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महर्षि गौतम

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(गौतम ऋषि से अनुप्रेषित)

महर्षि गौतम सप्तर्षियों में से एक हैं। वे वैदिक काल के एक महर्षि एवं मन्त्रद्रष्टा थे। ऋग्वेद में उन के नाम से अनेक सूक्त हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार पत्नी देवी अहिल्या थीं जो प्रातःकाल स्मरणीय पंच कन्याओं गिनी जाती हैं। देवी अहिल्या भगवान् ब्रह्मा की मानस पुत्री थी जो विश्व में सुंदरता में अद्वितीय थी। हनुमान की माता देवी अंजनी ऋषि गोतम और देवी अहिल्या की पुत्री थी। दैत्यगुरु शुक्राचार्य ने देवताओं द्वारा तिरस्कृत होने के बाद अपनी दीक्षा महर्षि गोतम से पूर्ण की थी। ऋषियों पर ईर्ष्यावश गोहत्या का झूठा आरोप लगाने के बाद १२ ज्योतिर्लिंगों में महत्त्वपूर्ण त्रयम्बकेश्वर महादेव नाशिक भी ऋषि गौतम की कठोर तपस्या का फल है जहाँ गंगा माता गौतमी अथवा गोदावरी नाम से प्रकट हुईं।[1]

उत्तरप्रदेश की गोमती नदी भी ऋषि गोतम के ही नाम से विख्यात है।

इस के अतिरिक्त राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में स्तिथ गौतमेश्वर महादेव तीर्थ में स्थित मंदाकिनी गंगा कुंड के बारे में भी मान्यता है कि इसी कुंड में स्नान करने के पश्चात् महर्षि गौतम को गौहत्या के दोष से मुक्ति मिली थी। इस के पश्चात्‌ महर्षि गौतम ने यहाँ महादेव की आराधना कर के एक स्वयंभू शिवलिंग प्रकट किया था जो आज भी उन्हीं के नाम पर गौतमेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है।

सन्दर्भ

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  1. "प्राचीनकाल में त्रयंबक गौतम ऋषि की तपोभूमि थी". Dainik Jagran. अभिगमन तिथि: 2021-08-02.