जनता दल (यूनाइटेड)

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जनता दल (यूनाइटेड)
Janata Dal (United) Flag.svg
भा नि आ स्थिति राज्य स्तरीय पार्टी[1]
नेता नीतीश कुमार
महासचिव के.सी. त्यागी
नेता लोकसभा कौशलेंद्र कुमार
नेता राज्यसभा शरद यादव
गठन 30 अक्टूबर 2003 (2003-10-30) (13 वर्ष पहले)
मुख्यालय 7, जंतर मंतर रोड, नई दिल्ली, भारत-110001
गठबंधन राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) (2003–2013)(2017-)
लोकसभा मे सीटों की संख्या
2 / 545
राज्यसभा मे सीटों की संख्या
10 / 245
विचारधारा धर्मनिरपेक्षता
समाजवाद
जालस्थल [1]
Election symbol
भारत की राजनीति
राजनैतिक दल
चुनाव


जनता दल (यूनाइटेड) भारत का एक राजनीतिक दल है। इस राजनीतिक दल की उपस्थिति मुख्य रूप से बिहार और झारखंड में है।.[2] जनता दल (यूनाइटेड) का गठन 30 अक्टूबर 2003 को जनता दल के शरद यादव गुट, लोकशक्ति पार्टी और समता पार्टी के विलय के बाद किया गया। जेडी(यू) अब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में गठित राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का घटक दल है।

इतिहास[संपादित करें]

गठन[संपादित करें]

1999 के आम चुनाव में कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री जे.एच पटेल के नेतृत्व में जनता दल के एक गुट ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन दे दिया। इसके बाद जनता दल दो हिस्सों में बंट गया। पहले धड़े ने एच.डी.देवेगौड़ा के नेतृत्व में जनता दल (सेक्यूलर) के रूप में खिद को अलग कर लिया जबकि दूसरा धड़ा शरद यादव के नेतृत्व में अस्तित्व में आया। बाद में जनता दल का शरद यादव गुट, लोकशक्ति पार्टी और समता पार्टी पास आए और 30 अक्टूबर 2003 को आपस में विलय कर जनता दल (यूनाइटेड) नाम से एक नई पार्टी का गठन किया। इस दल का चुनाव-चिह्न तीर और झंडा हरे-सफेद रंग का पंजीकृत हुआ।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल[संपादित करें]

बाद के दिनों में जेडीयू राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल हो गई जिसके बाद जेडीयू और बीजेपी गठबंधन ने 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व में संयुक्त पर्गतिशील गठबंधन की सरकार को हरा दिया। बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। 2009 के लोकसभा चुनाव में इस गठबंधन कोे बिहार में 32 सीटें मिली। जिनमें बीजेपी को 12 सीटों पर सफलता मिली जबकि जेडीयू को 20 सीटों पर जीत हासिल हुई। तो वहीं 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू को 115 सीटें और बीजेपी को 91 सीटें प्राप्त हुईं। इस प्रकार दोनों दलों को 243 सदस्य संख्या वाले बिहार विधानसभा में कुल 206 सीटों पर सफलती मिली और एक बार फिर से सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में बन गई।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से बाहर[संपादित करें]

2014 के आम चुनाव में बीजेपी द्वारा नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार कमेटी का प्रमुख बनाए जाने के विरोध में जेडीयू ने बिहार में बीजेपी के साथ 17 साल पुराने अपने गठबंधन को समाप्त कर दिया। इसके बाद शरद यादव ने एनडीए के संयोजक का पद छोड़ दिया। लोक सभा चुनाव मनें जेडीयू ने भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा लेकिन उसे उस चुनाव में बिहार की कुल चालीस लोक सभा सीटों में से सिर्फ दो सीटों पर ही सफलता मिल पाई। तो वहीं बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को 32 सीटों पर सफलता मिली। लोक सभा चुनाव में मिली असफलता के बाद नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया और जीतन राम मांझी नए मुख्यमंत्री बने। जब बीजेपी ने इस सरकार से सदन में बहुमत सिद्ध करने की मांग की तो आरजेडी ने जेडीयू का समर्थन कर इस सरकार को गिरने से बचाया।

महागठबंधन[संपादित करें]

14 अप्रैल 2015 को जेडीयू, राष्ट्रीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, समाजवादी जनता पार्टी और इंडियन नेशनल लोकदल के नेताओं ने घोषणा की कि वो संप्रग(यूपीए) से बाहर जनता परिवार गठजोड़ बनाकर बीजेपी का विरोध करेंगे। लेकिन सीटों के तालमेल को लेकर बात नहीं बन पाई समाजवादी पार्टी ने इस गठजोड़ से इनकार कर दिया। 2014 के लोकसभा में मिली असफलता के बाद जेडीयू और आरजेडी करीब आए 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस ने मिलकर एनडीए के खिलाफ महागठबंधन का ऐलान किया। चुनाव में इस गठबंधन को 178 सीटों पर सफलता मिली और नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में वापसी[संपादित करें]

26 जुलाई 207 को नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देते हुए 20 महीने पुराने महागठबंधन के अंत का ऐलान कर दिया। अगले ही दिन उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से फिर बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ गहण कर लिया। 28 जुलाई 2017 को बिहार की एनडीए सरकार ने बिधान सभा में 108 के मुकाबले 131 वोटों के जरिए अपना बहुमत सिद्ध कर लिया।

प्रमुख नेता[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]