निरुपमा राव

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निरुपमा मेनन राव
Nirupama Rao

निरुपमा राव


कार्यकाल
1 अगस्त 2011 – 5 नवम्बर 2013
पूर्व अधिकारी मीरा शंकर
उत्तराधिकारी एस॰ जयशंकर

कार्यकाल
31 जुलाई 2009 – 31 जुलाई 2011
पूर्व अधिकारी शिवशंकर मेनन
उत्तराधिकारी रंजन मथाई

जन्म 6 दिसम्बर 1950 (1950-12-06) (आयु 68)
मलप्पुरम, केरल, भारत
राष्ट्रीयता भारतीय
व्यवसाय राजनयिक दूत

निरुपमा मेनन राव (जन्म 6 दिसम्बर 1950) भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की एक अधिकारी हैं, जिन्होने 31 जुलाई 2009 से 31 जुलाई 2011 तक विदेश मंत्रालय में भारतीय विदेश सचिव के रूप में कार्य कर चुकी हैं। भारतीय विदेश सेवा का इस सर्वोच्च पद पर पहुँचने वाली चोकिला अय्यर के बाद वे दूसरी महिला हैं। वे 1 अगस्त 2011 से 5 नवम्बर 2013 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत की राजदूत रह चुकी हैं।[1]

अपने करियर में वे कई पदों पर कार्य कर चुकी हैं जिनमे शामिल हैं - वॉशिंगटन में प्रेस मामलों की मंत्री, मास्को में मिशन की उप प्रमुख, विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया), (बाहरी प्रचार) जिसने उन्हें विदेश मंत्रालय की पहली महिला प्रवक्ता बनाया, कार्मिक प्रमुख, पेरू और चीन की राजदूत और श्रीलंका की उच्चायुक्त.[2][3]

प्रारंभिक जीवन[संपादित करें]

निरुपमा राव का जन्म मलप्पुरम, केरल में मीमपाट थरवाड़ में हुआ था। उनके पिता सेना में थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई बेंगलोर, पुणे, लखनऊ, कून्नूर जैसे विभिन्न शहरों से की। उन्होंने बेंगलोर के माउंट कारमेल कॉलेज से 1970 में अपना बीए (अंग्रेज़ी) ऑनर्स से किया था;[4] जब यह कॉलेज मैसूर विश्वविद्यालय से संबद्ध था। बाद में, उन्होंने महाराष्ट्र में उस समय मराठवाड़ा विश्वविद्यालय के नाम से जाने जानेवाले विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में परास्नातक डिग्री प्राप्त की। उन्होने 1973 में अखिल भारतीय नागरिक सेवा परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया और भारतीय विदेश सेवा से जुड़ गईं। [3]

करियर[संपादित करें]

निरुपमा राव ने भारतीय विदेश सेवा के 1973 बैच में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था। भारत में अपना प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद उन्होंने सत्तर के दशक के मध्य में वियना (ऑस्ट्रिया) के भारतीय दूतावास में काम किया। उन्होंने 1981-83 तक श्रीलंका के भारतीय उच्चायोग में प्रथम सचिव के रूप में कार्य किया। विदेश मंत्रालय में अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान, उन्होंने भारत-चीन संबंधों पर विशेषज्ञता हासिल की और प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा दिसंबर 1988 में बीजिंग की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के दौरान वे शिष्टमंडल की सदस्य भी रही थीं।

राव 1992-93 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मामलों के वेदरहेड केंद्र में एक सहयोगी (फेलो) थीं, जहां उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर विशेषज्ञता हासिल की।

उन्होंने वाशिंगटन और मास्को के भारतीय दूतावासों में क्रमशः मंत्री और मिशन उप-प्रमुख के रूप में कार्य किया। पहली बार एक राजदूत के रूप में उन्हें 1995-1998 के बीच पेरू और बोलीविया की संयुक्त जिम्मेदारी दी गयी। 2001 में वे विदेश मंत्रालय की पहली महिला प्रवक्ता बनीं। 2004 में उन्हें भारत के उच्चायुक्त के रूप में श्रीलंका में नियुक्त किया गया। 2006 में वे चीन में भारत की पहली महिला राजदूत बनीं। 1 अगस्त 2009 को वे शिवशंकर मेनन की जगह भारत की विदेश सचिव बनीं।

21 दिसम्बर 2010 को भारत सरकार ने भारत के विदेश सचिव के रूप में निरुपमा राव के कार्यकाल को 31 जुलाई 2011 तक के लिए बढ़ा दिया। [5]

लेखन करियर[संपादित करें]

उन्होने 'रेन राइजिंग' नामक एक कविता की किताब लिखी है।[6] उनकी कविताओं का चीनी और रूसी भाषा में अनुवाद किया गया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]