तुष्टीकरण

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तुष्टीकरण (Appeasement) का मतलब सामान्यतः ऐसी राजनयिक नीति को कहते हैं जो किसी दूसरी शक्ति या पक्ष को इसलिये छूट दे देता है ताकि युद्ध से बचा जा सके। यूरोपीय लोकतांत्रिक देशों ने १९३० के दशक में इस नीति का पालन किया था क्योंकि वे जर्मनी एवं इटली के तानाशाहों से युद्ध करने से बचना चाहते थे।

भारत के परिप्रेक्ष्य में तुष्टीकरण[संपादित करें]

भारत में यह शब्द अल्पसंख्यक वोटबैंक के चक्कर में कुछ समूहों को लुभाने वाले वादे एवं नीतियों के लिये भी प्रयुक्त किया जाता है।[1]

भीमराव अम्बेडकर की दृष्टी में[संपादित करें]

अम्बेडकर के अनुसार कुछ वर्ग मौके का फायदा लेकर अपने स्वार्थ के लिए अवैधानिक मार्ग अपनाते हैं। शासन इस संबंध में उनकी सहायता करता हे इसे अल्पसंख्यक तुष्टिकरण कहते हे | बाबा साहेब के अनुसार इस निति में अतिक्रमणकारी लोगों को खरीदना, उनके अनैतिक कार्यों में सहायता करना और उनके अत्याचारों से अजीज लोगों की उपेक्षा करना ही तुष्टिकरण कहलाता हे |अम्बेडकर ऐसी निति के हमेशा विरोधी रहे हे |

भारत वर्ष के दलितो पीछडो के उद्धारक अम्बेडकर साहब ने तुष्टीकरण को हमेशा राष्ट्र विरोधी बताया[2]| प्रमुख राजनैतिक पार्टी कांग्रेस पर हमेशा से ही मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगता रहा |[3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]