चमार

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चमार
कुल जनसंख्या

१.१ %

ख़ास आवास क्षेत्र
भारत • पाकिस्तान
भाषाएँ
हिन्दी, बंगाली, मराठी, पंजाबी, उर्दू आदि
अन्य सम्बंधित समूह
रामदासिया, रविदासिया, जुलाहा, आदि

चमार अथवा चर्मकार भारतीय उपमहाद्वीप में पाई जाने वाली जाति समूह है। वर्तमान समय में यह जाति अनुसूचित जातियों की श्रेणी में आती है। यह जाति अस्पृश्यता की कुप्रथा का शिकार भी रही है। इस जाति के लोग परंपरागत रूप से चमड़े के व्यवसाय से जुड़े रहे हैं। संपूर्ण भारत में चमार जाति अनुसूचित जातियों में अधिक संख्या में पाई जाने वाली जाति है, जिनका मुख्य व्यवसाय, चमड़े की वस्‍तु बनाना था । संविधान बनने से पूर्व तक इनकोअछूतों की श्रेणी में रखा जाता था। अंग्रेजों के आने से पहले तक भारत में चमार जाति के लोग बहुत धनवान थे परन्तु चमड़े का कार्य करने से छूआछूत के शिकार थे । आजादी के बाद इनके साथ हो रहे छूआछूत को रोकने के लिए इनको भारत के संविधान में अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा गया तथा सभी तरह के ज़ुल्‍मों तथा छूआछूत को प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके बावजूद भी देश में कुछ जगहों पर इन जातियों तथा अन्‍य अनुसूचित जातियों के साथ छूआछूत आज भी होती हैं। छूआछूत के कारण इस जाति ने चमड़े का कार्य करना बन्द कर दिया और आज इनका चमड़े का उधोग अन्य समुदाय के लोगों ने अपना लिया है चमड़े के कार्य कार्य का नाम आज कल लेदर इनडस्टी के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है। ये चमड़े का कार्य करने में धर्म का पूर्णतः पालन करते अर्थात किसी भी जानवरों को मारते नहीं सिर्फ मरे हुए जानवरों को ही चमड़े को उपयोग में लाते थे।

चमार नहीं चवरसेन वंश के राजपूत[संपादित करें]

सनातन हिन्दू धर्म जिसे वैदिक धर्म अथवा हिन्दू धर्म कहा जाता है जहां वैदिक काल मे वर्ण 
व्यवस्था थी कोई जाती नहीं थी कर्म के अनुसार कोई भी ब्राह्मण अनुसार शूद्र तथा कोई भी शूद्र कर्म से ब्राह्मण हो सकता था, एक समय था जब राजा नहीं था न राज्य था न कोई अपराध करता था न कोई दंड देने वाला था ऐसा हमारा पुरातन वैदिक काल था, महाभारत के पश्चात भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा कि भीष्म पितामह मृत सईया पर पड़े हैं उनसे उपदेश लेना चाहिए, भगवान कृष्ण सहित युधिष्ठिर वहाँ गये उन्होंने पितामह से पूछा कि हे पितामह जब राज्य नहीं था कोई राजा नहीं था तो समाज की व्यवस्था कैसे चलती थी पितामह ने उत्तर दिया हे पुत्र—
         "न राज्यम न राजाषित न दंडों न दंडिका"
 उस समय न कोई राजा था न ही कोई दंड देने वाला था क्योंकि कोई अपराधी नहीं था, ऐसा समय वैदिक काल था, ऐसी समाज रचना हमारे पूर्वजों चमार ने बनाई थी गाँव के सभी आपस मे बहन-भाई के रूप मे रहते थे सभी एक दूसरे को चाचा-चाची, दादा-दादी एक परिवार जैसा गाँव, जिसमे कोई गलत दृष्टि नहीं कोई अराजकता नहीं सभी एक दूसरे के सहायक आदर करते थे आपस मे अपनत्व का भाव था ऐसे समाज की रचना।

महाभारत प्रमाण[संपादित करें]

लेकिन समय बदला जो समाज पुरातन हो जाता है बिकृति आना स्वाभाविक ही है जबकि हिन्दू समाज मे हमेशा परिमार्जित करने की ब्यवस्था थी इसके बावजूद जो समाज के रक्षक थे धर्मबीर थे उन्हे षणयंत्र करके पददलित किया गया वे उपेक्षा के शिकार हुए विदेशियों ने बड़ी ही योजना पूर्बक उन्हे हिन्दू समाज से काटने का काम किया हिन्दू समाज समझ नहीं पाया हमारे ग्रंथो मे इस्लामिक काल मे क्षेपक डालकर भ्रमित किया गया, हिन्दू राजवंश परंपरा मे प्रतिष्ठित चँवरवंश के बारे मे विदेशी विद्वान कर्नल टाड ने अपनी पुस्तक 'राजस्थान का इतिहास' मे विस्तार से उल्लेख किया है इस वंश का उल्लेख महाभारत के अनुशासन पर्व मे मिलता है इससे स्वतः सिद्ध हो जाता है की चँवरवंश अन्य सभी हिन्दू राजवंश से प्राचीन और महाभारत कालीन एक प्रतिष्ठित राजवंश था चँवर वंश के राजा यदि सत्ता मे न होते तो वे महाभारत के युद्ध मे भाग लेने के लिए सादर आमंत्रित न किए जाते, इसका प्रमाण स्वतः महाभारत है, चमरसेन वंश जिस परिवार के लड़की का विबाह सूर्यवंश सिसौदिया कुल मेवाण के महाराजा बाप्पा रावल के साथ हुआ हो वह वंश कैसे अछूत हो सकता है यह सोध का विषय है ।

सामाजिक स्थिति[संपादित करें]

भारत में सभी सुसंगठित पंचायतों से 150 से अधिक चमार जाति की उपजातियों की पहचान होती है, जिनमे जाटव, कुरील, संखवार, दोहरे, ततवा, मोची, जाटव आदि। चूंकि उनका कार्य उन्हें चमड़े से निर्मित वस्तुओ का व्यापार करने था लेकिन अब शिक्षा के कारण और तीव्र बुद्धि के बल पर इन्होने शासन प्रशासन हर जगह मजबूत स्थिति बनाई है। आज भी भारत में ब्राह्मण के बाद सर्वाधिक अखिल भारतीय सेवाओं में चमार जाति से है , मध्य काल में चमार एक अपवित्र जाति के रूप में पहचान के कलंक से पीड़ित हुये हैं। सामान्यत: उनका निवास हिन्दू जाति के गावों में होता है। प्रत्येक बस्ती का एक मुखिया (प्रधान) होता है और बड़े शहरों में प्रधान की अध्यक्षता में ऐसे एक से अधिक समुदाय होते हैं। आज भी कई लोग चमड़े के व्यापार व अन्य परंपरागत व्यवसाय कराते हैं और बहुत से लोग खेतिहर मजदूर हैं।[1][2][3] इस जाति को भारतीय संविधान द्वारा अनुसूचित जाति की श्रेणी में रखा गया है।

रीति रिवाज[संपादित करें]

इस जाति के लोग सामाजिक होते हैं। अस्पृश्यता या छुआ छुत नहीं मानते हैं और अपने धार्मिक अनुष्ठान स्वयं करते हैं, इस जाति में विधवा को उसी उपजाति के किसी विधुर से पुनर्विवाह की अनुमति है। इस जाति का एक बड़ा हिस्सा भगवान गौतम बुद्ध और सन्त रविदास की शिक्षा का पालन करता है और उनका उद्देश्य अपनी सामाजिक स्थिति को ऊपर उठाने के लिए अपने रीति-रिवाजों का शुद्धिकरण करना है। डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर इनके मुख्य आदर्श हैं।[4] डॉ बाबा साहेब अम्बेडकर के बारे में जितना विदेशों में लोग जानते है उतना भारत के लोग नहीं जान पाए है जिस दिन बाबा साहेब को लोग जानने लगेंगे उस दिन भारत के लोग असली विकास करेंगे

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

2001 की जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में चमारों की लगभग 16 प्रतिशत आबादी शामिल है।[5] पंजाब में 14% और हरियाणा में लगभग 12% जनसंख्या में चमार हैं।[6]

2001 तक भारत में राज्यवार चमारों की आबादी का विवरण
राज्य जनसंख्या राज्यवर जनसंख्या का औसत अन्य विवरण
पश्चिम बंगाल [7] 999,756 1.25%
बिहार [8] 4,090,070 5%
दिल्ली [9] 893,384 6.45%
चंडीगढ़ [10] 48,159 9.3%
चंडीगढ़ [11] 1,659,303 8%
गुजरात [12] 1,041,886 2%
हरियाणा [13] 2,079,132 11.84%

हरियाणा के जींद, पानीपत, करनाल, सोनीपत, रोहतक, कैथल, हिसार जिले में सबसे ज्यादा चमार और काफी हद तक गुड़गांव, फरीदाबाद में भी, इनमें से ज़्यादातर रविदासिया संप्रदाय का पालन करने वाले जाटव चमार हैं।

हिमाचल प्रदेश [14] 414,669 8.8% चमार कोरी के बाद राज्य में दूसरा सबसे बड़ा अनुसूचित जाति हैं। चमार मुख्य रूप से निम्नलिखित जिलों में पाए जाते हैं: कांगड़ा, मंडी और ऊना.
जम्मू और कश्मीर [15] 488,257 4.82%
झारखंड [16] 837,333 3.1%
मध्यप्रदेश [17] 4,498,165 7.5%
महाराष्ट्र [18] 1,234,874 1.28% महाराष्ट्र में यह जाति चांभार नाम से प्रसिद्ध है, महाराष्ट्र में महार, मांग के बाद यह तिसरा बडा अनुसूचित जातिओं का समूह है।
पंजाब [19] 2,800,000 11.9% पंजाब में यह इस जाति के लोग राजनीतिक और सामाजिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली हैं। इनकी जनसंख्या लगभग 2.8 करोड़ है जो मुख्य आवादी का 12 प्रतिशत है। यदि दलितों की कुल संख्या को मिला दिया जाये तो यह 27 प्रतिशत के आसपास है। पंजाब में यह जातीय कई समूहों में बंटा है, जैसे अधर्म, रविदासी, रामदासिया और चमार।
राजस्थान [20] 5,457,047 9.7% राजस्थान में चमार ही पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश राज्यों के आसपास के जिलों में पहचाना जा सकता है। बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरु, झुंझुनू, अलवर, भरतपुर और धौलपुर में बसे हुए "चमार" "चमार के रूप में जाने जाते हैं तथा भरतपुर, धौलपुर और अलवर के कुछ हिस्सों में' जाटव ,"रायगर" और "मोची"[21] [22] के रूप में।
उत्तर प्रदेश [23] 19,803,106 16% ज़्यादातर चमार पश्चिमी उत्तरप्रदेश रविदासी के रूप में जाने जाते हैं। इस राज्य में चमारों की एक राजनीतिक पार्टी है जिसे बहुजन समाज पार्टी कहते हैं। इस पार्टी से 1990 के बाद मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री निर्वाचित हुई है।
उत्तराखंड [24] 444,535 5%

महत्वपूर्ण सरनेम[संपादित करें]

  • पुरबिया
  • पुर्विया
  • भारती
  • जाटव
  • पहाडे़कर
  • बघेलकर
  • डोलेकर
  • टान्डेकर
  • बरखाने
  • मोहबे
  • मन्डराह
  • अहिरवार
  • कुमेडी
  • ठाकुर
  • राव
  • गौतम

महत्वपूर्ण व्यक्ति[संपादित करें]

चित्र दीर्घा[संपादित करें]

इसे भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Chuadhry, Muhammed (1999). "justice in practice: legal anthropology in a Pakistan village". Oxford university press. पृ॰ 3. अभिगमन तिथि जुलाई 05, 2013. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  2. "Pakistan's caste system: the untouchable's struggle". अभिगमन तिथि जुलाई 05, 2013. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  3. "Pakistan certainly has a caste system". New York Times. अभिगमन तिथि जुलाई 05, 2013. |accessdate= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)
  4. [भारत ज्ञानकोश, खंड-2, प्रकाशक : पापयुलर प्रकाशन मुंबई, पृष्ठ संख्या-149, आई एस बी एन 81-7154-993-4]
  5. "Uttar Pradesh data highlights: the Scheduled Castes, Census of India 2001" (PDF).
  6. "Uttar Pradesh data highlights: the Scheduled Castes" (PDF).
  7. "West Bengal — DATA HIGHLIGHTS: THE SCHEDULED CASTES — Census of India 2001" (PDF). अभिगमन तिथि 5 जुलाई 2013.
  8. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_bihar.pdf
  9. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_delhi.pdf
  10. http://censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_chandigarh.pdf
  11. http://censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_chhattisgarh.pdf
  12. [1]
  13. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_haryana.pdf
  14. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_himachal.pdf
  15. http://censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_jk.pdf
  16. http://censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_jharkhand.pdf
  17. http://censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_madhya_pradesh.pdf
  18. http://censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_maha.pdf
  19. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_punjab.pdf
  20. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_rajasthan.pdf
  21. Singh (1998). "India's Communities A-Z (People of India Series, Volumes 4,5,6)". Oxford University Press. पाठ "Kumar Suresh" की उपेक्षा की गयी (मदद); गायब अथवा खाली |url= (मदद); |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया होना चाहिए (मदद)
  22. Rawat, Shyam (2010). Studies in Social Protest. VEDAMS. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 8131603318.
  23. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_up.pdf
  24. http://www.censusindia.gov.in/Tables_Published/SCST/dh_sc_uttaranchal.pdf
  25. "I will be the best PM and Mayawati is my chosen heir". Indian Express. 2 मई 2003. ...I am a chamar from Punjab...
  26. "I will be the best PM and Mayawati is my chosen heir". Indian Express. 2 मई 2003. ...Jagjivan Ram, a chamar leader...
  27. "A Chamar will be my successor: Mayawati". द हिन्दू.
  28. "Amar Singh Chamkila". अभिगमन तिथि 5 जुलाई 2013.
  29. "Amarinder disregarded events organised by state unit, says Kaypee". अभिगमन तिथि 5 जुलाई 2013.
  30. "Congress's dalit card turning against established dalit leaders of Doaba region". अभिगमन तिथि 5 जुलाई 2013.
  31. "Tytler's party list calls India's Speaker a Chamar". अभिगमन तिथि 5 जुलाई 2013.
  32. "Cong's doublespeak on caste". अभिगमन तिथि 5 जुलाई 2013.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]