ओणम
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| ओणम का स्लाइड शो | |
| आधिकारिक नाम | ओणम |
| अन्य नाम | ओनम |
| अनुयायी | हिन्दू, मलयाली, भारतीय प्रवासी |
| प्रकार | इस तिथि पर राजा महाबलि भ्रमण करने आते हैं। |
| तिथि | ओणम नक्षत्र चिंगम माह में |
ओणम केरल का एक प्रमुख त्योहार है। यह सितम्बर में मनाया जाता है। इस दिन सुन्दर फूलों से घरों को सजाया जाता है। महिलायें और किशोरियाँ इस दिन नाचने गाने में मस्त रहती हैं, और पुरूष तैरने और नौका-दौड़ में सम्मिलित होते हैं। कहा जाता है कि इस दिन इनके राजा महाबली इन्हें आशीर्वाद देने पाताल लोक से आते हैं। यह प्राचीन राजा महाबली के याद मे मनाया जाता है। यह पर्व दस दिनों तक चलाता है, इन दस दिनों मे घरों में फूलों की रंगोली बनाई जाती है।
चित्र दीर्घा [संपादित करें]
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Onapookkalam1.JPG
सन्दर्भ [संपादित करें]
वामन कथा राक्षस नरेश महाबली, विष्णु भगवान के भक्त प्रह्लाद का पौत्र था। वह उदार शासक और महापराक्रमी था। राक्षसी प्रवृत्ति के कारण महाबलि ने देवदाओं के राज्य को बलपूर्वक छीन लिया था। दुराग्रही व गर्व–दर्प से भरे राजा बलि ने देवताओं को कष्ट में डाल दिया। तब परेशान देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता की गुहार लगाई। प्रार्थना सुन भगवान श्री विष्णु ने वामन, अर्थात बौने के रूप में महर्षि कश्यप व उनकी पत्नी अदिति के घर जन्म लिया। एक दिन वामन महाबलि की सभी में पहुँचे। इस ओजस्वी, ब्रह्मचारी नवयुवक को देखकर एकाएक महाबलि उनकी ओर आकर्षित हो गया। महाबलि ने श्रद्धा से इस नवयुवक का स्वागत किया और जो चाहे माँगने को कहा।
श्री वामन ने शुद्धिकरण हेतु अपने लघु पैरों के तीन क़दम जितनी भूमि देने का आग्रह किया। उदार महाबलि ने यह स्वीकार कर लिया। किन्तु जैसे ही महाबलि ने यह भेंट श्रीवामन को दी, वामन का आकार एकाएक बढ़ता ही चला गया। वामन ने तब एक क़दम से पूरी पृथ्वी को ही नाप डाला तथा दूसरे क़दम से आकाश को। अब तीसरा क़दम तो रखने को स्थान बचा ही नहीं था। जब वामन ने बलि से तीसरा क़दम रखने के लिए स्थान माँगा, तब उसने नम्रता से अपना मस्तक ही प्रस्तुत कर दिया। वामन ने अपना तीसरा क़दम मस्तक पर रख महाबलि को पाताल लोक में पहुँचा दिया। बलि ने यह बड़ी उदारता और नम्रता से स्वीकार किया। चूँकि बलि की प्रजा उससे बहुत ही स्नेह रखती थी, इसीलिए श्रीविष्णु ने बलि को वरदान दिया कि वह अपनी प्रजा को वर्ष में एक बार अवश्य मिल सकेगा। अतः जिस दिन महाबलि केरल आते हैं, वही दिन ओणम के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार को केरल के सभी धर्मों के लोग मनाते हैं। बलि की केरल यात्रा का महोत्सव