कोष़िक्कोड
| कोष़िक्कोड | |||||
| — city — | |||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||
| देश | |||||
| राज्य | केरल | ||||
| ज़िला | कोष़िक्कोड | ||||
| महापौर | एम. भास्करन | ||||
| जनसंख्या | 436,556 (2001 के अनुसार [update]) | ||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
• 1 मीटर (3 फी॰) |
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विभिन्न कोड
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| आधिकारिक जालस्थल: kozhikode.nic.in | |||||
निर्देशांक: दक्षिण भारत के केरल राज्य में अरब सागर के दक्षिण पश्चिम तट पर कोष़िक्कोड या कालीकट स्थित है। इसके पश्चिम में विस्तृत और शांत अरब सागर फैला हुआ है और पूर्व में वयनाड की पहाड़ियों इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाती हैं। यहां की हरियाली, शांत वातावरण, ऐतिहासिक इमारतें, वन्य जीव अभ्यारण्य, नदियां, पहाड़ियां आदि को देख बड़ी संख्या में पर्यटकों बरबस ही यहां खींचे चले आते है।
अनुक्रम |
इतिहास [संपादित करें]
कोष़िक्कोड का प्रारंभिक इतिहास स्पष्ट नहीं है। प्रागैतिहासिक काल की पत्थरों की गुफाएं यहां प्राप्त हुई हैं। संगम युग में यह जिला चेरा प्रशासन के अधीन था। उस समय यह स्थान व्यापारिक गतिविधियों का केन्द्र था। कोष़िक्कोड का अस्तित्व तेरहवीं शताब्दी में उभरकर सामने आया। इरनाड के राजा उदयावर ने कोष़िक्कोड और पोन्नियंकर के आसपास का क्षेत्र जीतकर एक किला बनवाया जिसे वेलापुरम कहा गया। १४९८ ई. में पुर्तगाली नाविक वास्कोडिगामा ने अपने दल के साथ यहां सर्वप्रथम प्रवेश किया। समुद्री मार्ग से आने वाला वह पहला यूरोप वासी था। उसके बाद डच, फ्रेन्च और ब्रिटिश लोगों का यहां आगमन हुआ। आगे चलकर यह स्थान शक्तिशाली जमोरिन साम्राज्य की राजधानी बनी। १९५६ में केरल का राज्य के रूप में गठन हुआ और आगे चलकर कोष़िक्कोड राज्य की व्यापारिक गतिविधियों का केन्द्र बना।
दर्शनीय स्थल [संपादित करें]
पजस्सीराजा संग्रहालय- [संपादित करें]
इस संग्रहालय में कोष़िक्कोड के समृद्ध इतिहास की झलक देखी जा सकती है। संग्रहालय शहर के पूर्व में ५ किमी.की दूरी पर स्थित है। राज्य का पुरातत्व विभाग इस संग्रहालय की देखभाल करता है। संग्रहालय में प्राचीन सिक्के, कांसे की वस्तुओं, प्राचीन मूरल की प्रतिलिपियां आदि इस क्षेत्र की विरासत को प्रदर्शित करती है।
कला दीर्घा- [संपादित करें]
यह आर्ट गैलरी पजस्सीराजा संग्रहालय के सन्निकट है। यहां राजा रवि वर्मा और राजा वर्मा की पेटिंग्स देखी जा सकती है। इन दोनों कलाकारों का संबंध त्रावणकोर के शाही वंश से था। कला के पारखी लोग इस स्थान पर जाना नहीं भूलते। कहा जाता है कि रवि राजा वर्मा पहले कलाकार थे जिन्होंने तैल रंगों (ऑयल कलर) का प्रयोग किया था। यह कला दीर्घा (आर्ट गैलरी) सोमवार और सार्वजनिक अवकाश के अतिरिक्त प्रतिदिन सुबह १० बजे से शाम पांच बजे तक खुली रहती है।
मनाचिरा मैदान- [संपादित करें]
यह मैदान नगर के बीचों बीच स्थित है। यह स्थान जमोरिन शासकों के महल का विशाल आंगन हुआ करता था। अब इसे एक खूबसूरत पार्क में तब्दील कर दिया गया है। इसके चारों ओर केरल के पारंपरिक मकान बने हुए हैं। नजदीक ही एक विशाल पानी का टैंक है।
काजीकोड बीच- [संपादित करें]
शहर के पूर्वी भाग के तट पर दूर-दूर तक फैला यह बीच अनोखा नजारा प्रस्तुत करता है। समुद्र तट पर सूर्योदय के समय सूर्य की लालिमा जब रेत पर पडती है तो उस वक्त दृश्य बडा ही अनोखा लगता है। लाइट हाउस, लायन्स पार्क और एक्वेरियम को भी यहां देखा जा सकता है।
बीपोर- [संपादित करें]
यह छोटा तटीय नगर कोष़िक्कोड से ११ किमी. दूर चलियार नदी के मुहाने पर स्थित है। यह नगर सदियों से पानी के जहाज की उद्योग के लिए लोकप्रिय है। १५०० वर्षो से अधिक समय से यह स्थान उरू अर्थात् अरबी व्यापारिक जहाजों के निर्माण के लिए जाना जाता है।
वाडाकर- [संपादित करें]
यह स्थान मार्शल आर्ट का वाणिज्यिक केन्द्र है। उत्तरी मालाबार के पौराणिक नायक तचोली ओथेनाम का यहां जन्म हुआ था। वाडाकर ने ही मार्शल आर्ट की महान परंपरा विकसित की थी। प्राचीन काल में वाडाकर व्यापारिक और वाणिज्यिक गतिविधियों का केन्द्र था।
तुषारगिरी- [संपादित करें]
यह स्थान झरनों और हरे-भरे जंगलों के लिए प्रसिद्ध है। तुषारगिरी कोडनचैरी से ११ किमी दूर है जो रबड़ के पौधों, नारियल, पेपर, अदरक और सभी प्रकार के मसालों के पेड़ पौधों से भरपूर है। तुषारगिरी के नजदीक ही कक्कायम में एक बांध है। यहां नदियों और झरनों में ट्रैकिंग का आनंद लिया जा सकता है।
साइंस प्लेनेटोरियम- [संपादित करें]
कोष़िक्कोड में बह्मांड की गुत्थियों को समझने और तारों व ग्रहों के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल करने के लिए तारामंडल (साइंस प्लेनेटोरियम) आप जा सकते है। जाफरखान कालोनी में स्थित इस प्लेनेटोरियम में बहुत से खेलों और पहेलियों के माध्यम से अपना समय व्यतीत किया जा सकता है।
पूकोट झील- [संपादित करें]
कोष़िक्कोड में स्थित यह झील प्राकृतिक और ताजे पानी की झील है। घास और हरे भरे पेड़ों से घिरी यह झील शांत वातावरण के अभिलाषी लोगों के लिए आदर्श जगह है।
थाली मंदिर- [संपादित करें]
कोष़िक्कोडसिटी सेंटर में स्थित यह मंदिर कालीकट के जमोरिन साम्राज्य की यादगार निशानी है। रेवती पट्टाथानम नामक वार्षिक शैक्षणिक प्रतियोगिता यहां आयोजित की जाती है।
खरीददारी [संपादित करें]
ड्राई फूड और शुद्ध नारियल के तेल से बना कोष़िक्कोड का मीठा हलवा पर्यटक अपने साथ ले जाना नहीं भूलते। साथ ही केले के चिप्स की खरीददारी भी अधिकांश पर्यटक करते हैं। कोर्ट रोड़ में मसालों का बाजार ताजे मसालों की खरीददारी करने के लिए उत्तम जगह है। अरबी पानी के जहाजों के नमूनों को यहां से खरीदा जा सकता है। कोष़िक्कोड हैंडलूम कपड़ों के लिए भी काफी लोकप्रिय है।
कैसे पहुंचे [संपादित करें]
- वायुमार्ग-
कोष़िक्कोड नगर से २३ किमी.दूर कारीपुर नजदीकी एयरपोर्ट है। मुम्बई, चैन्नई, बैंगलोर और मध्य पूर्व के लिए प्रतिदिन यहां से उडा़न जाती है।
- रेलमार्ग-
मानचिरा स्क्वेयर के दक्षिण में कोष़िक्कोड रेलवे स्टेशन स्थित है। यह रेलवे स्टेशन मंगलौर, एरनाकुलम, त्रिवेन्द्रम, चैन्नई, कोयंबटूर और गोवा से नियमित रेलगाड़ियों के माध्यम से जुड़ा हुआ है।
- सड़क मार्ग-
राष्ट्रीय राजमार्ग १७ कोष़िक्कोड को केरल और अन्य शहरों से जोड़ता है। कोष़िक्कोड शहर से अनेक बसें अन्य शहरों को जाती है।
बाहरी कड़ियां [संपादित करें]
- Kozhikode District official website
- Calicut (Kozhikode) City Map
- Massacre by the Portuguese Forces in Calicut