इण्डिक कम्प्यूटिंग

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इण्डिक कम्प्यूटिंग का अर्थ है इण्डिक अर्थात भारतीय भाषाओं एवं लिपियों में कम्प्यूटिंग (संगणन)। इसमें शामिल है कम्प्यूटर एवं वॅब ऍप्लीकेशनों का स्थानीकरण, भारतीय भाषाओं लिपियों में डेटाबेस प्रबन्धन तथा सॉफ्टवेयर डेवलपमेण्ट यथा इनपुट मॅथड, ओसीआर, वर्तनी जाँचक, वाक से पाठ तथा पाठ से वाक आदि का विकास।

आजकल अधिकतर भारतीय भाषायें कम्प्यूटर एवं इणटरनेट पर कार्य करने के लिये यूनिकोड का प्रयोग करती हैं। अधिकतर नये सॉफ्टवेयर एवं वेब सेवायें इण्डिक यूनिकोड का समर्थन करते हैं। यूनिकोड के नवीनतम संस्करण ५.० में अधिकतर भारतीय भाषाओं को कूटबद्ध किया जा चुका है।

इण्डिक कम्प्यूटिंग सम्बंधी अनेक परियोजनायें चल रही हैं। इनमें राजकीय क्षेत्र की कम्पनियाँ, कुछ स्वयंसेवक समूह तथा कई लोग व्यक्तिगत रुप से योगदान दे रहे हैं।

राजकीय क्षेत्र[संपादित करें]

टीडीआइऍल[संपादित करें]

सूचना पौद्योगिकी विभाग, भारत ने सूचना प्रसंस्करण औजारों तथा तकनीकों के विकास के उद्देश्य से TDIL (Technology Development for Indian Languages) का आरम्भ किया। इसके उद्देश्य थे इंसान-मशीन संवाद को भाषा के बैरियर के बिना प्रोत्साहित करना, बहुभाषी ज्ञान के संसाधन बनाना एवं प्रयोग में लाना, उनको नये उपभोक्ता उत्पाद तथा सेवायें विकसित करने हेतु इण्टीग्रेट करना आदि।

सी-डैक[संपादित करें]

सी-डैक एक भारतीय अर्ध-सरकारी सॉफ्टवेयर कम्पनी है जो कि भारतीय भाषाओं सम्बंधी सॉफ्टवेयर बनाती है। यह इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड लेआउट बनाने के लिये प्रसिद्ध है, जो कि भारतीय भाषाओँ का मानक कीबोर्ड है। इसने कई अन्य भारतीय भाषी उत्पाद एवं सोल्यूशन भी विकसित किये हैं जैसे शब्द संसाधक, टाइपिंग औजार, श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर आदि।

स्वयंसेवक समूह[संपादित करें]

सरोवर[संपादित करें]

सरोवर.ऑर्ग भारत का मुफ्त/मुक्त स्रोत लाइसॅन्स वाली परियोजनाओं को होस्ट करने वाला पहला पोर्टल है। यह तिरुवन्तपुरम में स्थित है। सरोवर.ऑर्ग Linuxense के द्वारा उनकी सामुदायिक सेवाओं के रुप में संशोधित, इंस्टाल तथा प्रबंधित किया जाता है तथा River Valley Technologies द्वारा प्रायोजित किया जाता है। सरोवर.ऑर्ग Debian Etch तथा GForge में बना है तथा METTLE द्वारा संचालित होता है।

पिनाक[संपादित करें]

पिनाक भारतीय भाषाई कम्प्यूटिंग को समर्पित गैर सरकारी चैरीटेबल सोसायटी है। स्थानीय भाषाओं मे कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाने, भाषाई सॉफ्टवेयरों का विकास करने, मुक्त स्रोत सॉफ्टवेयरों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने तथा ऑनलाइन ज्ञानकोशों में सामग्रियां बढाने जैसे कार्य करती है। इसके अलावा पिनाक लोगों को कम्प्यूटिंग का ज्ञान, इण्टरनेट की उपयोगिता का ज्ञान तथा इण्टरनेट पर भारतीय भाषाओं के उपयोग संबंधी जानकारी देने का कार्य कर रही है।

भारतीयओओ.ऑर्ग[संपादित करें]

इनपुट विधियाँ[संपादित करें]

यूनिकोड के उदय के पश्चात कम्प्यूटर पर भारतीय भाषी टैक्स्ट इनपुट करना बहुत आसान हो गया है। इस कार्य हेतु कई विधियाँ उपलब्ध हैं, जिनमें से मुख्य हैं:-

इनस्क्रिप्ट[संपादित करें]

इनस्क्रिप्ट भारतीय भाषाओं हेतु मानक कुञ्जीपटल है। यह सी-डैक के द्वारा विकसित किया गया तथा भारत सरकार द्वारा मानकीकृत किया गया। आजकल यह सभी मुख्य ऑपरेटिंग सिस्टमों में अन्तर्निमित आता है जिनमें विंडोज़ (२०००, ऍक्सपी, विस्ता, ), लिनक्स तथा मॅकिन्तोश शामिल हैं।

ध्वन्यात्मक लिप्यन्तरण[संपादित करें]

यह एक टाइपिंग विधि है जिसमें प्रयोक्ता हिन्दी (अथवा कोई इण्डिक) टैक्स्ट को रोमन में टाइप करता है तथा यह रियल टाइम में समकक्ष देवनागरी (अथवा इण्डिक लिपि) में ध्वन्यात्मक रुप से परिवर्तित हो जाता है। इस प्रकार का स्वचालित परिवर्तन ध्वन्यात्मक टैक्स्ट ऍटीटर, वर्ट प्रोसैसर तथा सॉफ्टवेयर प्लगइन के द्वारा किया जाता है। परन्तु सर्वश्रेष्ठ तरीका फोनेटिक आइऍमई का प्रयोग है जिसकी सहायता से टैक्स्ट किसी भी ऍप्लीकेशन में सीधे ही लिखा जा सकता है।

फोनेटिक ट्राँसिलिट्रेशन आधारित आइऍमई के उदाहरण हैं बरह आइऍमई, इण्डिक आइऍमई, गूगल इण्डिक लिप्यन्तरण आदि।

ये मुख्य रुप से दो प्रकार के होते हैं:-

पहले प्रकार के औजार एक निश्चित लिप्यन्तरण स्कीम के आधार पर टैक्स्ट को भारतीय लिपि में बदलते हैं जबकि दूसरे प्रकार के औजार पहले रोमन में टाइप किये गये शब्द को एक शब्दकोश के साथ तुलना करते हैं और फिर उसे समकक्ष इण्डिक शब्द में बदलते हैं।

रेमिंगटन (टाइपराइटर)[संपादित करें]

यह कीबोर्ड लेआउट तब विकसित किया गया था जब कम्प्यूटरों का आविष्कार नहीं हुआ था या फिर उनमें भारतीय भाषाओं उपलब्ध नहीं थीं तथा भारतीय लिपियों में टाइप करने हेतु टाइपराइटर ही एकमात्र साधन थे। चूंकि टाइपराइटर यान्त्रिक (मैकेनिकल) थे एवं तथा उनमें स्क्रिप्ट प्रोसैसर इञ्जन शामिल नहीं हो सकता था, इसलिये हर चिह्न (वर्ण) को कुञ्जीपटल पर अलग से स्थान देना पड़ा जिसके परिणामस्वरुप काफी कठिन तथा सीखने में मुश्किल कीबोर्ड लेआउट बन गया।

कम्प्यूटर पर काम करने के लिये इनस्क्रिप्ट मानक कीबोर्ड लेआउट बना जो कि रेमिंगटन की तुलना में अत्यन्त सरल है। यूनिकोड के अभ्युदय के साथ, रेमिंगटन लेआउट को विभिन्न सॉफ्टवेयर टाइपिंग औजारों में बैकअप कम्पैटिबिलिटी के तौर पर जोड़ा गया ताकि पुराने टाइपिस्टों को नये कीबोर्ड लेआउट न सीखना पड़े। आजकल यह लेआउट सिर्फ पुराने टाइपिस्टों कें द्वारा प्रयोग जो कि कई व्रषों के अभ्यास के कारण इसके अभ्यस्त हो चुके हैं। इण्डिक आइऍमई एक ऐसा टाइपिंग औजार है जिसमें रेमिंगटन लेआउट सम्मिलित है।

स्थानीकरण[संपादित करें]

स्थानीकरण का अर्थ है सॉफ्टवेयरों, प्रचालन तन्त्रों, वॅबसाइटों आदि विभिन्न ऍप्लीकेशनों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करना। इस दिशा में विभिन्न समूह कार्य कर रहे हैं।

इण्डलिनक्स[संपादित करें]

इण्डलिनक्स एक स्वयंसेवक समूह है जो लिनक्स प्रचालन तन्त्र का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करता है। इस समूह के प्रयासों से लिनक्स हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में लगभग पूरी तरह से स्थानीकृत कर ली गई है। यह समूह सराय नामक संस्था से वितपोषित होता है।

निपुण[संपादित करें]

निपुण एक ऑनलाइन सामूहिक अनुवाद तन्त्र है जो कि विभिन्न ऍप्लीकेशनों के हिन्दीकरण हेतु कार्यरत है। यह अक्षरग्राम नेटवर्क की एक परियोजना है।

इण्डिक ब्लॉगिंग[संपादित करें]

इण्डिक ब्लॉगिंग से अर्थ है इण्डिक अर्थात भारतीय भाषाओं में चिट्ठाकारी। भारतीय भाषाओं में चिट्ठाकारी को प्रोत्साहित करने हेतु विभिन्न प्रयास किये गये हैं।

अक्षरग्राम नेटवर्क[संपादित करें]

अक्षरग्राम नेटवर्क हिन्दी तकनीकिज्ञों का एक स्वयंसेवक समूह है जो कि हिन्दी एवं अन्य भारतीय भाषाओं के कम्प्यूटर तथा इण्टरनेट पर प्रचार-प्रसार के प्रति समर्पित है। यह समूह हिन्दी चिट्ठाकारी को प्रोत्साहित करने हेतु नारद आदि कई वॅबसाइटें तथा सेवायें संचालित करता है।

इण्डीब्लॉगीज[संपादित करें]

इण्डीब्लॉगीज एक भारतीय वॅब्लॉग पुरुस्कार है। यह भारत का पहला (२००३ में स्थापित) तथा खालिस देसी चिट्ठा पुरुस्कार है। पुरुस्कार विजेताओं का चयन भारतीय तथा भारतवंशी चिट्ठाकारों के द्वारा सार्वजनिक रुप से चुने जाते हैं।

इण्डिक प्रोग्रामिंग भाषायें[संपादित करें]

यह भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]