संदीप उन्नीकृष्णन

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मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, अशोक चक्र
Sandeep Unnikrishnan.jpg
अंतिम संस्कार Hebbal, बंगलौर, कर्नाटक
निष्ठा Flag of भारत भारत
सेवा/शाखा भारतीय सेना, एन एस जी
सेवा वर्ष 1999-2008
उपाधि मेजर, कमांडो
दस्ता एन एस जी HQ, मानेसर
ईनाम अशोक चक्र

संदीप उन्नीकृष्णन (मलयालम: സന്ദീപ് ഉണ്ണിക്കൃഷ്ണന്‍, कन्नड़: ಸಂದೀಪ್ ಉನ್ನೀಕೃಷ್ಣನ್, हिन्दी: संदीप उन्नीकृष्णन) (15 मार्च 1977 -28 नवम्बर 2008) भारतीय सेना में एक मेजर थे, जिन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स (एनएसजी) के कुलीन विशेष कार्य समूह में काम किया. वे नवम्बर 2008 में मुंबई के हमलों में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए।[1] उनकी बहादुरी के लिए उन्हें 26 जनवरी 2009 को भारत के सर्वोच्च शांति समय बहादुरी पुरस्कार, अशोक चक्र से सम्मानित किया गया.[2]


"उपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा", ये संभवतया उनके द्वारा उनके आदमियों को कहे गए अंतिम शब्द थे, ऐसा कहते कहते ही वे ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो के दौरान मुंबई के ताज होटल के अन्दर सशस्त्र आतंकवादियों की गोलियों का शिकार हो गए.[3]


बाद में, एनएसजी के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि जब ऑपरेशन के दौरान एक कमांडो घायल हो गया, मेजर उन्नीकृष्णन ने उसे बाहर निकालने की व्यवस्था की और खुद ही आतंकवादियों से निपटना शुरू कर दिया. आतंकवादी भाग कर होटल की किसी और मंजिल पर चले गए और उनका सामना करते करते मेजर उन्नीकृष्णन गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति को प्राप्त हुए।[3]


परिवार[संपादित करें]

संदीप उन्नीकृष्णन बैंगलोर में स्थित एक नायर परिवार से थे, यह परिवार मूल रूप से चेरुवनूर, कोजिकोडे जिला, केरल से आकर बैंगलोर में बस गया था.[4] वे सेवानिवृत्त आईएसआरओ अधिकारी के. उन्नीकृष्णन और धनलक्ष्मी उन्नीकृष्णन के इकलौते पुत्र थे.[5]


बचपन[संपादित करें]

मेजर उन्नीकृष्णन ने अपने 14 साल फ्रैंक एंथोनी पब्लिक स्कूल, बैंगलोर में बिताये, 1995 में आईएससी विज्ञान विषय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. वे अपने सहपाठियों के बीच बहुत लोकप्रिय थे, वे सेना में जाना चाहते थे, यहां तक कि क्र्यू कट में भी स्कूल जरूर जाते थे. एक अच्छे एथलीट (खिलाडी) होने के कारण, वे स्कूल की गतिविधियों और खेल के आयोजनों में बहुत सक्रिय रूप से हिस्सा लेते थे. उनके अधिकांश एथलेटिक रिकॉर्ड, उनके स्कूल छोड़ने के कई साल बाद तक भी टूट नहीं पाए. [6] अपनी ऑरकुट प्रोफाइल में उन्होंने अपने आप को फिल्मों के लिए पागल बताया.[7][8]


कम उम्र से ही साहस के प्रदर्शन के अलावा उनका एक नर्म पक्ष भी था, वे अपने स्कूल के संगीत समूह के सदस्य भी थे.[6]


सेना कैरियर[संपादित करें]

संदीप 1995 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (National Defence Academy) (एनडीए) में शामिल हो गए. वे एक कैडेट थे, ओस्कर स्क्वाड्रन (नंबर 4 बटालियन) का हिस्सा थे और एनडीए के 94 वें कोर्स के स्नातक थे. उन्होंने कला (सामाजिक विज्ञान विषय) में स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी.


उनके एनडीए के मित्र उन्हें एक "निः स्वार्थ", "उदार" और "शांत व सुगठित" व्यक्ति के रूप में याद करते हैं.[9]


In 1995, we were a bunch of gangly 18-year-olds, wondering what the hell we were doing climbing up Sinhgad fort on a miserable, rainy day, when I first met Unni. He was an ikki, a first termer, bone-weary, but always gung-ho. When we made it to the top, the first stop was for a fill of water. Soggy, bushed and thirsty, we ran to the natural spring that has been feeding soldiers since the days of Chhatrapati Shivaji. Unni was the first to reach and started drawing water from the well. We lined up with our canteens, but a tourist first held out her water bottle. Unni filled it. Then, another. Unni filled that too.

Within seconds, there was a long line of tourists waiting for water. Without a word - and with a smile to us - Unni dutifully doled out his generosity. He never got to us. He himself never got a sip. The order came to move on.[9]

An NDA coursemate

उनके खुश मिजाज़ चेहरे पर एक दृढ और सख्त सैनिक का मुखौटा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था, इसी तरह से उनके पतली काया के पीछे एक सुदृढ़, कभी भी हार ना मानने वाली एक भावना छिपी थी, इन गुणों को एनडीए में आयोजित कई प्रशिक्षण शिविरों और देश के बाहर होने वाली प्रतिस्पर्धाओं में देखा गया, जिनमें उन्होंने हिस्सा लिया था.[9]


उन्हें 12 जुलाई 1999 को बिहार रेजिमेंट[1] (इन्फेंट्री) की सातवीं बटालियन का लेफ्टिनेंट आयुक्त किया गया. हमलों और चुनौतियों का सामना करने के लिए दो बार उन्हें जम्मू और कश्मीर तथा राजस्थान में कई स्थानों पर भारतीय सेना में नियुक्त किया, इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड्स में शामिल होने के लिए चयनित किया गया. प्रशिक्षण के पूरा होने पर, उन्हें जनवरी 2007 में एनएसजी का विशेष कार्य समूह (एसएजी) सौंपा गया और उन्होंने एनएसजी के कई ऑपरेशन्स में भाग लिया.[10]


वे एक लोकप्रिय अधिकारी थे, जिन्हें उनके वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों ही पसंद करते थे. सेना के सबसे कठिन कोर्स, 'घातक कोर्स' (कमांडो विंग (इन्फैंट्री स्कूल), बेलगाम में) के दौरान वे शीर्ष स्थान पर रहे, उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारीयों से "प्रशिक्षक ग्रेडिंग" और प्रशस्ति अर्जित की. संभवतया यही कारण था या बहादुरी के लिए उनका जुनून था कि उन्होंने एनएसजी कमांडो सेवा को चुना, जिसमें वे 2006 में प्रतिनियुक्ति पर शामिल हुए थे.[11]


जुलाई 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान पाकिस्तानी सैन्य दलों के द्वारा भारी तोपों के हमलों और छोटी बमबारी के जवाब में उन्होंने आगे की पोस्ट्स में तैनात रहते हुए धैर्य और दृढ संकल्प का प्रदर्शन किया.

31 दिसंबर 1999 की शाम को, मेजर संदीप ने छह सैनिकों एक टीम का नेतृत्व किया और शत्रु से 200 मीटर की दूरी पर एक पोस्ट बना ली. इस दौरान वे शत्रु के प्रत्यक्ष प्रेक्षण और आग के चलते काम कर रहे थे.[12]

ऑपरेशन ब्लैक टोरनेडो[संपादित करें]

26 नवम्बर 2008 की रात, दक्षिणी मुंबई की कई प्रतिष्ठित इमारतों पर आतंकवादियों ने हमला किया. इनमें से एक इमारत जहां आतंकवादियों ने लोगों को बंधक बना लिया, वह 100 साल पुराना ताज महल पेलेस होटल था.


ताज महल होटल के इस ऑपरेशन में मेजर उन्नीकृष्णन को 51 तैनात एसएजी का टीम कमांडर नियुक्त किया गया, ताकि इमारत को आतंकवादियों से छुड़ाया जा सके और बंधकों को बचाया जा सके. उन्होंने 10 कमांडो के एक समूह में होटल में प्रवेश किया और सीढियों से होते हुए छठी मंजिल पर पहुंच गए. सीढियों से होकर निकलते समय, उन्होंने पाया कि तीसरी मंजिल पर आतंकवादी हैं. आतंकवादियों ने कुछ महिलाओं को एक कमरे में बंधक बना लिया था और इस कमरे को अन्दर से बंद कर लिया था. दरवाजे को तोड़ कर खोला गया, इसके बाद आतंकवादियों ने एक राउंड गोलीबारी की जिसमें कमांडो सुनील यादव घायल हो गए. वे मेजर उन्नीकृष्णन के प्रमुख सहयोगी थे.[13]


मेजर उन्नीकृष्णन ने सामने से टीम का नेतृत्व किया और आतंकवादियों के साथ उनकी भयंकर मुठभेड़ हुई. उन्होंने सुनील यादव को बाहर निकालने की व्यवस्था की और अपनी सुरक्षा को ताक पर रखकर आतंकवादियों का पीछा किया, इसी दौरान आतंकवादी होटल की किसी और मंजिल पर चले गए, और इस दौरान संदीप निरंतर उनका पीछा करते रहे.[14] इसके बाद हुई मुठभेड़ में उन्हें पीछे से गोली लगी, वे गंभीर रूप से घायल हो गए और अंत में चोटों के सामने झुक गए. [15] [16] [17]

अंतिम संस्कार[संपादित करें]

उन्नीकृष्णन के अंतिम संस्कार में, शोक में लिप्त लोगों ने जोर जोर से चिल्ला कर कहा "लॉन्ग लाइव् मेजर उन्नीकृष्णन", "संदीप उन्नीकृष्णन अमर रहे". [18] हजारों लोग एनएसजी कमांडो मेजर उन्नीकृष्णन के बैंगलोर के घर के बाहर खड़े होकर उन्हें श्रद्धांजली दे रहे थे. मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का अंतिम संस्कार पूरे सैनिक सम्मान के साथ किया गया.

विवाद[संपादित करें]

मेजर उन्नीकृष्णन के अंतिम संस्कार में केरल की सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं था. स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया ने राजनीतिज्ञों के इस फैसले की आलोचना की.

हालांकि केरल के मुख्य मंत्री वी. एस. अच्युतानंदन और गृह मंत्री कोडियेरी बालाकृष्णन ने 30 नवम्बर 2008 को आकर उन्नीकृष्णन के परिवार के लिए अफसोस व्यक्त किया. संदीप के पिता के. उन्नीकृष्णन क्रोधित थे, उन्होंने इनके आने की आलोचना की और उनसे चले जाने के लिए कहा. उन्होंने यहां तक यह धमकी दी कि अगर केरल का कोई भी नेता उनके घर आता है तो वे आत्महत्या कर लेंगे.[19] बाद में वी.एस. अच्युतानंदन ने मीडिया से कहा कि वे मेजर उन्नीकृष्णन के लिए नहीं गए थे, उनके माता पिता के घर तो कोई कुत्ता भी नहीं जाएगा.[20] एक बार फिर से मीडिया और जनता ने इस की जबरदस्त आलोचना की.

हालांकि, अच्युतानंदन ने कहा कि वे मेजर के परिवार से माफी नहीं मांगेगें. साथ ही उन्होंने कहा कि वे मृत मेजर के परिवार का सम्मान करते हैं.[21]


2 दिसम्बर 2008, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव प्रकाश करात ने अच्युतानंदन की 'कुत्ते वाली टिप्पणी' के लिए माफ़ी मांगी. [22] 3 दिसंबर 2008 दिसंबर को, अच्युतानंदन ने एस घटना पर खेद व्यक्त किया है. [23][24]

यह भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "2 NSG men killed, six others injured in Mumbai gunbattles". PTI. 28 November. http://www.ptinews.com/pti%5Cptisite.nsf/0/FFB1157E6E7B9C4F6525750F004376C9?OpenDocument. अभिगमन तिथि: 2008-11-28. [मृत कड़ियाँ]
  2. "11 security personnel to get Ashok Chakra". http://ibnlive.in.com/news/11-security-personnel-to-get-ashok-chakra/83597-3.html. अभिगमन तिथि: 2009-01-25. 
  3. "Hero's last words — The Hindu". The Hindu. 2008-11-30. http://www.hindu.com/2008/11/30/stories/2008113060690800.htm. अभिगमन तिथि: 2008-11-30. 
  4. "Army Major from Kerala dies in Mumbai encounter". WebIndia 123. 28 November. http://news.webindia123.com/news/articles/India/20081128/1115900.html. अभिगमन तिथि: 2008-11-28. 
  5. http://www.telegraphindia.com/1081129/jsp/nation/story_10182139.jsp
  6. "A school remembers". Times of India. TOI. 2008-11-29. http://timesofindia.indiatimes.com/Bangalore/Maj_Sandeep_UnniKrishnan_-_A_school_remembers/articleshow/3770767.cms. अभिगमन तिथि: 2008-11-29. 
  7. http://www.orkut.com/Main#Profile.aspx?uid=5185304287748406909
  8. "Sandeep Unnikrishnan: A movie maniac". India Today. India Today. 2008-11-30. http://indiatoday.digitaltoday.in/index.php?option=com_content&task=view&id=21369&sectionid=4&issueid=82&Itemid=1. अभिगमन तिथि: 2008-11-30. 
  9. "NDA Buddies Remember Unni=The Times Of India". The Times Of India. 2008-11-30. http://timesofindia.indiatimes.com/India/NDA_buddies_remember_Sandeep_Unnikrishnan_/articleshow/3774026.cms. अभिगमन तिथि: 2008-11-30. 
  10. http://mangalorean.com/news.php?newstype=broadcast&broadcastid=102951
  11. http://timesofindia.indiatimes.com/Cities/Patna/Bihar_Regiment_fondly_remembers_Major_Unnikrishnan/articleshow/3774097.cms
  12. http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200812101678.htm
  13. http://sify.com/news/fullstory.php?id=14809318
  14. sify.com
  15. "Sandeep Unnikrishnan waged a valiant battle against terrorists". The Hindu. 29 November. http://www.hindu.com/2008/11/29/stories/2008112959030900.htm. अभिगमन तिथि: 2008-11-29. 
  16. http://ibnlive.in.com/news/nation-bids-adieu-to-ats-chief-nsg-commando/79337-3.html
  17. http://timesofindia.indiatimes.com/Bangalore/Maj_Sandeep_UnniKrishnan_-_A_school_remembers/articleshow/3770767.cms
  18. "Hundreds pay tributes to slain NSG major in Bangalore — The Hindu". The Hindu. 2008-11-29. http://www.hindu.com/thehindu/holnus/001200811291431.htm. अभिगमन तिथि: 2008-12-03. 
  19. http://www.rediff.com/news/2008/dec/01mumterror-martyr-father-snubs-kerala-chief-minister-in-bangalore.htm
  20. http://timesofindia.indiatimes.com/Kerala_CM_insults_slain_Major_Sandeeps_family/articleshow/3781262.cms
  21. http://www.ndtv.com/convergence/ndtv/mumbaiterrorstrike/Story.aspx?ID=NEWEN20080074922&type=News
  22. http://sify.com/news/fullstory.php?id=14810182
  23. http://www.ndtv.com/convergence/ndtv/mumbaiterrorstrike/Election_Story.aspx?ID=NEWEN20080075098
  24. http://www.hindu.com/2008/12/04/stories/2008120460801100.htm

बाहरी लिंक[संपादित करें]