नारनौल

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नारनौल
—  शहर  —
निर्देशांक: (निर्देशांक ढूँढें)
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य हरियाणा
महापौर
सांसद


नारनौल हरियाणा प्रान्त का एक शहर है। यह महेंद्रगढ़ जिले का मुख्यालय है।

नारनौल का इतिहास[संपादित करें]

नारनौल के इतिहास और नामकरण को लेकर कोई प्रमाणीक तथ्य नही मिलते, इसलिए विद्वान एकमत नही है, लेकिन यह एक एतहासिक नगर है, इस बात से सभी इतफाक रखते है। इसकी स्थापना और नामकरण को लेकर अनेक किवदंतयां और गाथाएं प्रचत है।

यहाँ के प्राचीन सूयानारायण मंदिर मे मिले एक शिलालेख मे इसका नामोलेख नंदिग्राम् के रूप मे किया गया है| भागवत पुराण मे भी नंदिग्राम् का जिक्र है| इसलिए इस नगर को द्वापर कालिन कहा जाता है।

पौराणीक गाथाओं के अनुसार नारनौल नगर महाभारत काल नरराश्ट्र् के रूप मे जाना जाता था। यह भी प्रचलित है कि यह इलाका पहले भारजंगल से ढका हुआ था और शेरो का ठिकाना था| जंगल साफ़ करके यहाँ नगर बसाया गया इसलिए इसका नाम नाहर नौल रखा गया जो कालांतर मे नारनौल हो गया।

एक मान्यता यह भी है कि करीब एक हजार वषपूर्व दिल्ली के शासक अनंगपाल तंवर के रिस्तेदार राजा नूनकरण ने इस नगर को आबाद किया।

राजा नूनकरण के समय नारनौल एक व्यापारिक केन्द्र् के रूप मे जाना जाता था| मुग़ल बादशाह बाबर ने अपनी पुतक 'तुजके बाबर' मे यहाँ कपास मंडी होने का उल्लेख किया है| जिससे यह जाहिर होता है कि यहाँ कपास कि खेती होती थी| बाबर ने यहाँ के बाजारो का चर्चा गुदड़ी के नाम से किया है।

बारहवीं शताब्दि के पहले दो दशक तक यहाँ राजपूतो का हशासन रहा 12वीं शताब्दि के तीसरे दशक मे मुस्लिम संत हजरत तुर्कमान यहाँ आया और उसके साथ ही मुसलमानो का यहाँ प्रभाव बढ़ने लगा आखिर नारनौल मुस्लिम के आधिपत्य मे आ गया।

पंद्र्हवीं शताब्दि के नारनौल मुगलो के हाथो से निकल कर सूर अफगानो के नियंत्रण मे आ गया सबसे पहले शेरशाह सूरी के दादा इब्राहिम खान यहाँ आये उन्हे फिरोज़-ए-हिसार के शासक ने नारनौल और इसके आसपास का क्षेत्र दिया था इब्राहिम सूर का मकबरा आज भी नारनौल मे मौजूद है और नारनौल के सभी स्मारको से बेहतर स्थिति मे है इब्राहिम सूर की मौत के बाद उसका बेटा और शेरशाह सूर का पिता हसनखान नारनौल का जागीरदार बना इतहासकार वी.स्मिथ के अनुसार शेरशाह का जन्म भी नारनौल मे हुआ था

पानीपत कि दूसरी लड़ाई के बाद यह इलाका अकबर के नियंत्रण मे था और उसने सम्राट हेमू को गिरफ्तार करने के इनाम के तौर पर इसे शाह कुल खान को दे दिया इस प्रकार शाह्कुली खान यहाँ का जागीरदार बना जिसने नारनौल मे जलमहल का नमाण करवाया अकबर के शासनकाल मे हयहाँ राय बालमुकुन्द के छत्ते का निर्माण हुआ जिसे बीरबल का छत्ता के नाम से जाना जाता है

अकबर के ज़माने मे नारनौल मे सिक्के बनाने की टकसाल भी स्थापित की गई थी, जिसका कामकाज देखने के लिए राजा टोडरमल भी यहाँ आते-जाते थे

औरंगजेब के शासन तक यहाँ अमन और शान्ति थी, किन्तु औरंगजेब के शासन मे यहाँ कि हिन्दू प्रजा पर मुस्लिम जागीरदारो ने ज्यादतियां करनी शुरु कर दि तो यहाँ के सतनामियो ने बगावत कर दी शीघ्र ही यहाँ की जनता हिन्दू-मुस्लिम दो खेमो मे बंट गई और यहाँ के मुस्लिम फौजदार ताहिर बेग को विद्रोहियो ने मारकर नगर पर कब्जा कर लिया

किसी लोक कवि का यह दोहा इसकि पुष्टि करता है- सतनामी सत से लडे, ले हाथो मे तेग नारनौल के गौरवे, मारयो ताहिर बेग

औरंगजेब कि मौत के बाद नारनौल पर जयपुर के राजपूतो ने कब्ज़ा कर लिया लेकिन वह अधिक दिन नहि रह सके फ्रान्सीसी जनरल डे-बोएगेन ने उन्हे हरा दिया कुछ ही समय मे एक बार फिर मुसलामानो का नारनौल पर आधिपत्य हो गया जब मुर्तजा खान बडैच यहाँ के जागीरदार बने कालान्तर मे उनके वारिस अब्दुल रहमान का यहाँ नियंत्रण रहा अब्दुल रहमान झज्जर के नवाब थे जिन्होने 1857 मे ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह मे भाग लिया था प्रथम स्वतन्त्रता सन्ग्राम के बाद अंग्रेजो ने नारनौल पटियाला के राजा नरेन्द्र सिहं को दे दिया नरेन्द्र सिहं ने इस युद्ध मे ब्रिटिश सेना की मदद की थी|

यहां सुभाष पार्क जहां चोर गुंबद बना है काफी दर्शनीय है।

परिवहन[संपादित करें]

रेल परिवहन नारनौल में रेल परिवहन की अच्छी सुविधा है| यहाँ से सबसे नजदीक रेलवे जंक्शन रेवाड़ी है| नारनौल से निकलने वाली ट्रेन की सूची में लगभग 12 ट्रेन है|

सन्दर्भ[संपादित करें]

नारनौल ऐक ेऐतिहासिक स्थल है।

इसे अकबर के दरबारी नवरत्न बीरबल की जन्मभूमि के रूप में भी जाना जाता हैं । इसी कारण नारनौल में स्थित छत्ते को बीरबल का छत्ता कहा जाता है । जो वर्तमान समय मे राज्य सरकार के द्वारा कारणवश प्रवेश वर्जित हैै।

नारनौल मे दर्शनीय स्थल जल महल भी है यह भी एक प्रचीन स्थान है। जिसका निर्माण बीरबल द्वारा करवाया गया है।

नारनौल में ही नारनौल के मुख्य बस स्टैंड से लगबग 7 किलोमीटर की दूरी पर सिंघाना झुंझुनूं रोड पर हनुमान जी का भव्य मंदिर बना हुआ है जो बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर को हनुमान खालड़ा मंदिर के नाम से जाना जाता है।