बीटा क्षय

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
नाभिकीय भौतिकी
CNO Cycle.svg
रेडियोधर्मी विनाश
रेडियोधर्मी विखंडन
रेडियोधर्मी संलयन
इस संदूक को: देखें  संवाद  संपादन

नाभिकीय भौतिकी में, बीटा क्षय (बीटा-डीके) एक प्रकार का रेडियोधर्मी क्षय होता है, जिसमें बीटा कण (एक विद्युदणु (इलेक्ट्रॉन) या एक धनाणु (पॉज़िट्रॉन)) उत्सर्जित होते हैं। यह दो प्रकार का होता है। विद्युदणु उत्सर्जन होने पर, इसे बीटा-ऋण (β) कहते हैं, जबकि धनाणु उत्सर्जन होने पर इसे बीटा धन (β+) कहते हैं। बीटा कणों की गतिज ऊर्जा लगातार वर्णक्रम की होती है और इसका परास शून्य से अधिकतम उपलब्ध ऊर्जा तक होता है।

कार्बन-14 का क्षय होकर नाइट्रोजन-14 में बदलना इलेक्ट्रॉन क्षय (electron emission या β क्षय) का उदाहरण है। इसी प्रकार, मैगनीशियम-23 का क्षय होकर सोडियम-23 में परिवर्तन पॉजिट्रॉन-क्षय या β+ क्षय का उदाहरण है।

नीचे दो अन्य उदाहरण दिये गये हैं-

\mathrm{{}^1{}^{37}_{55}Cs}\rightarrow\mathrm{{}^1{}^{37}_{56}Ba}+ e^- + \bar{\nu}_e (beta minus),
\mathrm{~^{22}_{11}Na}\rightarrow\mathrm{~^{22}_{10}Ne} + e^+ + {\nu}_e (beta plus)

बीटा-क्षय का सामान्य सूत्र-

{}^{A}_{Z}\hbox{X}\;\to\;^{A}_{Z-1}\hbox{Y}\;+\;{e^+}+{\nu}_e

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]