महावीर जन्म कल्याणक

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तीर्थंकर महावीर जन्म कल्याणक
चौबीसवें जैन तीर्थंकर, भगवान महावीर का जन्म कल्याणक
Vardhaman Keezhakuyilkudi.jpg

तीर्थंकर महावीर की प्रतिमा, मदुराई, तमिलनाडु, भारत
विवरण
अन्य नाम महावीर स्वामी जन्म कल्याणक, वर्धमान स्वामी जन्म कल्याणक
तिथि
वीर निर्वाण संवत चैत्र सुद १३
ग्रेगोरियन ०६ अप्रैल २०२० (२,६१९ वाँ जन्मोत्सव)

महावीर स्वामी जन्म कल्याणक चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (१३) को मनाया जाता है। यह पर्व जैन धर्म के २४वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक के उपलक्ष में मनाया जाता है। यह जैनों का सबसे प्रमुख पर्व है।

जन्म[संपादित करें]

भगवान महावीर स्वामी का जन्म ईसा से ५९९ वर्ष पूर्व कुंडग्राम (बिहार), भारत मे हुआ था। वर्तमान में वैशाली (बिहार) के वासोकुण्ड को यह स्थान माना जाता है। २३वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 188 वर्ष बाद इनका जन्म हुआ था।[1] जैन ग्रन्थों के अनुसार जन्म के बाद देवों के मुखिया, इन्द्र ने सुमेरु पर्वंत पर ले जाकर बालक का क्षीर सागर के जल से अभिषेक कर नगर में आया। वीर और श्रीवर्घमान यह दो नाम रखे और उत्सव किया।[1] इसे ही जन्म कल्याणक कहते है। हर तीर्थंकर के जीवन में पंचकल्याणक मनाए जाते है। गर्भ अवतरण के समय तीर्थंकर महावीर की माता त्रिशला ने १६ शुभ स्वप्न देखे थे जिनका फल राजा सिद्धार्थ ने बताया था।[1] यदि बात की जाए पाखंड मत की तो सबसे ज़्यादा पाखंड मत हमें जैन धर्म में देखने को मिलते है, इसका प्रमाण जैन धर्म की एक पुस्तक "आओ जैन धर्म को जाने" में मिलता है, जिसमें स्पष्ट लिखा है की महावीर जैन जी ने अपने काल में 363 पाखंड मत चलाए जो कि आज तक जैन धर्म में प्रचलित है।[2]

दस अतिशय[संपादित करें]

जैन ग्रंथों के अनुसार तीर्थंकर भगवान के जन्म से ही दस अतिशय होते है।[3] यह हैं:

  1. पसीना न आना
  2. निर्मल देह
  3. दूध की तरह सफ़ेद रक्त
  4. अद्भुत रूपवान शरीर
  5. सुगंध युक्त शारीर
  6. उत्तम संस्थान (शारीरिक संरचना)
  7. उत्तम सहनन
  8. सर्व 1008 सुलक्षण युक्त शरीर
  9. अतुल बल
  10. प्रियहित वाणी

यह अतिशय उनके द्वारा पूर्व जन्म में किये गए तपश्चर्ण के फल स्वरुप प्रकट होते है।[4]

उत्सव[संपादित करें]

इस महोत्सव पर जैन मंदिरों को विशेष रूप से सजाया जाता है। भारत में कई जगहों पर जैन समुदाय द्वारा अहिंसा रैली निकाली जाती है। इस अवसर पर गरीब एवं जरुरतमंदों को दान दिया जाता है।[5] कई राज्य सरकारों द्वारा मांस एवं मदिरा की दुकाने बंद रखने के निर्देश दिए जाते हैं।[6][7] भारत राज्य में राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. जैन २०१५.
  2. "Mahavir Jayanti In Hindi: महावीर जी के तीन सौ तरेसठ पाखंड मत और उनकी मृत्यु". S A NEWS (अंग्रेज़ी में). 2021-04-24. अभिगमन तिथि 2021-04-24.
  3. Pramansagar 2008, पृ॰ 22-24.
  4. Pramansagar 2008, पृ॰ 23-24.
  5.  http://www.dnaindia.com/mumbai/report-jains-gear-up-for-mahavir-jayanti-tomorrow-2073618  Archived 2015-04-02 at the Wayback Machine
  6.  http://www.pressnote.in/Jaisalmer-News-_266079.html  Archived 2015-04-02 at the Wayback Machine
  7. "महावीर जयंती कब है? महावीर जयंती का इतिहास | कैसे मनाई जाती है महावीर जयंती?". अभिगमन तिथि 2020-05-31.

सन्दर्भ सूची[संपादित करें]