शेख हसीना

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शेख हसीना
শেখ হাসিনা
Sheikh Hasina in London 2011.jpg

बांग्लादेश की प्रधानमन्त्री
अवलंबी
कार्यालय ग्रहण 
6 January 2009
राष्ट्रपति Iajuddin Ahmed
Zillur Rahman
Abdul Hamid
पूर्वा धिकारी Fakhruddin Ahmed (Acting)
पद बहाल
23 June 1996 – 15 July 2001
राष्ट्रपति Abdur Rahman Biswas
Shahabuddin Ahmed
पूर्वा धिकारी Muhammad Habibur Rahman (Acting)
उत्तरा धिकारी Latifur Rahman (Acting)

पद बहाल
10 October 2001 – 29 October 2006
पूर्वा धिकारी Khaleda Zia
उत्तरा धिकारी Khaleda Zia
पद बहाल
20 March 1991 – 30 March 1996
पूर्वा धिकारी Abdur Rab
उत्तरा धिकारी Khaleda Zia

अवलंबी
कार्यालय ग्रहण 
17 May 1981
पूर्वा धिकारी Syeda Zohra Tajuddin

जन्म (1947-09-28) 28 सितम्बर 1947 (आयु 68 वर्ष)
Tungipara, East Bengal, Dominion of Pakistan
(now Bangladesh)
राजनीतिक दल Bangladesh Awami League
Other political
affiliations
Grand Alliance (2008–present)
जीवन संगी Wazed Miah (1968–2009)
बच्चे Sajeeb Wazed
Saima Wazed
शैक्षिक सम्बद्धता Azimpur Girl's High School
Eden Mohila College
University of Dhaka
धर्म Islam
हस्ताक्षर
शेख हसीना

शेख हसीना (जन्म: २८ सितम्बर १९४७) बांगलादेश की वर्तमान प्रधानमंत्री हैं। वे बांलादेशे ९वीं राष्ट्रीय संसद के सरकारी पक्ष की प्रधान एवं बांग्लादेश अवामी लीग की नेत्री हैं। वे बांलादेश के महान स्वाधीनता संग्राम के प्रधान नेता तथा बांग्लादेश सरकार के प्रथम राष्ट्रपति राष्ट्रीय जनक बङ्गबन्धु शेख मुजीबुर्रहमान की पुत्री हैं।

परिचय[संपादित करें]

उनके पिता, माँ और तीन भाई १९७५ के तख्तापलट में मारे गए थे। उस हादसे के बाद भी उन्हें राजनीतिक सफलता आसानी से नहीं मिली। उन्होंने ८० के दशक में बांग्लादेश में जनरल इरशाद के सैनिक शासन के ख़िलाफ़ जो मुहिम छेड़ी, उसके दौरान उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। जनरल इरशाद के बाद भी उन्हें जनरल की पत्नी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की ख़ालिदा ज़िया से कड़ी प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ कड़वी और लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी।

१९९६ में शेख हसीना ने चुनाव जीता और कई वर्षो तक देश का शासन चलाया। उसके बाद उन्हें विपक्ष में भी बैठना पड़ा। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। उन पर एक बार जान लेवा हमला भी हुआ जिसमें वे बाल बाल बच गईं लेकिन उस हमले में २० से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो गई। एक बार फिर बांग्लादेश राजनीति के गहरे भँवर में फंस गया और देश की बागडोर सेना-समर्थित सरकार ने संभाल ली। इस सरकार ने शेख हसीना पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और उनका ज्यादातर वक्त हिरासत में ही गुज़रा। इस बीच वे अपने इलाज के लिए अमरीका भी गईं और ये अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि वे जेल से बचने के लिए शायद वापस लौट कर ही ना आएँ। लेकिन वे वापस लौटीं और दो साल के सैनिक शासन समेत सात साल बाद २००८ में हुए संसदीय चुनावों में विजय प्राप्त की।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]