तुलु नाडु

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तुलु नाडु जिसे तुलुनाड के नाम से भी जाना भारत के दक्षिण पश्चिमी तट पर स्थित क्षेत्र हैं I इस राज्य में तुलू भाषा बोली जाति हैं जिसके अलावा कन्नड़ भाषा और मलयालम भाषा इधर बोली जाति हैं I येह कर्नाटक के दक्षिण कन्नड जिले के कई जगहओ के हिस्से से बन हे I भारत के राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के नेत्र में तुलु नाडु एक भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश नही हैं लेकिन तुलूवा जो तुलु नाडु में रेहने वाले निवासी इस पर हरताल और विरोध कर रहे हैं जिसे "जय तुलुनाड" के नाम से भी जाना भी जाता हैं

एतिहासिक दृष्टि[संपादित करें]

दूसरी शताब्दी के भूगोलवेत्ता ने तुलु नाडु क्षेत्र की पहचान ओलोखिरा के रूप में की है, जिसे व्यापक रूप से अल्वा खेड़ा, 'अलवास की भूमि' शब्द का भ्रष्टाचार माना जाता है। [२] ऐतिहासिक रूप से, तुलु नाडु में हाइवा और तुलुवा की दो अलग-अलग भूमि शामिल थीं। तुलु नाडु का सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला और सबसे पुराना ज्ञात राजवंश अलूपस (सी। 5 वीं - 14 वीं शताब्दी ई।) था। उनके राज्य को अलवाखेड़ा के नाम से भी जाना जाता था। उन्होंने शुरू में स्वतंत्र रूप से शासन किया और बाद में प्रमुख राजवंशों के सामंत थे। बनवासी का कदंब वंश सबसे प्राचीन था, जिसके तहत अलूपस का विकास हुआ बाद में मन्याखेत के राष्ट्रकूट, बादामी के चालुक्य, कल्याणी के चालुक्य, द्वारसमुद्र के होयसल (हलीबिदु) और विजयनगर के रैस अधिपति थे। अलूपस, हालांकि, स्वतंत्र थे और उनकी अधीनता सबसे अच्छा नाममात्र थी। उन्होंने विजयनगर साम्राज्य को 14 वीं से 17 वीं शताब्दी तक तुलु नाडु पर शासन करने तक शासन किया।एतिहासिक दृष्टि से तुलु नाड कि स्थापना कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के गन्गावली नदी के पास स्थित हैं I येह विजयनगर साम्राज्य का जन्म्स्थल हैं , और इसे मन्गलोरे और बिकुर के राज्य मे परिवर्तित किया I प्रस्तुत तुलु नाडु क्षेत्र कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिल्ला और केरल के कासरगोड जिला से बनाया गाया हैं I १८ सदि में हैदर अली जो मैसूर साम्राज्य के सुल्तान थे उन्होने तुलु नाडु को अपने राज्य क भाग बनाया एवं तुलु नाडु टीपू सुल्तान को ब्रिटिश राज से युध के लिये काम आयी I तीपु सुल्तान के मृत्यु के बाद अन्ग्रेजो ने तुलु नाडु को हासिल किया I पोर्तुगी ने एस राज्य को Misao do Sul के नाम से बुलया

कासरगोड केरल के नवगठित राज्य का हिस्सा बन गया। तुलुव ने तुलु के लिए आधिकारिक भाषा का दर्जा और अपने लिए तुलु नाडु नामक एक अलग राज्य की मांग शुरू कर दी। तुलु राजा होरता समिति जैसे संगठनों ने तुलुवाओं का कारण लिया है और मंगलौर और उडुपी जैसे शहरों में उनकी मांग को पूरा करने के लिए बैठकें और प्रदर्शन किए गए

भाषा[संपादित करें]

यहा तुलु भाषा ज्यादा बोली जाति हैं जो द्रविड़ भाषा-परिवार क हिस्सा हैं I तुलु के अलावा इधर मलयालम , कन्नड़, कोंकणी, कोरगा और ब्यारी बोली जाती हैं I

जलवायु एवं भूगोल[संपादित करें]

तुलु नाडु क मौसम उष्णकटिबंध होता हैं, येह पश्चिम में अरब सागर से सिमा को छूता हैं और पूर्व में पश्चिमी घाट में आता हैं I येह राज्य 8,441 km2 के शेत्र में फ़ैला हुअ हैं जो 4.4% कर्नाटक राज्य और केरल की उत्तरी जिले कासरगोड का भी भाग हैं I

उडुपी जिसे कर्नाटक का मछुआरो का शेहर हैं वह तुलु नाडु का तीसरा बद शेहार हैं I

जनसंख्या[संपादित करें]

भारत की 2001 की जनगणना के अनुसार, इस क्षेत्र की जनसंख्या 3,005,898 थी