वास्को द गामा
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| वास्को द गामा | |
| जन्म | १४६०-१४६९ साइन्स, अलेन्तेजो, पुर्तगाल |
|---|---|
| मृत्यु | दिसंबर 24, 1524 (आयु लगभग ५४-६४) कोच्चि |
| व्यवसाय | अन्वेषक, सैन्य नैसेना कमांडर |
| जीवनसाथी | कैटरीना द अतायदे |
डॉम वास्को द गामा (पुर्तगाली: Vasco da Gama) (लगभग १४६० या १४६९ - २४ दिसंबर, १५२४) एक पुर्तगाली अन्वेषक, यूरोपीय खोज युग के सबसे सफल खोजकर्ताओं में से एक, और यूरोप से भारत सीधी यात्रा करने वाले जहाज़ों का कमांडर था, जो केप ऑफ गुड होप, अफ्रीका के दक्षिणी कोने से होते हुए भारत पहुँचा। वह जहाज़ द्वारा तीन बार भारत आया। उसकी जन्म की सही तिथि तो अज्ञात है लेकिन यह कहा जाता है की वह १४९० के दशक में साइन, पुर्तगाल में एक योद्धा था।
अनुक्रम |
[संपादित करें] आरंभिक जीवन
वास्को द गामा का जन्म अनुमानतः १४६० में [१] या १४६९[२] में साइन्स, पुर्तगाल के दक्षिण-पश्चिमी तट के निकट हुआ था। इनका घर नोस्सा सेन्होरा दास सलास के गिरिजाघर के निकट स्थित था। तत्कालीन साइन्स जो अब अलेन्तेजो तट के कुछ बंदरगाहों में से एक है, तब कुछ सफ़ेद पुती, लाल छत वाली मछुआरों की झोंपड़ियों का समूह भर था।
वास्को द गामा के पिता एस्तेवाओ द गामा, १४६० में ड्यूक ऑफ विसेयु, डॉम फर्नैन्डो के यहां एक नाइट थे। [३] डॉम फर्नैन्डो ने साइन्स का नागर-राज्यपाल नियुक्त किया हुआ था। वे तब साइन्स के कुछ साबुन कारखानों से कर वसूलते थे।एस्तेवाओ द गामा का विवाह डोना इसाबेल सॉद्रे से हुआ था। [४] वास्को द गामा के परिवार के बारे में आरंभिक अधिक ज्ञात नहीं है।
पुर्तगाली इतिहासकार टेक्सियेरा द अरागाओ बताते हैं, कि एवोरा शहर में वास्को द गामा की शिक्षा हुई, जहां उन्होंने शायद गणित एवं नौवहन का ज्ञान अर्जित किया होगा। यह भी ज्ञात है कि गामा को खगोलशास्त्र का भी ज्ञान था, जो उन्होंने संभवतः खगोलज्ञ अब्राहम ज़क्यूतो से लिया होगा।[५]१४९२ में पुर्तगाल के राजा जॉन द्वितीय ने गामा को सेतुबल बंदरगाह, लिस्बन के दक्षिण में भेजा। उन्हें वहां से फ्रांसीसी जहाजों को पकड़ कर लाना था। यह कार्य वास्को ने कौशल एवं तत्परता के साथ पूर्ण किया।
[संपादित करें] यात्रा
८ जुलाई, १४९७ के दिन चार जहाज़ (साओ गैब्रिएल, साओ राफेल, बेरियो, और अज्ञात नाम का एक संचयन जहाज़[३] ) लिस्बन से चल पड़े, और उसकी पहली भारत यात्रा आरंभ हुई।[६] उससे पहले किसी भी यूरोपीय ने इतनी दूर दक्षिण अफ़्रीका या इससे अधिक यात्रा नहीं की थी, यद्यपि उससे पहले एक और पुर्तगाली खोजकर्ता, बारटोलोमीयु डियास बस इतनी ही दूरी तक गया था। चूंकि वह क्रिसमस के आसपास का समय था, द गामा के कर्मीदल ने एक तट का नाम, जिससे होकर वे गुजर रहे थे, "नैटाल" रखा। इसका पुर्तगाली में अर्थ है "क्रिसमस", और उस स्थान का यह नाम आज तक वही है।
जनवरी तक वे लोग आज के मोज़ाम्बीक तक पहुँच गए थे, जो पूर्वी अफ़्रीका का एक तटीय क्षेत्र है[७] जिसपर अरब लोगों ने हिन्द महासागर के व्यापार नेटवर्क के एक भाग के रूप में नियंत्रण कर रखा था। उनका पीछा एक क्रोधित भीड़ ने किया जिन्हें ये पता चल गया की वे लोग मुसलमान नहीं हैं, और वे वहाँ से कीनिया की ओर चल पड़े।[८] वहाँ पर, मालिंडि (
) में, द गामा ने एक भारतीय मार्गदर्शक को काम पर रखा, जिसने आगे के मार्ग पर पुर्तगालियों की अगुवाई की और उन्हें २० मई, १४९८ के दिन कालीकट (इसका मलयाली नाम कोज़ीकोड है), केरल ले आया, जो भारत के दक्षिण पश्चिमी तट पर स्थित है। गामा ने कुछ पुर्तगालियों को वहीं छोड़ दिया, और उस नगर के शासक ने उसे भी अपना सब कुछ वहीं छोड़ कर चले जाने के लिए कहा, पर वह वहाँ से बच निकला और सितंबर १४९९ में वापस पुर्तगाल लौट गया।
उसकी अगली यात्रा १५०३ में हुई, जब उसे ये ज्ञात हुआ की कालीकट के लोगों ने पीछे छूट गए सभी पुर्तगालियों को मार डाला है। [९]अपनी यात्रा के मार्ग में पड़ने वाले सभी भारतीय और अरब जहाज़ो को उसने ध्वस्त कर दिया, और कालीकट पर नियंत्रण करने के लिए आगे बढ़ चला, और उसने बहुत सी दौलत पर अधिकार कर लिया। इससे पुर्तगाल का राजा उससे बहुत प्रसन्न हुआ।
सन् १५३४ में वह अपनी अंतिम भारत यात्रा पर निकला। उस समय पुर्तगाल की भारत में उपनिवेश बस्ती के वाइसरॉय (राज्यपाल) के रूप में आया, पर वहाँ पहुँचने के कुछ समय बाद उसकी मृत्यु हो गई।
[संपादित करें] संदर्भ
- ↑ Sourcebook: वास्को द गामा: राउण्ड टू अफ्रीका टू इण्डिया, १४९७ – १४९८ ई] अभिगमन २७ जून, २००७
- ↑ [ Vasco da Gama] अभिगमन २७ जून, २००७
- ↑ ३.० ३.१ ऐमेस, ग्लैन जे (२००८)। द ग्लोब एन्कम्पास्स्ड। १० जनवरी, २००८।
- ↑ सुब्रह्मण्यम १९९७, पृ.६१
- ↑ सुब्रह्मण्यम १९९७, पृ.६२
- ↑ द गामा’ज़ राउण्ड अफ़्रीका टू इण्डिया. अभिगमन १६ नवंबर, २००६
- ↑ फर्नांडेज़-आर्मेस्तो, फ़ेलिप (२००६)। पाथफ़ाइंडर्स: अ ग्लोबल हिस्ट्री ऑफ़ एक्स्प्लोरेशन। डब्ल्यू डब्ल्यू नॉर्टन एण्ड कम्पनी, १७७-१७८।
- ↑ वास्को द गामा सीक्स सी रूट टू इण्डिया www.oldnewspublishing.com. अभिगमन ८ जुलाई, २००६
- ↑ फर्नांडेज़-आर्मेस्तो, फ़ेलिप (२००६)। पाथफ़ाइंडर्स: अ ग्लोबल हिस्ट्री ऑफ़ एक्स्प्लोरेशन। डब्ल्यू डब्ल्यू नॉर्टन एण्ड कम्पनी, १७८-१७९।
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
- (पुर्तगाली) वास्को द गामा
- वास्को द गामा प्रौमिनेंट पीपल पर
- (अंग्रेजी )द गामा की राउण्ड अफ़्रीका टू इण्डिया
- द गामा वेब ट्युटोरियल अनिमेटेड नक्शों के संग
- लघु वर्णन द गामा की यात्राओं के