्वार हैं।

चैतुरगढ़ का क्षेत्रफल 5 वर्ग कि॰मी॰ है और इसमें पांच तालाब हैं। इन पांच तालाबों में तीन तालाब सदाबहार हैं, जो पूरे वर्ष जल से भरे होते हैं। चैतुरगढ़ में महिषासुर मर्दिनी मन्दिर है। मन्दिर के गर्भ में महिषासुर मर्दिनी की प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसके बारह हाथ हैं। नवरात्रों में यहां पर विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। स्थानीय निवासी इस पूजा में बड़ी श्रद्धा से भाग लेते हैं।

मन्दिर के पास खूबसूरत शंकर गुफा भी है, जो लगभग 25 फीट लंबी है। गुफा का प्रवेश द्वार बहुत छोटा है। इसलिए पर्यटकों को गुफा में प्रवेश करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मन्दिर और गुफा देखने के अलावा पर्यटक इसकी प्राकृतिक सुन्दरता की झलकियां भी देख सकते हैं। वह यहां पर पर वन्य पशु-पक्षियों को देख सकते हैं।

कोसगाईगढ़[संपादित करें]

कोरबा-कटघोरा रोड पर फुटका पहाड़ की चोटी पर स्थित कोसगाईगढ़ बहुत खूबसूरत है। यह समुद्र तल से 1570 मी. की ऊंचाई पर स्थित है। कोसागाईगढ़ में एक खूबसूरत किला है। इसका प्रवेश द्वार एक गुफा की भांति है और यह इतना संकरा है कि इसमें से एक बार में केवल एक व्यक्ति गुजर सकता है। किले के चारों तरफ घना जंगल है, जिसमें अनेक प्रजाति के वन्य पशु-पक्षियों को देखा जा सकता है। कोसगाईगढ़ में पर्यटक किले के अलावा भी अनेक ऐतिहासिक अवशेषों देख सकते हैं। यहां स्थित माता कोसगाई के मंदिर की अपनी महिमा है, मंदिर में माता की इच्छानुरुप छत नहीं बनाया गया है।

मड़वारानी[संपादित करें]

कोरबा जिला मुख्यालय से 22 कि॰मी॰ की दूर कोरबा-चांपा रोड पर मड़वारानी मन्दिर स्थित है। यह मन्दिर एक चोटी पर बना हुआ है और मदवरानी देवी को समर्पित है। स्थानीय निवासी के अनुसार सितम्बर-अक्टूबर में नवरात्रों में यहां पर कल्मी के वृक्ष के नीचे ज्वार उगती है। नवरात्रों में यहां पर स्थानीय निवासियों द्वारा भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस मेले में स्थानीय निवासियों के साथ पर्यटक भी बड़े उत्साह से भाग लेते हैं।

सर्वमंगला मंदिर[संपादित करें]

कोरबा शहर से लगा हुआ दुर्गा देवी को समर्पित सर्वमंगला मन्दिर कोरबा के प्रमुख मन्दिरों में से एक है। इसका निर्माण कोरबा के जमींदर राजेश्वर दयाल के पूर्वजों ने कराया था। सर्वमंगला मन्दिर के पास त्रिलोकीनाथ मन्दिर, काली मन्दिर और ज्योति कलश भवन हैं। पर्यटक इन मन्दिरों के दर्शन भी कर सकते हैं। इन मन्दिरों के पास एक गुफा भी जो नदी के नीचे से होकर गुजरती है। कहा जाता है कि रानी धनराज कुंवर देवी इस गुफा का प्रयोग मन्दिरों तक जाने के लिए किया करती थी।

आवागमन[संपादित करें]

रेल मार्ग

कोरबा तक जाने के लिए रेल मार्ग एक बेहतर जरिया हैं। एक्सप्रेस गाड़ियों में कोरबा-यशवंतपुर (वेनगंगा एक्सप्रेस), कोरबा-अमृतसर (छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस), कोरबा (बिलासपुर)-नागपुर (शिवनाथ एक्सप्रेस) और कोरबा-तिरुअनंतपुरम (कोचिन एक्सप्रेस) के अलावा कई लोकल ट्रेने बिलासपुर से कोरबा के लिए चलती हैं। हावड़ा-मुंबई रुट से अलग होने की वजह से कोरबा जाने वाले यात्रियों के लिए हावड़ा-मुंबई रूट पर चलने वाली कई ट्रेनों को निकटस्थ रेलवे स्टेशन चांपा में स्टापेज दिया जाता है।

वायु मार्ग

दिल्ली, प्रयागराज, जबलपुर और खजुराहो से बिलासपुर हवाई अड्डे तक प्रतिदिन वायु सेवा है। बिलासपुर से पर्यटक सड़क से आसानी से कोरबा तक पहुंच सकते हैं। इसके अलावा कोरबा के करीब बालको की हवाई पट्टी भी है, जहां छोटे विमान आसानी से उतर सकते हैं।

सड़क मार्ग

कोरबा सड़क मार्ग द्वारा छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों से अच्‍छी तरह जुड़ा हुआ है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]