गिरिराज सिंह

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गिरिराज सिंह
[1]

कार्यकाल
23 मई 2019 से अब तक
पूर्वा धिकारी भोला सिंह

कार्यकाल
16 मई 2014 से 23 मई 2019
पूर्वा धिकारी डॉ भोला सिंह
उत्तरा धिकारी चंदन कुमार

लघु एवं कुटीर उद्योग राज्य मंत्री( स्वतंत्र प्रभार) - भारत सरकार
कार्यकाल
सितंबर 2017 से मई 2019

लघु एवं कुटीर उद्योग राज्यमंत्री - भारत सरकार
कार्यकाल
9 नवंबर 2014 से 3 सितंबर 2017 तक

जन्म 8 सितंबर 1952
बड़हिया, बिहार
राष्ट्रीयता भारतीय
शैक्षिक सम्बद्धता मगध विश्वविद्यालय
धर्म हिंदू

गिरिराज सिंह भारत की सोलहवीं लोकसभा में सांसद हैं।[2] 2014 के चुनावों में इन्होंने बिहार की नवादा सीट से भारतीय जनता पार्टी की ओर से भाग लिया।[3]

राजनीतिक कैरियर[संपादित करें]

17 वीं लोकसभा चुनाव में बेगूसराय लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से चार लाख 22 हजार मतों के बड़े अंतर से जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय छात्रसंघ (JNUSU) के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को हराकर संसद पहुंचने वाले गिरिराज सिंह केंद्र में दोबारा मंत्री बने।[4] उन्‍हें राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंत्री पद की शपथ दिलाई। Modi Sarkar2 मे उन्हें कैबिनेट मंत्री मे पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग का मंत्रालय दिया गया है।

पिछले कार्यकाल में उनके जिम्मे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय था। उन्‍हें विभाग में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे।


अपनी राजनीतिक यात्रा में सबसे पहले वे वर्ष 2002 में बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। लगातार दो टर्म में वर्ष 2014 तक वे विधान पार्षद रहे। इस दौरान नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल की पहली पारी के दूसरे विस्तार में गिरिराज सिंह 2008 से 2010 तक सहकारिता मंत्री तथा दूसरी पारी में 2010 से 2013 तक पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री बने। 2014 के लोकसभा चुनाव में वे पहली बार नवादा से सांसद चुने गए थे। वर्ष 2017 में मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार के समय गिरिराज सिंह को पहली बार केन्द्र में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार की जिम्मेवारी मिली थी।


गिरिराज सिंह का जन्म भले ही नौ सितंबर 1952 को लखीसराय जिले के बड़हिया में हुआ, परंतु शिक्षा-दीक्षा के साथ राजनीति का पाठ भी उन्होंने बेगूसराय में ही पढ़ा। दरअसल, उनका ननिहाल बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल के सिउरी में एवं फुआ का घर बलिया अनुमंडल के सदानंदपुर गांव में है। उस समय बड़हिया में अपराध चरम पर था। उनके पिता ने उन्हें ऐसी संगति से बचाए रखने के लिए गांव में प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत के बाद ही उन्हें अपनी बहन के घर सदानंदपुर भेज दिया। वे सदानंदपुर में रह कर ही पढ़ाई की। परीक्षा देने वे बड़हिया जाते थे। उन्होंने मगध विश्वविद्यालय, बोधगया से इंटर एवं स्नातक की डिग्री हासिल की।


स्नातक करने के बाद गिरिराज सिंह ने एक नामी गिरामी कंपनी की पंप सेट की एजेंसी लेकर बेगूसराय में ही व्यवसाय की शुरुआत की। यहीं एक शादी समारोह में उनकी मुलाकात भाजपा नेता कैलाशपति मिश्र से हुई। उनसे प्रेरित व प्रोत्साहित होकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा और वर्ष 1985-86 में पटना चले गए। वहां वे भाजयुमो से जुड़ गए।

भाजयुमो के बेगूसराय, समस्तीपुर व खगडिय़ा के संगठन प्रभारी रहने के साथ 1990 में वे प्रदेश भाजयुमो की टीम में महासचिव बने। भाजयुमो में उनके साथ काम करने वाले भाजपा नेता अमरेंद्र कुमार अमर, वशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं कि गिरिराज सिंह की सेवा और संघर्ष का सरोकार बेगूसराय से ही रहा है, इसलिए बेगूसराय उनकी सिर्फ कर्मभूमि नहीं, बल्कि राजनीतिक जन्मभूमि भी है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "बेगूसराय लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र".
  2. "बिहार : 'कब्र' वाले बयान को लेकर गिरिराज सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज".
  3. भारतीय चुनाव आयोग की अधिसूचना, नई दिल्ली
  4. "Begusarai Lok Sabha Election Result 2019: गिरिराज सिंह को मिली जीत".