पुरी

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पुरी
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उड़ीसा
ज़िला पुरी
महापौर गौरहरि प्रधान
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 0 मीटर (0 फी॰)

Erioll world.svgनिर्देशांक: 19°49′N 85°50′E / 19.81°N 85.83°E / 19.81; 85.83

पुरी भारत के ओड़िशा प्रान्त का एक जिला है। भारत के चार पवित्रतम स्थानों में से एक है पुरी, जहां समुद्र इस शहर के पांव धोता है। कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति यहां तीन दिन और तीन रात ठहर जाए तो वह जीवन-मरण के चक्कर से मुक्ति पा लेता है। पुरी, भगवान जगन्नाथ (संपूर्ण विश्व के भगवान), सुभद्रा और बलभद्र का पवित्र नगरी है, हिंदुओं के पवित्र चार धामों में से एक पुरी संभवत: एक ऐसा स्थान है जहां समुद्र के आनंद के साथ-साथ यहां के धार्मिक तटों और 'दर्शन' की धार्मिक भावना के साथ कुछ धार्मिक स्थलों का आनंद भी लिया जा सकता है।

पुरी एक ऐसा स्थान है जिसे हजारों वर्षों से कई नामों - नीलगिरी, नीलाद्रि, नीलाचल, पुरुषोत्तम, शंखश्रेष्ठ, श्रीश्रेष्ठ, जगन्नाथ धाम, जगन्नाथ पुरी - से जाना जाता है। पुरी में दो महाशक्तियों का प्रभुत्व है, एक भगवान द्वारा सृजित है और दूसरी मनुष्य द्वारा सृजित है।

स्मारक एवं दर्शनीय स्थल[संपादित करें]

जगन्नाथ मंदिर[संपादित करें]

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर

यह 65 मी. ऊंचा मंदिर पुरी के सबसे शानदार स्मारकों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में चोडागंगा ने अपना राजधानी को दक्षिणी उड़ीसा से मध्य उड़ीसा में स्थानांतररित करने की खुशी में करवाया था। यह मंदिर नीलगिरी पहाड़ी के आंगन में बना है। चारों ओर से 20 मी. ऊंची दीवार से घिरे इस मंदिर में कई छोट-छोटे मंदिर बने हैं। मंदिर के शेष भाग में पारंपरिक तरीके से बना सहन, गुफा, पूजा-कक्ष और नृत्य के लिए बना खंबों वाला एक हॉल है। इस मंदिर के विषय में वास्तव में यह एक आश्चर्यजनक सत्य है कि यहां जाति को लेकर कभी भी मतभेद नहीं रहे हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें] सड़क के एक छोर पर गुंडिचा मंदिर के साथ ही भगवान जगन्नाथ का ग्रीष्मकालीन मंदिर है। यह मंदिर ग्रांड रोड के अंत में चाहरदीवारी के भीतर एक बाग में बना है। यहां एक सप्ताह के लिए मूर्ति को एक साधारण सिंहासन पर विराजमान कराया जाता है। भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर की भांति इस मंदिर में भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। उन्हें मंदिर परिसर के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैं।

आनंद बाजार[संपादित करें]

यह बाज़ार विश्व की सबसे बड़ी फूड-मार्किट है और भोजन पसंद करने वाला प्रत्येक व्यक्ति यहां आना पसंद करता है।

गुंडिचा मंदिर[संपादित करें]

गार्डन हाउस के रूप में प्रसिद्ध, एक छोटा मंदिर जहां रथ-यात्रा के दौरान मूर्तियों को रखा जाता है। एक चाहरदीवारी के चारों ओर बाग तथा बीच में मंदिर बना है। यह आंटी हाउस के नाम से भी प्रसिद्ध है।

पुरी बीच -[संपादित करें]

चित्र:Puri 2005.jpg
पुरी का सागरतट

पुरी के समुद्री तटों पर सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य बहुत आनंददायक होते हैं, देखने वाला आनंद के हिलोरे लेने लगता है। यहां के समुद्री तट सन-बाथिंग के लिए आदर्श स्थान हैं किंतु यदि आप एक अच्छे तैराक नबीं है तो यहां तैरने की सलाह नहीं दी जा सकती क्योंकि यहां लहरों का प्रवाह बहुत तेज होता है।

बालीघई बीच -[संपादित करें]

पुरी से 8 कि.मी. दूर नुआनई नदी के मुहाने पर बालीघई बीच, एक प्रसिद्ध पिकनिक-स्पॉट है, यह चारों ओर कॉसरीना पेड़ों से घिरा है।

सत्यबाड़ी (साक्षीगोपाल) -[संपादित करें]

भगवान साक्षीगोपाल का मंदिर पुरी से केवल 20 कि.मी. की दूरी पर है। केवल 'अनTला नवमी' के दिन यहां श्री राधा जी के पवित्र पैरों के दर्शन किए जा सकते हैं।

बड़ा डांडा - अच्छी-खासी शॉपिंग करनी हो तो यह एक आदर्श स्थान है।

पर्व[संपादित करें]

रथ यात्रा

हिंदु नव वर्ष[संपादित करें]

हिंदु नव वर्ष की खुशी में यहां चंदन यात्रा निकाली की जाती है। जून माह की पूर्णमासी (ज्येष्ठ) को यहां स्नान यात्रा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ को विधि-विधान से स्नान कराया जाता है। इस दौरान जनता मूल मूर्तियों के दर्शन करती है। झुलाना यात्रा के दौरान विशाल शोभा यात्रा के रूप में 21 दिनों के लिए मूर्तियों के प्रतिरूप को नर्मदा टैंक में सुंदर ढंग से सजी बोटों में निकाला जाता है।

और, वस्तुत:, पूरे भारतवर्ष और विश्व के पर्यटकों के लिए रथ-यात्रा आकर्षण का प्रमुख केंद्र है, यह यात्रा जून माह में आयोजित होती है-जो पुरी यात्रा केलिए सर्वश्रेष्ठ समय है। भगवान जगन्नाथ, उनकी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र को वार्षिक अवकाश पर मुख्य मंदिर से 2 कि.मी. दूर एक छोटे मंदिर 'गुंडिचा घर' में ले जाया जाता है। यह यात्रा रथ-यात्रा के रूप में आयोजित की जाती है। गुंडिचा मंदिर के श्रद्धालु भक्त तीनों मूर्तियों को अलग-अलग रथ (लकड़ी के रथ) में खींचकर ले जाते है। इन रथों को व्यापक रूप से विविध रंगों में सजाया जाता है, ये रंग प्रत्येक मूर्ति के महत्व के दर्शाते हैं।

रथ यात्रा पर्व[संपादित करें]

रथ यात्रा और नव कालेबाड़ा पुरी के प्रसिद्ध पर्व हैं। ये दोनों पर्व भगवान जगन्नाथ की मुख्य मूर्ति से संबद्ध हैं। नव कालेबाड़ा पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, तीनों मूर्तियों- भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का बाहरी रूप बदला जाता है। इन नए रूपों को विशेष रूप से सुगंधित चंदन-नीम के पेड़ों से निर्धारित कड़ी धार्मिक रीतियों के अनुसार सुगंधित किया जाता है। इस दौरान पूरे विधि-विधान और भव्य तरीके से 'दारु' (लकड़ी) को मंदिर में लाया जाता है।

इस दौरान विश्वकर्मा (लकड़ी के शिल्पी) 21 दिन और रात के लिए मंदिर में प्रवेश करते हैं और नितांत गोपनीय ढंग से मूर्तियों को अंतिम रूप देते हैं। इन नए आदर्श रूपों में से प्रत्येक मूर्ति के नए रूप में 'ब्रह्मा' को प्रवेश कराने के बाद उसे मंदिर में रखा जाता है। यह कार्य भी पूर्ण धार्मिक विधि-विधान से किया जाता है।

पुरी बीच पर्व वार्षिक तौर पर नवंबर माह के आरंभ में आयोजित किया जाता है, उड़ीसा की शिल्पकला, विविध व्यंजन और सांस्कृतिक संध्याएं इस पर्व का विशेष आकर्षण हैं।

पुरी में रथयात्रा का त्योहार साल में एक बार मनाया जाता है। इस रथयात्रा को देखने के लिए तीर्थयात्री देश के विभिन्न कोने से आते हैं। रथयात्रा में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा की पूजा-अर्चना करते हैं। यह भव्य त्योहार नौ दिनों तक मनाया जाता है।

रथयात्रा जगन्नाथ मन्दिर से प्रारम्भ होती है तथा गुंडिचा मन्दिर तक समाप्त होती है। भारत में चार धामों में से एक धाम पुरी को माना जाता है। यहाँ विश्व का सबसे बड़ा समुद्री तट है।

आप रेल, बस तथा हवाई जहाज से पूरी पहुँच सकते हैं। सबसे नजदीक का हवाईअड्डा यहाँ से 60 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। अगर पर्यटक समुद्री तट का आनंद उठाना चाहते हैं तब वे गर्मियों में छुटि्टयाँ मनाने के लिए पुरी आ सकते हैं। भ्रमण करने के लिए यहाँ पर बस, टैक्सी तथा ऑटो की सेवाएँ उपलब्ध हैं।

आनंद बाजार में हर प्रकार का खाना मिलता है। यह विश्व का सबसे बड़ा बाज़ार है। पुरी में कई मन्दिर हैं। गुंडिचा मन्दिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा सुभद्रा देवी की प्रतिमा स्थित है।

लोकनाथ मन्दिर[संपादित करें]

यह बहुत ही प्रसिद्ध शिव मन्दिर है जगन्नाथ मन्दिर से यह एक किमी. दूर है। यहाँ के निवासियों में ऐसा विश्वास है कि भगवान राम ने इस जगह पर अपने हाथों से इस शिवलिंग की स्थापना की थी। त्योहारों के समय इस मन्दिर में विशेष पूजन का आयोजन किया जाता है।


पुरी के पुल विश्व में प्रसिद्ध हैं। इस धार्मिक स्थल पर एक छोटा सा टाउन स्थित है। यहाँ पर दस्तकार तथा कलाकार बसे हुए हैं। इन कलाकारों द्वारा विविध प्रकार के चित्र बनाए जाते हैं। सबसे प्रसिद्ध कला है सेनडार्ट। रघुराजपुर की चित्रकला भी बहुत प्रसिद्ध है।

यहाँ की संस्कृति तथा साहित्य से परिचित होने के लिए पर्यटक विभिन्न प्रकार के संग्रहालयों में कदम रख सकते हैं जैसे - उड़ीसा स्टेट संग्रहालय, ट्राइबल रिसर्च संग्रहालय तथा हैंडीक्राफ्ट हाउस

पुरी के पास स्थित रिसोर्ट पर्यटकों के लिए एक आकर्षषण का केन्द्र बन गया है। रिसोर्ट तथा होटलों में रहकर आप समुद्र का नज़ारा देख सकते हैं तथा लुभावने मौसम का आनंद उठाने के साथ-साथ पर्यटक तैर भी सकते हैं।

बालीघाई तथा सत्याबादी[संपादित करें]

दोनों ही प्रसिद्ध तीर्थस्थल हैं। इन तीर्थस्थलों में भगवान साक्षीगोपाल की पूजा की जाती है। यहाँ पर एक प्रसिद्ध सू्र्य मन्दिर है कोणार्क। यह भ्रमण के लिए एक अनोखा स्थल है। यहाँ 13वीं सदी की वास्तुकला और मूर्तिकला को देख सकते हैं। पुरी एक आकर्षक धार्मिक स्थल है।