मृदु शक्ति

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जोसेफ निये द्वारा लिखित पुस्तक : सॉफ्ट पॉवर

अंतरराष्ट्रीय संबन्धों के सन्दर्भ में, सहयोग तथा किसी प्रकार के आकर्षण के द्वारा वांछित परिणाम प्राप्त करने की क्षमता सौम्य शक्ति या मृदु शक्ति (Soft power) कहलाती है। इसके विपरीत 'कठोर शक्ति' (hard power) उस क्षमता को कहते हैं जो बल (सैन्य बल) द्वारा या धन देकर इच्छित परिणाम प्राप्त करती है।

मृदु शक्ति की अवधारणा हारवर्ड विश्वविद्यालय के जोसेफ निये (Joseph Nye) द्वारा विकसित की गयी। उन्होने 'सॉफ्ट पॉवर' शब्द का प्रयोग सबसे पहले १९९० में लिखित अपनी पुस्तक 'बाउण्ड टू लीड : द चेंजिंग नेचर ऑफ अमेरिकन पॉवर' में किया। उन्होने इसको 'सॉफ्ट पॉवर : द मीन्स तू सक्सेस इन वर्ल्द पॉलिटिक्स' नामक अपनी अगली पुस्तक में और विकसित किया। आजकल इस शब्द का प्रयोग अन्तरराष्ट्रीय सम्बन्धों के सन्दर्भ में बहुत अधिक प्रयुक्त होता है।

सन २०१३ के मोनोकिल सॉफ्ट पॉवर सर्वे के अनुसार जर्मनी सर्वाधिक सौम्य शक्ति (सॉफ्ट पॉवर) वाला देश है।

मृदुशक्ति के रूप में भारत[संपादित करें]

भारत ने अपने सॉफ्ट पॉवर के माध्यम से विश्व समुदाय में सम्मानजनक स्थान प्राप्त किया है। भारत के सॉफ्ट पॉवर के उदाहरण हैं- भारत की आध्यात्मिकता, योग, दर्शन, धर्म आदि के साथ-साथ अहिंसा, लोकतांत्रिक विचार आदि। भारत के पास संगीत, नृत्य, चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, साहित्य, चिकित्सा आदि की व्यापक सांस्कृतिक विरासत है जिसने अनेक देशों को प्रभावित किया है। भारतीय सिनेमा ने लंबे समय तक एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में भारी संख्या में दर्शकों को आकर्षित किया है। भारत द्वारा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर वैश्विक भागीदारी ने भारत की सॉफ्ट पॉवर छवि को मजबूत किया। भारत द्वारा हाल ही में प्रक्षेपित सार्क सेटेलाइट भी भारत की सॉफ्ट पॉवर कूटनीति का हिस्सा है। भारत संयुक्त राष्ट्र के ‘शांति अभियानों’ में अपने सैनिक भेजने वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है।भारत अपने सांस्कृतिक संस्थानों में निवेश बढ़ाकर, पर्यटन, सिनेमा, खेल, कला-संस्कृति आदि को बढ़ावा देकर सॉफ्ट पॉवर की छवि को ओर मजबूत कर सकता है। [1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

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