ऑफ़शोरिंग

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ऑफ़शोर शब्द समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन को निर्दिष्ट कर सकता है ; देखें ऑइल प्लैटफ़ॉर्म. फ़िलीपीन आउटसोर्सिंग कंपनी के लिए देखें, Offshoring Inc.

ऑफ़शोरिंग, एक कंपनी द्वारा व्यापारिक प्रक्रिया को एक देश से दूसरे देश में स्थानान्तरित करने को वर्णित करता है - आम तौर पर परिचलनात्मक प्रक्रिया को, जैसे विनिर्माण, या सहयोगी प्रक्रियाओं को, जैसे लेखांकन. यहां तक कि राज्य सरकारें भी ऑफ़शोरिंग का उपयोग करती हैं।[1]

यह शब्द कई अलग लेकिन घनिष्ट रूप से संबंधित तरीकों से प्रयोग में लाया जाता है। कभी-कभी इसे व्यापक अर्थ में किसी विदेशी स्रोत से ऐसी सेवा के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जो पहले फर्म में आंतरिक रूप से प्रदान की जा रही थी। अन्य मामलों में, इसमें केवल अपनी सहयोगी इकाई या घनिष्ट रूप से जुड़े अन्य आपूर्तिकर्ताओं से आयातित सेवाएं शामिल हैं। एक और उलझन है कि आंशिक रूप से तैयार कंप्यूटर जैसे मध्यवर्ती माल, इस शब्द के दायरे में सुसंगत रूप से शामिल नहीं किए जाते हैं।[2] "रीशोरिंग" (कभी-कभी "बैकशोरिंग"[3]) वह ऑफ़शोरिंग है जिसे वापस तट पर लाया गया है।

ऑफ़शोरिंग को या तो उत्पादन ऑफ़शोरिंग या सेवाओं के ऑफ़शोरिंग के संदर्भ में देखा जा सकता है। 2001 में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में उसके परिग्रहण के बाद, चीनी जनवादी गणतंत्र उत्पादन ऑफ़शोरिंग के प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरा. दूरसंचार में प्रौद्योगिकी प्रगति द्वारा सेवाओं के व्यापार की संभावनाओं में सुधार के बाद, भारत इस क्षेत्र में अग्रणी देश बना हालांकि अब दुनिया के कई देश ऑफ़शोरिंग गंतव्य के रूप में उभर रहे हैं।

इसका आर्थिक तर्क लागत को कम करना है। अगर कुछ लोग औरों की तुलना में अपना कौशल अधिक सस्ते दामों में दे सकते हैं, तो उन लोगों को तुलनात्मक लाभ मिलता है। इसके पीछे विचार यह है कि देश स्वतंत्र रूप से उन वस्तुओं का व्यापार करें जिनके उत्पादन में उन्हें न्यूनतम लागत आती है।

अक्सर प्रयुक्त शब्द[संपादित करें]

ऑफ़शोरिंग को ऐसी व्यापारिक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे किसी देश में उसी कंपनी में या किसी अन्य देश में दूसरी कंपनी में स्थानान्तरित किया जाता है। लगभग हमेशा ही काम को नए स्थान में परिचालन की कम लागत के कारण स्थानांतरित किया जाता है। ऑफ़शोरिंग की, कभी-कभी आउटसोर्सिंग या अपतटीय आउटसोर्सिंग से तुलना की जाती है। आउटसोर्सिंग आंतरिक व्यापार प्रक्रियाओं को किसी बाह्य कंपनी से कराया जाना है। एक ही देश में उप-ठेके पर काम कराने वाली कंपनियां ऑफ़शोरिंग नहीं, बल्कि आउटसोर्सिंग कर रही होती हैं। कंपनी जो अपने आंतरिक व्यापार इकाई को एक देश से दूसरे देश में स्थानांतरित कर रही हों वे आउटसोर्सिंग नहीं, बल्कि ऑफ़शोरिंग या भौतिक पुनर्गठन कर रही होगी। एक कंपनी जो किसी दूसरे देश में एक अलग कंपनी को व्यापार इकाई का उप-ठेका दे रही है, वह आउटसोर्सिंग और ऑफ़शोरिंग दोनों कर रही होगी।

संबंधित शब्दों में शामिल है नियरशोरिंग, जिसका अर्थ है व्यापार प्रक्रियाओं को (आम तौर पर) कम लागत वाले भौगोलिक रूप से अत्यंत निकट विदेशी स्थानों में पुनः बसाना (उदा. संयुक्त राष्ट्र-आधारित व्यापार प्रक्रियाओं को कनाडा/लैटिन अमेरिका में स्थानांतरित करना); इनशोरिंग, जिसका अर्थ है देश के भीतर ही सेवाएं प्राप्त करना; और बेस्टशोरिंग, या राइटशोरिंग, विभिन्न मानदंडों पर आधारित "उत्तम तट" का चयन. बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग (BPO) ऐसी आउटसोर्सिंग व्यवस्था को संदर्भित करता है जब समस्त व्यावसायिक कार्य (जैसे कि वित्त और लेखांकन, ग्राहक सेवा आदि) आउटसोर्स किए जाते हैं। अधिक विशिष्ट शब्द सॉफ्टवेयर विकास के क्षेत्र में पाए जा सकते हैं - उदाहरण के लिए वैश्विक रूप से विस्तृत दलों के लिए/के द्वारा प्रणालियों की श्रेणी के रूप में विकसित ग्लोबल इनफ़र्मेशन सिस्टम.

ऑफ़शोरिंग के साथ कभी-कभी जुड़ने वाला एक और शब्द है बॉडीशॉपिंग, जो पूरे व्यावसायिक कार्य को अपतटीय स्थान से कराने के व्यापक इरादे के बिना, किसी व्यापार परिवेश में छोटे अलग-अलग कामों को करने के लिए अपतटीय संसाधनों और कार्मिकों के उपयोग की पद्धति है।

उत्पादन ऑफ़शोरिंग[संपादित करें]

उत्पादन ऑफ़शोरिंग में, जो स्थापित उत्पादों के भौतिक पुनर्गठन के रूप में भी जाना जाता है, कम लागत वाले गंतव्य को भौतिक विनिर्माण प्रक्रियाओं का स्थानांतरण शामिल है। उत्पादन ऑफ़शोरिंग के उदाहरणों में शामिल है कॉस्टा रीका में इलेक्ट्रॉनिक घटकों का निर्माण, चीन, वियतनाम आदि में वस्त्र, खिलौने तथा उपभोक्ता वस्तुओं का उत्पादन.

नए उत्पादों की ओर अभिमुख उत्पाद डिजाइन, अनुसंधान और विकास की प्रक्रिया की ऑफ़शोरिंग अपेक्षाकृत कठिन है। इसका कारण यह है कि उत्पादों को बेहतर बनाने और नए नमूना डिज़ाइन तैयार करने के लिए अपेक्षित अनुसंधान और विकास के लिए कौशल की आवश्यकता होती है जो सस्ते मज़दूरों वाले क्षेत्र से हासिल करना मुश्किल है। इस कारण, कई मामलों में लागत को कम करने की इच्छुक कंपनी द्वारा केवल विनिर्माण की ऑफ़शोरिंग की जाती है।

तथापि, ऑफ़शोरिंग और पेटेंट प्रणाली शक्ति के बीच एक संबंध है। इसका कारण यह है एक मजबूत पेटेंट प्रणाली के तहत कंपनियां अपतटीय काम करने से नहीं डरती क्योंकि उनका काम उनकी ही संपत्ति रहेगी. इसके विपरीत, कमजोर पेटेंट प्रणाली वाले देशों में कंपनियों को विदेशी विक्रेताओं या कामगारों से एक बौद्धिक संपदा की चोरी का अधिक डर रहता है और इसलिए, वे ऑफ़शोरिंग कम ही करती हैं।

भौतिक पुनर्गठन को तब भारी प्रोत्साहन मिला जब उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार समझौता (NAFTA) ने निर्माताओं के लिए अपनी उत्पादन सुविधाओं को अमेरिका से मेक्सिको स्थानांतरित करना आसान बना दिया। यह रुझान बाद में चीन की ओर झुका, जिसने न्यून मज़दूरी, मज़दूरों के अधिकार क़ानून, अमेरिकी डॉलर के लिए निश्चित मुद्रा (संप्रति विविध अर्थ-व्यवस्थाओं के लिए निर्धारित) नई कंपनियों के लिए सस्ते ऋण, भूमि और कारख़ाने, कम पर्यावरणीय विनियम और लाखों की जनसंख्या वाले शहरों पर आधारित विशाल आर्थिक लाभ, जहां मज़दूर किसी एक ही प्रकार के उत्पाद बनाने में जुटे हों, की पेशकश की। तथापि, कई कंपनियां बौद्धिक संपत्ति क़ानून के प्रवर्तन में शिथिलता की वजह से अत्याधुनिक उत्पादों के उच्च-मूल्य योजित उत्पादन को चीन में स्थानांतरित करने की इच्छुक नहीं है।[4] CAFTA ने भौतिक पुनर्गठन की गति को बढ़ा दिया है।

आईटी सेवाओं की ऑफ़शोरिंग[संपादित करें]

IT सेवाओं की ऑफ़शोरिंग में विकास के तार, 1990 के उत्तरार्ध में दूरसंचार और इंटरनेट विस्तार के बाद विश्वसनीय और सस्ते संचार के आधारभूत ढांचे की बड़ी मात्रा में उपलब्धता से जुड़े हुए हैं। यह सब वर्ष 2000 तक चलता रहा। कई सेवाओं के डिजिटलीकरण के साथ युग्मित होकर, सेवाओं के वास्तविक उत्पादन स्थल को कम लागत वाले देशों में कुछ इस प्रकार स्थानांतरित करना संभव हो सका कि उपभोक्ता को भी सैद्धांतिक रूप से स्पष्ट रहे।

भारत इस ऑफ़शोरिंग रुझान से पहले लाभान्वित हुआ जहां अंग्रेज़ी बोलने वाले[5] और तकनीकी दक्षता रखने वालों की संख्या ज़्यादा है। 1990 दशक के प्रारंभ में भारत के ऑफ़शोरिंग उद्योग ने छोटे-मोटे IT कार्यों में जड़ें जमाईं और तब से कॉल सेंटर और लेन-देन प्रक्रिया जैसी बैक-ऑफ़िस प्रक्रियाओं की ओर रुख़ किया है। 1990 दशक के उत्तरार्ध में, भारत के प्रचुर और सस्ते सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग प्रतिभा ने Y2K समस्या से उत्पन्न होने वाली भारी मांग के साथ जुड़ कर, अमेरिका में बसे ग्राहकों के लिए बड़े पैमाने पर सॉफ़्टवेयर डेवलपमेंट परियोजनाओं को आकर्षित करने के लिए भारत के महत्व को आगे बढ़ाया. इससे बैंगलोर्ड जैसा नया शब्द उत्पन्न हुआ, जो आम तौर पर छंटनी को दर्शाने के लिए प्रयुक्त होता है, जो अक्सर व्यवस्थापरक और सामान्यतः कंपनियों द्वारा वेतन भार कम करने के इरादे से आउटसोर्सिंग सूचित करने के लिए- भारत के बेंगलूर से व्युत्पन्न, जहां कुछ आउटसोर्स केंद्र सबसे पहले खुले थे।[6]

संप्रति, भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा ने भारत को एचपी (HP), आईबीएम (IBM), इंटेल (Intel), एएमडी (AMD), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) औरेकल कॉर्पोरेशन (Oracle Corporation), सिस्को (Cisco), एसएपी (SAP) और बीईए (BEA) जैसी वैश्विक कंपनियों के लिए ऑफ़शोरिंग गंतव्य बनाया।

मुद्रास्फ़ीति, उच्च घरेलू ब्याज दर, मज़बूत आर्थिक वृद्धि और वर्धित IT ऑफ़शोरिंग की वजह से भारतीय IT क्षेत्र में 21वीं सदी में 10-15% वेतन वृद्धि देखी गई। परिणामस्वरूप, भारतीय की प्रचालन कंपनियां और फ़र्मों को चिंता है कि वे अन्य ऑफ़शोरिंग गंतव्यों की तुलना में अधिक महंगे होते जा रहे हैं। उच्च विकास दर को बनाए रखने के लिए, मूल्य श्रृंखला को बढ़ाने और सॉफ़्टवेयर तथा हार्डवेयर इंजीनियरिंग के साथ-साथ अन्य उच्च लागत और परिष्कृत तकनीक वाले कार्य में विविधिकरण के प्रयास किए जा रहे हैं। इन कामों में शामिल है अनुसंधान और विकास, इक्विटी विश्लेषण, आय-कर प्रसंस्करण, रेडियोलॉजिकल विश्लेषण, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन, और अन्य कई.

ऑफ़शोरिंग गंतव्य के चयन में अक्सर सांस्कृतिक कारण भूमिका निभाते हैं। जापानी कंपनियों द्वारा चीन को आउटसोर्स किया जा रहा है, जहां जापानी बोलने वाले बड़ी संख्या में मौजूद हैं - विशेषकर दलियान शहर, जो दशकों तक जापान के कब्जे में रहने वाला चीनी प्रदेश है (पुस्तक द वर्ल्ड ईज़ फ़्लैट में इसकी चर्चा की गई है). जर्मन कंपनियां आउटसोर्स के लिए पोलैंड और रोमानिया का रुख़ करती हैं, जहां के लोगों को सामान्यतः जर्मन भाषा में प्रवीणता हासिल रहती है।

इसी तरह के कारणों के लिए फ्रांस की कंपनियां उत्तरी अफ्रीका को आउटसोर्स करती हैं।

ऑस्ट्रेलियाई IT कंपनियों के लिए इंडोनेशिया एक प्रमुख पसंदीदा ऑफ़शोरिंग गंतव्य है। इंडोनेशिया को IT सेवाओं के ऑफ़शोरिंग के कारण हैं तटवर्ती निकट स्थान, सामान्य समय-अंचल और पर्याप्त IT कार्य बल.

अन्य ऑफ़शोरिंग गंतव्य स्थलों में शामिल है मेक्सिको, मध्य और दक्षिणी अमेरिका, फिलीपीन्स, दक्षिणी अफ्रीका और पूर्वी यूरोपीय देश.

मध्य अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते (CAFTA) ने कॉस्टा रीका, एल सैल्वेडोर, ग्वाटेमाला, होंडुरस, निकारगुआ और डोमिनिकन रिपब्लिक जैसे मध्य अमेरिकी देशों और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के बीच नियरशोरिंग को काफ़ी आकर्षक बना दिया है।

नवोन्मेष ऑफ़शोरिंग[संपादित करें]

जैसे ही कंपनियां प्रस्तुत सेवाओं से संतुष्ट होने लगीं और लागत बचत को पहचानने लगी, कई उच्च-प्रौद्योगिकी उत्पाद कंपनियों ने दक्षिण अफ्रीका, भारत, पाकिस्तान, चीन, मेक्सिको, रूस आदि देशों को नवोन्मेषी उत्पादों के लिए प्रयोग करना शुरू किया।

कई मशहूर सिलिकन वैली आधारित कंपनियों ने न केवल लागत कम करने के लिए बल्कि अपने उत्पादन प्रक्रिया की अवधि को कम करने तथा इन देशों में बहुतायत से उपलब्ध प्रतिभा का उपयोग करने के लिए इसमें क़दम रखा है। आम तौर पर इस व्यवहार के लिए कम विकसित देशों का उपयोग किया जाता है।

बौद्धिक संपदा का स्थानांतरण[संपादित करें]

ऑफ़शोरिंग अक्सर अपतटीय क्षेत्र को बहुमूल्य सूचना के अंतरण सक्षम की जाती है। इस तरह की जानकारी और प्रशिक्षण दूरवर्ती कार्यकर्ताओं आंतरिक कर्मचारियों के पिछले उत्पादन की तुलना में बेहतर परिणाम देने योग्य बनाते हैं। जब इस तरह के अंतरण में कोई ऐसी सुरक्षित सामग्री शामिल हो, जैसे कि गोपनीय दस्तावेज़ और व्यापार रहस्य, जो अनुद्घाटन समझौतों से सुरक्षित होती है, तो बौद्धिक संपदा का स्थानांतरण या निर्यात किया जाता है। ऐसे निर्यातों का प्रलेखन और मूल्यांकन काफी मुश्किल होता है, लेकिन इसे महत्व दिया जाना चाहिए चूंकि इसमें कुछ ऐसी मदें होती हैं जो विनियमित या कर योग्य होती हैं।

बहस[संपादित करें]

ऑफ़शोरिंग एक विवादास्पद मुद्दा बन गया है जिसने अर्थशास्त्रियों के बीच गरमा गरम बहस छेड़ दी है, जिनमें से कुछ मुक्त व्यापार के विषय के साथ घाल-मेल भी कर देते हैं। मुक्त व्यापार के माध्यम से इसे मूल और गंतव्य दोनों देशों के लिए लाभकारी माना जा रहा है, जहां गंतव्य देश को रोज़गार प्रदान किया जाता है और मूल देश को कम लागत पर माल और सेवाएं उपलब्ध होती हैं। इससे दोनों देशों के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में वृद्धि दर्ज होती है। और दोनों ही देशों में रोजगार के अवसर बढ़ जाते हैं चूंकि मूल देश में जिन कामगारों की नौकरियां छूट गई हैं, वे ऐसे बेहतर रोज़गार पा सकते हैं जो उनके देश के लिए अपेक्षाकृत फ़ायदेमंद है।

दूसरी ओर, विकसित देशों में नौकरी छूटने और वेतन में कटौती ने ऑफ़शोरिंग के प्रति विरोध की चिंगारी सुलगाई है। विशेषज्ञों का तर्क है कि विकसित देशों में किसी भी नए रोजगार की गुणवत्ता खोई हुई नौकरियों से कम हैं और कम वेतन की पेशकश की जाती है। ऑफ़शोरिंग का विरोध करने वाले अर्थशास्त्री आरोप लगाते हैं कि सरकार और उनके केंद्रीय बैंकों द्वारा मुद्रा में किए जाने वाले हेरफेर से श्रम लागत में अंतर होता है जिससे तुलनात्मक लाभ का भ्रम पैदा होता है। इसके अलावा, वे संकेत देते हैं विकसित देशों में सॉफ़्टवेयर इंजीनियर, लेखाकार, रेडियॉलोजिस्ट और पत्रकार जैसे उच्च-मूल्य वाली नौकरियों वाले शिक्षित और उन्नत रूप से प्रशिक्षित लोग भी भारत और चीन जैसे अत्यधिक शिक्षित और सस्ते मज़दूरों द्वारा विस्थापित किए जा रहे हैं। 1 मई 2002 को अर्थशास्त्री और पूर्व राजदूत अर्नेस्ट एच. प्रीग ने चीन में बैंकिंग, आवास और नगरीय मामलों की सीनेट समिति के समक्ष प्रमाण प्रस्तुत करते हुए बताया कि उदाहरण के लिए, चीन अपनी मुद्रा को डॉलर के मुक़ाबले लगभग सममूल्य पर स्थिर रखता है जोकि अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक निधि समझौते के नियम 6 का उल्लंघन है, जिसमें कहा गया है कि कोई भी देश बाज़ार में लाभप्रद स्थिति हासिल करने के लिए अपनी मुद्रा में हेरफेर नहीं करेगा। [7] विकसित देशों के परंपरागत रूप से "सुरक्षित" माने जाने वाले अनुसंधान और विकास, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र की नौकरियों पर अब ख़तरे के बादल मंडराने लगे हैं क्योंकि विकासशील देशों में इन क्षेत्रों के लिए भारी मात्रा में कामगारों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। पॉल क्रेग रॉबर्ट्स जैसे अर्थशास्त्रियों का दावा है कि जो अर्थशास्त्री ऑफ़शोरिंग को प्रोत्साहित कर रहे हैं वे तुलनात्मक लाभ और पूर्ण लाभ के बीच के अंतर को समझने में ग़लती कर रहे हैं।

आश्चर्य नहीं कि कई अमेरिकी कार्यपालक अमेरिका में मौजूदा बेरोज़गारी के घटते स्तर (4.5%)[8] का हवाला देते हुए उसे सकारात्मक प्रमाण मानते हैं कि ऑफ़शोरिंग न तो अमेरिकी कामगारों के लिए हानिकारक रहा है और ना ही अमेरिका के लिए। यह बहस का विषय हो सकता है कि वर्तमान बेरोज़गारी के आंकड़ों के उपयोग की समस्याओं में से एक है कि इसमें घटते रोज़गार के आंकड़ों पर ध्यान नहीं दिया गया है।

अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस तर्क-वितर्क में आज से 10-20 वर्षों बाद सतत अपतटीय आउटसोर्सिंग के प्रभाव पर न तो विचार किया गया है और ना ही पूर्वानुमान लगाया गया है, उदाहरण के लिए उभरते देशों में श्रम लागत में संभावित वृद्धि और उनकी आर्थिक अवस्थिति में परिवर्तन, जैसा कि पिछले दशकों में जापान और दक्षिण कोरिया के मामले में हो चुका है।

विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार की गिरावट ने औद्योगिक क्षेत्र के कामगारों के बीच काफ़ी भय उत्पन्न किया है[कृपया उद्धरण जोड़ें], हालांकि कई देशों में कुल रोज़गार में बढ़ोतरी हो रही है। इसका प्रभाव ऑफ़शोरिंग या विदेशी निवेश से कहीं ज़्यादा दर्शाया गया है[कृपया उद्धरण जोड़ें], फिर भी बेरोज़गारी की तोहमत इन्हीं के माथे मढ़ी जा रही है[कृपया उद्धरण जोड़ें], क्योंकि औद्योगिक समाज से औद्योगीकरणोत्तर समाज में होने वाले धीमे परिवर्तन की अपेक्षा बड़े ऑफ़शोरिंग परियोजनाएं लोगों की नज़र में ज़्यादा आने लगी हैं[कृपया उद्धरण जोड़ें]. फिर भी, 2000-2005 की अवधि के दौरान अमेरिका में रोज़गार-सृजन धीमी और वेतन वृद्धि कम रही थी[कृपया उद्धरण जोड़ें]. कुछ लोग ऑफ़शोरिंग को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराते हैं[कृपया उद्धरण जोड़ें]. 1970 के बाद से ही कुल रोज़गार के प्रतिशत के रूप में दीर्घावधिक बेरोज़गारी में लगातार वृद्धि रही है। 2003 में दीर्घावधिक बेरोज़गारी में 22%+ वृद्धि रही। [9] मार्च 2009 तक, बेरोजगारी बीमे पर रहने वाले 45.6% लोगों की सारी निधि चुक गई पर उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। [10]

सेवा-स्तर की चिंताएं[संपादित करें]

कॉल सेंटर जैसे अनुप्रयोगों की ऑफ़शोरिंग के साथ, एक यह भी बहस छिड़ गई कि इस प्रकार का अभ्यास ग्राहकों को कंपनियों से मिलने वाली ग्राहक सेवा और तकनीकी सहायता की गुणवत्ता को गंभीर नुक्सान पहुंचा रहा है। कई कंपनियों को ग्राहक सेवा और तकनीकी सहायता के लिए विदेशी कर्मियों के इस्तेमाल के अपने फ़ैसले के लिए जनता का रोष सहना पड़ा है, जो अधिकांशतः इसके द्वारा खड़ी होने वाली भाषाई समस्या के कारण रही है। हालांकि कुछ देशों में उच्च स्तरीय युवा, कुशल श्रमिक हैं जो अपनी जन्मजात भाषा के रूप में अंग्रेज़ी बोलने में सक्षम हैं, लेकिन उनके अंग्रेज़ी कौशल ने उत्तरी अमेरिका में सवाल खड़ा किए हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

अधिकांश अमेरिकी जनता द्वारा आउटसोर्सिंग की आलोचना के पीछे घटिया ग्राहक सेवा और तकनीकी सहायता से उपजी वह प्रतिक्रिया है जो विदेशी कामगार अमेरिकियों के साथ वार्तालाप का प्रयास करते समय प्रदान कर रहे हैं।

आपूर्ति श्रृंखला चिंताएं[संपादित करें]

कुछ लोगों का दावा है कि ऑउटसोर्सिंग के अंतर्गत कंपनियां अपनी विस्तीर्ण आपूर्ति श्रृंखला पर नियंत्रण और दृश्यता खो रही हैं, जिसके फलस्वरूप जोखिम बढ़ जाता है। 2005 में इंडस्ट्री डाइरेक्शन्स इंक और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन एसोसिएशन (ESCA) द्वारा किए गए 121 इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के सांख्यिकी सर्वेक्षण में पाया गया कि 69% उत्तरदाताओं ने कहा कि ऑउटसोर्सिंग शुरू होने के बाद से, कम से कम 5 आपूर्ति श्रृंखलाओं पर उनका नियंत्रण कम हो गया है, जब कि 66% प्रदाताओं ने महसूस किया कि ग्राहकों के साथ उनका कुल जोखिम अधिक या बहुत अधिक हो गया है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] 36% प्रदाताओं ने जवाब दिया कि उन्होंने ऑउटसोर्सिंग से पहले की अपनी अनिश्चितता की तुलना में अब अनिश्चितता के जोखिम में वृद्धि महसूस की है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] 62% उत्तरदाताओं ने कम से कम दो प्रमुख व्यापार साझेदारी प्रबंधन व्यवहार को "समस्यात्मक" रूप में वर्णित किया, जिनमें शामिल हैं निष्पादन प्रबंधन और परिणामों पर सामान्य सहमति.[कृपया उद्धरण जोड़ें] इस अनुसंधान के अनुसार, कुल उत्तरदाताओं के 40% को आउटसोर्स साझेदारी समझौते में जोखिम साझा करने पर प्रतिरोध रहा।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

प्रतिस्पर्धात्मक चिंताएं[संपादित करें]

देश के बाहर ज्ञान के अंतरण से मूल कंपनियों को स्वयं के खिलाफ़ भी कोई प्रतिस्पर्धी तैयार हो सकता है। चीनी विनिर्माता पिछले घरेलू मध्यवर्तियों के माध्यम से गए बिना, जिनके साथ उन्होंने अपनी सेवाओं के लिए अनुबंध किया था, पहले से ही विदेशी ग्राहकों को अपना माल सीधे बेचने लगे हैं। 1990 और 2000 के दशक में, अमेरिकी ऑटो निर्माता अपने वाहनों के लिए कलपुर्जे तैयार करने के लिए तेजी से चीन की ओर रुख़ करने लगे। 2006 तक, चीन ने यह तकनीक भली-भांति हासिल कर ली और घोषित कर दिया कि अब वे अमेरिकी ऑटो निर्माताओं के साथ उन्हीं के घरेलू बाज़ार में अमेरिकी लोगों को चीनी ऑटोमोबाइल की बिक्री करते हुए प्रतिस्पर्धा करेंगे। जब कोई कंपनी किसी दूसरे देश में माल और सेवाओं का उत्पादन करती है, तो जो निवेश वह घरेलू बाज़ार में करती, वह विदेशी बाज़ार में स्थानांतरित हो जाता है। कॉर्पोरेट धन जो कारखानों, प्रशिक्षण और करों में व्यय होता है, वह कंपनी के बाज़ार में खर्च होने के बजाय विदेशी बाजार में व्यय हो जाता है। विदेशी बाजार में जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ता है, योग्य और अनुभवी घरेलू कामगार छोड़ कर चले जाते हैं या उन्हें मजबूरन अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ता है, जब कि कई बार उन्हें स्थाई रूप से उद्योग छोड़ना पड़ता है। किसी चरण पर, नाटकीय रूप से कार्य निष्पादित करने के लिए बहुत कम योग्य घरेलू श्रमिक बाक़ी रह जाते हैं। इससे घरेलू बाजार को उन वस्तुओं और सेवाओं के लिए विदेशी बाजार पर निर्भर होना पड़ता है, जो रणनीतिक तौर पर "खोखले" स्वदेश को और कमज़ोर बना देती है। वास्तव में, ऑफ़शोरिंग विदेश के प्रतिस्पर्धी उद्योगों को तैयार और मज़बूत करता है, जब कि रणनीतिक रूप से स्वदेश को कमज़ोर बनाता है।[संदिग्ध]

तथापि, रोज़गार के आंकड़े इस दावे पर संदेह जताते हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में अमेरिका में IT रोज़गार 2001 के पहले वाले स्तर तक आ गया है[11][12] और तब से बढ़ रहा है। ऑफ़शोरिंग के कारण छूटने वाली नौकरियों की संख्या पूरे अमेरिकी श्रम बाज़ार के 1 प्रतिशत से भी कम रह गया है।[13] हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, आउटसोर्सिंग अमेरिका में छूटने वाली नौकरियों के एक बहुत छोटे से अनुपात का प्रतिनिधित्व करता है। ऑफ़शोरिंग की बदौलत छूटने वाली नौकरियों की कुल संख्या, दोनों निर्माण और तकनीकी, अमेरिका में छूटी नौकरियों के केवल 4 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। नौकरियों की कटौती के प्रमुख कारण अनुबंध समापन और कर्मचारियों की संख्या को घटाया जाना है।[14] कुछ अर्थशास्त्रियों और टीकाकारों का दावा है कि ऑफ़शोरिंग के मामले को कुछ ज़्यादा ही बढ़ा-चढ़ा कर कहा जा रहा है।[14]

पुनर्प्रशिक्षण चिंताएं[संपादित करें]

ऑफ़शोरिंग के कारण नौकरी खोने वाले देशीय कर्मचारियों के लिए अक्सर प्रस्तुत एक समाधान है नई नौकरी के लिए पुनः प्रशिक्षण. कुछ विस्थापित कर्मचारी उच्च शिक्षा और स्नातक योग्यता प्राप्त हैं। किसी अन्य क्षेत्र में उनके वर्तमान स्तर तक पुनः प्रशिक्षण, शिक्षा में लगे वर्षों और आवेष्टित शैक्षणिक लागत की दृष्टि से शायद ही सही विकल्प हो सकता है।

उत्पादन गतिशीलता के कारक का प्रभाव[संपादित करें]

शास्त्रीय अर्थशास्त्रियों के अनुसार, उत्पादन के घटक तीन हैं, भूमि, श्रम और पूंजी. ऑफ़शोरिंग इन कारकों में से किन्ही दो की गतिशीलता पर काफी निर्भर करता है। अर्थात्, ऑफ़शोरिंग कैसे अर्थ-व्यवस्थाओं को प्रभावित करता है इस बात पर निर्भर करता है कि कितनी आसानी से पूंजी और श्रम को अलग उद्देश्य के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। उत्पादन के एक कारक के रूप में भूमि में आम तौर पर कम या गतिशीलता की कोई संभाव्यता नहीं देखी जाती है।

ऑफ़शोरिंग पर पूंजी गतिशीलता के प्रभाव पर व्यापक रूप से चर्चा की गई है। व्यष्टि-अर्थशास्त्र में, एक निगम को ऑफ़शोरिंग के प्रारंभिक लागत को वहन करने के लिए कार्यशील पूंजी को खर्च करने की क्षमता होनी चाहिए। अगर सरकार भारी तौर पर विनियमित करती है कि कैसे एक निगम अपनी कार्यशील पूंजी खर्च कर सकता हैं, वह अपने परिचालनों को ऑफ़शोर करने में सक्षम नहीं होगा। इसी वजह से ऑफ़शोरिंग की सफलता के लिए समष्टि-अर्थशास्त्र को मुक्त होना चाहिए। आम तौर पर, जो ऑफ़शोरिंग का पक्ष लेते हैं वे पूंजी गतिशीलता का समर्थन करते हैं और जो ऑफ़शोरिंग का विरोध करते हैं वे अत्यधिक विनियमन चाहते हैं।

श्रम गतिशीलता भी एक प्रमुख भूमिका निभाती है और इस पर भी गरमा-गरम बहस होती है। जब कंप्यूटर और इंटरनेट ने काम को इलेक्ट्रॉनिक रूप से पोर्टेबल बना दिया, मुक्त बाज़ार की ताक़तें सेवा उद्योग में कार्य की वैश्विक गतिशीलता में परिणत हुईं. अधिकांश सिद्धांत जो बहस करते हैं कि ऑफ़शोरिंग अंततः घरेलू कामगारों को लाभ पहुंचाता है, यह मान कर चलते हैं कि वे कर्मचारी नए रोज़गार प्राप्त करने में सक्षम हो जाएंगे, भले ही उन्हें खुद के अवमूल्यन द्वारा (कम वेतन स्वीकार करते हुए) या नए क्षेत्र में स्वयं के पुनः प्रशिक्षण द्वारा रोज़गार पाने के लिए वापस श्रम बाज़ार में जाना पड़े. विदेशी कामगारों को नई नौकरी और ऊंची मजदूरी का लाभ मिलता है जब काम उनके पास आता है।

इतिहास[संपादित करें]

विकसित विश्व में, देश से बाहर नौकरियों को ले जाने का मामला कम से कम 1960[15] के दशक में देखा गया और तब से यह जारी है। मुख्य रूप से इसकी विशेषता रही है विकसित देशों से विकासशील देशों में कारखानों को स्थानांतरित करना। यह ऑफ़शोरिंग और कारखानों को बंद करना, विकसित देशों में औद्योगिक से औद्योगिकरणोत्तर सेवा समाज में संरचनात्मक परिवर्तन का कारण बना।

20वीं सदी के दौरान, परिवहन और संचार की लागत में कमी, भुगतान दरों की प्रमुख असमानताओं के साथ, अमीर देशों से कम अमीर देशों को ऑफ़शोरिंग के फलस्वरूप कई कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से संभाव्य बनाया। इसके अलावा, इंटरनेट के विकास ने विशेष रूप से फाइबर ऑप्टिक अंतरमहाद्वीपीय अधिक विस्तार क्षमता और वर्ल्ड वाइड वेब ने कई प्रकार के सूचना कार्यों की "परिवहन लागत" को लगभग शून्य तक कम कर दिया। [16]

इंटरनेट के विकास के साथ, कॉल सेंटर, कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग जैसी कई नई श्रेणियों के कार्य, एक्स-रे और चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन (मैग्नेटिक रेज़ोनेंस इमेजिंग) जैसे चिकित्सा डेटा के पठन, चिकित्सीय प्रतिलेखन (मेडिकल ट्रान्स्क्रिप्शन), आय कर तैयारी और शीर्षक खोज की ऑफ़शोरिंग की जाने लगी है।

1990 के दशक से पहले, आयरलैंड यूरोपीय संघ के सबसे गरीब देशों में से एक था। आयरलैंड की अपेक्षाकृत कम निगमित कर दरों के कारण अमेरिकी कंपनियों ने आयरलैंड के लिए सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रॉनिक और औषधीय बौद्धिक संपदा के निर्यात की ऑफ़शोरिंग शुरू कर दी। इसने उच्च तकनीक "उछाल" लाने में मदद की और इससे आयरलैंड को यूरोपीय संघ के समृद्ध देशों में से एक बनने में मदद मिली। [16]

1994 में उत्तर अमेरिकी मुक्त व्यापार करार (NAFTA) प्रभावी हो गया। चूंकि संस्थाएं असमान सौदेबाज़ी शक्ति, जोखिम तथा लाभों में व्यापक हैं, आम तौर पर समझौता वार्ता इतना मुश्किल हो जाता है कि मुक्त व्यापार क्षेत्रों को तैयार करना (जैसे कि अमेरिकास का मुक्त व्यापार क्षेत्र) अभी तक सफल नहीं हो पाया है। 2005 में, कुशल काम की ऑफ़शोरिंग की, जिसे नॉलेज वर्क के रूप में भी संदर्भित किया जाता है, अमेरिका में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई, जिसने नौकरी ख़त्म करने संबंधी बढ़ती आशंकाओं को पोषित किया।[16]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • भूमंडलीकरण-विरोधी
  • कॉल सेंटर की सुरक्षा
  • एकीकृत वैश्विक उद्यम
  • वैश्विकता
  • होमेशोरिंग
  • इनशोरिंग
  • अपतटीय अनुसंधान नेटवर्क
  • आउटसोर्सिंग
  • व्यक्तिगत ऑफ़शोरिंग
  • पुनर्गठन
  • उत्पादन पलायन
  • प्रोग्रामर्स गिल्ड
  • फॉलो-द-सन
  • डिक्लाइन एंड फ़ॉल ऑफ़ द अमेरिकन प्रोग्रामर

क्षेत्रवार:

साहित्य[संपादित करें]

  • अशोक देव बर्धन और सिंथिया क्रॉल "द न्यू वेव ऑफ़ आउटसोर्सिंग" (2 नवम्बर 2003). फ़िशर सेंटर फ़ॉर रियल एस्टेट एंड अर्बन इकोनॉमिक्स. सेंटर रीसर्च रिपोर्ट: रिपोर्ट #1103. https://web.archive.org/web/20091016063521/http://repositories.cdlib.org/iber/fcreue/reports/1103/
  • एलन ई. ब्लाइंडर, विदेशी मामलों में ऑफ़शोरिंग: द नेक्स्ट इंडस्ट्रियल रेवल्यूशन?, खंड 85, सं.2, मार्च/अप्रैल 2006, 113-128.
  • विनज काउटो, महादेव मणि, विकास सहगल, एरी वाई. लेविन, स्टीफ़न मैनिंग, जेफ़ डब्ल्यू. रसेल, Offshoring 2.0: Contracting Knowledge and Innovation to Expand Global Capabilities Offshoring Research Network[मृत कड़ियाँ] 2007 सर्विस प्रोवाइडर रिपोर्ट.
  • जॉर्ज एर्बर, ऐदा सैयद-अहमद, इंटरइकोनॉमिक्स में: ऑफ़शोर आउटसोर्सिंग - अ ग्लोबल शिफ़्ट इन द प्रेसेंट आईटी इंडस्ट्रीज़, खंड 40, संख्या 2, मार्च 2005, 100-112,[17]
  • थॉमस एल.फ़्रेडमैन, द वर्ल्ड इज़ फ़्लैट: इक्कीसवीं सदी का संक्षिप्त इतिहास 2005 ISBN 0-374-29288-4
  • गैरी जेरेफ़ी और विवेक वाधवा "फ़्रेमिंग द इंजीनियरिंग आउटसोर्सिंग डिबेट: प्लेसिंग द यूनाइटेड स्टेट्स ऑन ए लेवेल प्लेइंग फ़ील्ड विथ इंडिया एंड चाइना" (2006) https://web.archive.org/web/20061221002937/http://memp.pratt.duke.edu/outsourcing/
  • लाउ डॉब्स के प्राक्कथन के साथ रॉन हीरा और अनिल हीरा,

आउटसोर्सिंग अमेरिका: व्हाट्ज़ बिहाइंड अवर नेशनल क्राइसिस एंड हाउ वी कैन रीक्लेम अमेरिकन जॉब्स . (मई 2005). ISBN 0-8053-4003-3.

  • ब्रैडफोर्ड जेन्सेन और लोरी क्लेट्ज़र (सितम्बर 2005), "ट्रेडेबल सर्विसस: अंडरस्टैंडिंग द स्कोप एंड इम्पैक्ट ऑफ़ सर्विसस आउटसोर्सिंग", इंस्टीट्यूट फ़ॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स वर्किंग पेपर नं. 05-9 SSRN 803906
  • मार्क कोबायाशी-हिलेरी 'बिल्डिंग अ फ़्यूचर विथ बीआरआईसी: द नेक्स्ट डिकेड फ़ॉर ऑफ़शोरिंग', (नवंबर 2007). ISBN 978-3-540-46453-2.
  • मार्क कोबायाशी-हिलेरी और डॉ॰ रिचर्ड साइकस 'ग्लोबल सर्विसेज: मूविंग टू अ लेवल प्लेइंग फ़ील्ड', (मई 2007). ISBN 978-1-902505-83-1.
  • विलियम लेज़ॉनिक, ग्लोबलाइज़ेशन ऑफ़ द आइसीटी लेबर फ़ोर्स : द ऑक्सफोर्ड हैंडबुक ऑन आईसीटी, सं. क्लॉडियो साइबोरा, रॉबिन मैनसेल, डैनी क्वाह, रोजर सॉल्वरस्टोन, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, (आगामी)
  • एरी वाई. लेविन और विनड काउटो, Next Generation Offshoring: The Globalization of Innovation Offshoring Research Network[मृत कड़ियाँ] 2006 सर्वेक्षण रिपोर्ट.
  • मारियो लुईस, आईटी अप्लिकेशन सर्विस ऑफ़शोरिंग: एन इनसाइडर्स गाइड, सेज पब्लिकेशन्स, ISBN 0-7619-3525-8, ISBN 978-0-7619-3525-4
  • कैथरीन मान, एक्सलरेटिंग द ग्लोबलाइज़ेशन ऑफ़ अमेरिका: द रोल फ़ॉर इनफ़र्मेशन टेक्नॉलोजी, इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स, वाशिंगटन, डी.सी. जून 2006[18], ISBN पेपर 0-88132-390-X
  • स्टीफ़न मैनिंग, सिल्विया मासिनी और एरी वाई. लेविन, "अ डाइनमिक पर्सपेक्टिव ऑन नेक्स्ट-जनरेशन ऑफ़शोरिंग: द ग्लोबल सोर्सिंग ऑफ़ साइन्स एंड इंजीनियरिंग टैलेंट": अकाडेमी ऑफ़ मैनेजमेंट पर्सपेक्टिव्स, खंड 22, सं. 3, अक्टूबर 2008, 35-54.[19]
  • मॅककिन्से ग्लोबल इंस्टिट्यूट, "ऑफ़शोरिंग: इज़ इट ए विन-विन गेम?", अगस्त 2003
  • भारत वगाडिया "आउटसोर्सिंग टु इंडिया: अ लीगल हैंडबुक", अगस्त 2007, स्प्रिंगर, ISBN 978-3-540-72219-9
  • अतुल वशिष्ठ और अविनाश वशिष्ठ द ऑफ़शोर नेशन, ISBN 0-07-146812-9

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "द ऑफ़शोरिंग ऑफ़ अमेरिकन गवर्नमेंट", कार्नेल लॉ रिव्यू, नवंबर 2008: http://www.lawschool.cornell.edu/research/cornell-law-review/upload/Zuckerman.pdf Archived 13 जून 2010 at the वेबैक मशीन. पर उपलब्ध
  2. महा लेखा कार्यालय में देखें: "अपेंडिक्स II: डेफ़िनेशन्स ऑफ़ ऑफ़शोरिंग": "इंटरनेशनल ट्रेड: करेंट गवर्नमेंट डेटा प्रोवाइड लिमिटेड इनसाइट इन्टु ऑफ़शोरिंग ऑफ़ सर्विसस", सितम्बर 2004. "द न्यू पैलग्रेव डिक्शनरी ऑफ़ इकोनॉमिक्स" 2008 में "स्वेनसन, डी: "इंटरनेशनल आउटसोर्सिंग" के आउटसोर्सिंग में आयातित मध्यवर्ती वस्तुएं शामिल हैं।
  3. "वर्कफ़ोर्स मैनेजमेंट ऑनलाइन, दिसम्बर 2007". मूल से 17 दिसंबर 2013 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 नवंबर 2010.
  4. फ़िशमैन, टी: "चाइना, इंक" स्क्रिबनर, 2006.
  5. वर्किंग थ्रू आउटसोर्सिंग: सॉफ्टवेयर प्रैक्टिस, इंडस्ट्री ऑर्गनाइज़ेशन एंड इंडस्ट्री इवल्यूशन इन इंडिया Archived 10 अक्टूबर 2009 at the वेबैक मशीन. केली एशेन. ई-स्कॉलरशिप रिपॉज़िटरी, 2006. 25 नवम्बर 2006 को पुनःप्राप्त.
  6. "बैंग्लोर्ड". मूल से 3 दिसंबर 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 नवंबर 2010.
  7. अर्नेस्ट एच. प्रीग (1 मई 2002). टेस्टीमोनी ऑन चाइनिज़ करेंसी मैनिपुलेशन Archived 27 अप्रैल 2006 at the वेबैक मशीन. मैन्युफ़ैक्चरर्स एलायंस
  8. "United States Economy at a Glance". Bls.gov. मूल से 19 नवंबर 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-05-22.
  9. कांग्रेशनल बजट ऑफ़िस (अक्टूबर, 2007). लॉन्ग टर्म अनेम्प्लॉयमेंट Archived 2 दिसम्बर 2010 at the वेबैक मशीन. कांग्रेशनल बजट ऑफ़िस
  10. सिल्विया अलेग्रेटो और एंड्रयू स्टेटनर (6 मई 2009). नौकरी की कमी का भारी संकट गंभीर और उसके साथ दीर्घकालिक बेरोजगारी में वृद्धि Archived 16 नवम्बर 2009 at the वेबैक मशीन. राष्ट्रीय रोजगार कानून परियोजना
  11. "अमेरिका में आईटी रोजगार का उच्च रिकार्ड तक पहुंचना - आईटी रोजगार का उच्च रिकार्ड - इनफ़र्मेशनवीक". मूल से 14 अप्रैल 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 नवंबर 2010.
  12. "अधिक ऑउटसोर्सिंग के बावजूद अमेरिकी तकनीकी कामगार की भारी मांग-आउटसोर्सिंग ब्लॉग - इनफ़र्मेशनवीक". मूल से 4 फ़रवरी 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 नवंबर 2010.
  13. "मिथक और वास्तविकताएं: आउटसोर्सिंग का झूठा संकट". मूल से 3 मार्च 2010 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 नवंबर 2010.
  14. "Samuelson: Debunking the Great Offshoring Myth". Newsweek.com. 2007-08-21. मूल से 2 जून 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-05-22.
  15. महा लेखा कार्यालय: "ऑफ़शोरिंग: अमेरिकी सेमीकंडक्टर और सॉफ्टवेयर उद्योग का भारत और चीन में अधिक उत्पादन" Archived 2 दिसम्बर 2010 at the वेबैक मशीन., सितम्बर, 2006.
  16. सारा बैस, "ए गिफ़्ट ऑफ़ फ़ायर: सोशल, लीगल, एंड एथिकल इश्यूस फॉर कंप्यूटिंग एंड द इंटरनेट." तीसरा सं. वर्क" (2008)
  17. "स्प्रिंगरLink Home - Main". स्प्रिंगरlink.com. 2006-12-18. अभिगमन तिथि 2010-05-22.[मृत कड़ियाँ]
  18. "Accelerating the Globalization of America: The Role for Information Technology - Catherine L. Mann, Jacob Funk Kirkegaard, Peter G. Peterson Institute for International Economics". Bookstore.iie.com. 2010-03-25. मूल से 29 नवंबर 2006 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-05-22.
  19. "SSRN-A Dynamic Perspective on Next-Generation Offshoring: The Global Sourcing of Science and Engineering Talent by Stephan Manning, Silvia Massini, Arie Lewin". Papers.ssrn.com. मूल से 29 जून 2011 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2010-05-22.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

समाचार[संपादित करें]

अनुसंधान[संपादित करें]

इंटरनेट लेख[संपादित करें]