हो (जनजाति)

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हो (जनजाति), भारत की एक प्रमुख जनजाति हैं। 'हो' एक आदिवासी समुदाय है जो भारत के झारखंड राज्य के सिंहभूम जिले तथा पड़ोसी राज्य उड़ीसा के क्योंझर, मयूरभंज, जाजपुर जिलों में निवास करती है।

‘हो’ समुदाय की अपनी संस्कृति और रीति-रिवाज हैं। ये प्रकृति के उपासक होते हैं। इनके अपने-अपने गोत्र के कुल-देवता होते हैं। 'हो' लोग मन्दिर मे स्थापित देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना नहीं करते बल्कि अपने ग्राम देवता ‘देशाउलि’ को अपना सर्वेसर्वा मानते हैं। अन्य अवसरों के अलावा प्रति वर्ष मागे परब के अवसर पर बलि चढ़ा कर ग्राम पुजारी “दिउरी” के द्वारा इसकी पूजा-पाठ की जाती है तथा गाँव के सभी लोग पूजा स्थान पर एकत्रित हो कर ग्राम देवता से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।


भाषा

हो जनजातियों की मुख्य भाषा है , जो आस्ट्रो - एशियाई भाषा परिवार की मुण्डा भाषा परिवार की एक भाषा है उसकी लिपि वारंगचिती [1] है ।

निवास क्षेत्र[संपादित करें]

सामान्य रूप से इनका दैनिक भोजन चावल है,पेय के रूप में डियांग का उपयोग करते है,इसका निर्माण चावल को उबाल कर के उसमें रानू मिला कर जावा किया जाता है इसके उपरांत चार दिनों के बाद यह पेय तैयार होता है इसका उपयोग गर्मियों में लू से बचने के लिये भी किया जाता है। वे खास व्यंजन लेटो मांडी और पोडोम जीलू है वे साग सब्जियाँ , कन्द - मूल और मांस खाते हैं | के सन्दर्भ में लोग जैसे जैसे शहरों में रहने लगे है इनके भोजन में विविधता दिखाई देती है अब ये चावल के साथ साथ गेहूं के उत्पाद भी खाते हैं

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  1. "The Ho Language :: The Warang Chiti Alphabet". www.swarthmore.edu. अभिगमन तिथि 2021-06-02.