रुद्र

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रुद्र[संपादित करें]

वेद में शिवजी का नाम रुद्र है। यह व्यक्ति की चेतना के अन्तर्यामी हैं।


शिव पुरान के अनुसार शिव जि को श्रुश्ति बनाने के लिये बिच्हार आया तो शिव जि ने अपने दाइनि भुजा से श्री ब्रह्मा को उत्पन किया और उन्हे जिव को उत्पन कर्ने को कहा, फिर बाइनि भुजा से श्री विश्नु को उत्पन किया और उन्हे सन्च्हालन का काम दिया, और फिर शिव् जि ने अपना हदय के दो तुक्डॅ किये और एक तुक्डे के रूप मे श्री श्री भग्वान रुद्र प्रगट हुए, जिसे भग्वान शिव ने प्रान लेने का काम दिया। इस तराह भग्वान रुद्र प्रगट हुए।

ऋग्वेद के भजन[संपादित करें]

रुद्र का प्रथम उल्लेख ऋग्वेद में है, जहां तीन पूरे भजन उनके लिए समर्पित किए गए हैं। कुल मिलाकर ऋग्वेद में रुद्र के लगभग 75 संदर्भ हैं।