विश्व हिन्दी सचिवालय

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विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीसस के मोका गाँव में स्थित है। सचिवालय, ११ फरवरी २००८ से कार्यरत है।

हिन्दी का एक अन्तर्राष्ट्रीय भाषा के रूप में संवर्द्धन करने और विश्व हिन्दी सम्मेलनों के आयोजन को संस्थागत व्यवस्था प्रदान करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सचिवालय की स्थापना का निर्णय लिया गया। इसकी संकल्पना 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन के दौरान की गई जब मॉरीशस के तत्कालीन प्रधानमंत्री सर शिवसागर रामगुलाम ने मॉरीशस में विश्व हिन्दी सचिवालय स्थापित करने का प्रस्ताव किया।

इस संकल्पना को मूर्त रूप देने के लिए भारत और मॉरीशस की सरकारों के बीच 20 अगस्त 1999 को एक समझौता ज्ञापन सम्पन्न किया गया। 12 नवम्बर 2002 को मॉरीशस के मंत्रिमंडल द्वारा विश्व हिन्दी सचिवालय अधिनियम पारित किया गया और भारत सरकार तथा मॉरीशस की सरकार के बीच 21 नवम्बर 2001 को एक द्विपक्षीय करार सम्पन्न किया गया।

विश्व हिन्दी सचिवालय ने 11 फरवरी 2008 से औपचारिक रूप से कार्य करना आरंभ कर दिया।

संगठन[संपादित करें]

विश्व हिन्दी सचिवालय की एक शासी परिषद (गवर्निंग कौंसिल) तथा एक कार्यकारी मंडल (एग्ज़िक्यूटिव बोर्ड) है। विश्व हिन्दी सचिवालय के महासचिव इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

शासी परिषद[संपादित करें]

विश्व हिन्दी सचिवालय की शासी परिषद में भारत तथा मॉरीशस, दोनों पक्षों, की ओर से 5-5 सदस्य हैं जो निम्नानुसार है

भारत की ओर से
  • विदेश मंत्री
  • मानव संसाधन विकास मंत्री
  • संस्कृति मंत्री
मॉरीशस के ओर से
  • विदेश कार्य, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं सहयोग मंत्री
  • शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्री
  • कला एवं संस्कृति मंत्री
गैर-सरकारी सदस्य

शासी परिषद की बैठक[संपादित करें]

शासी परिषद की प्रथम बैठक, भारत के विदेश मंत्री श्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में 28 जनवरी 2008 को नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक में भारत की ओर से श्री प्रणब मुखर्जी, विदेश मंत्री; श्री अर्जुन सिंह, मानव संसाधन विकास मंत्री; श्रीमती अम्बिका सोनी, संस्कृति मंत्री, डॉ॰ रत्नाकर पांडेय, डॉ॰ आर पी मिश्र, नामित उपमहासचिव, विश्व हिन्दी सचिवालय तथा विदेश मंत्रालय, मानव संसाधन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय के अधिकारीगण उपस्थित थे। मॉरीशस की ओर से श्री डी. गोखुल, शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्री, श्री एम.एम डल्लु, विदेश कार्य, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं सहयोग मंत्री, श्री मुकेश्वर चुन्नी, मॉरीशस के उच्चायुक्त, डॉ॰ (श्रीमती) विनोद बाला अरूण, महासचिव, विश्व हिन्दी सचिवालय, श्री अजामिल माताबदल, श्री सत्यदेव टेंगर तथा भारत में मॉरीशस के उच्चायोग से अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

सचिवालय की शासी परिषद की द्वितीय बैठक 16 मई 2011 को मॉरीशस में लगी। इस अवसर पर भारत की विदेश राज्य मंत्री माननीय श्रीमती प्रणीत कौर एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल के साथ मॉरीशस आईं तथा उन्होंने मॉरीशस के शिक्षा व मानव संसाधन मंत्री माननीय डॉ॰ वसंत कुमार बनवारी के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता की।

कार्यकारी मंडल[संपादित करें]

सदस्य[संपादित करें]

भारत की ओर से
  • सचिव, विदेश मंत्रालय
  • सचिव, मानव संसाधन विकास मंत्रालय
  • सचिव, संस्कृति मंत्रालय
  • मॉरीशस में भारत का उच्चायुक्त
मॉरीशस के ओर से
  • स्थायी सचिव, विदेश कार्य, अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार एवं सहयोग मंत्रालय
  • स्थायी सचिव, शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय
  • स्थायी सचिव, कला एवं संस्कृति मंत्रालय
  • स्थायी सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय, मॉरीशस

कार्यकारी मंडल की बैठक[संपादित करें]

कार्यकारी मंडल की प्रथम बैठक श्री आर पी अग्रवाल, सचिव (उच्चतर शिक्षा), मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार की अध्यक्षता में 24-25 मई को मॉरीशस में आयोजित की गई। बैठक में भारत की ओर से श्री आर पी अग्रवाल, सचिव (उच्चतर शिक्षा), मानव संसाधन मंत्रालय, श्री वीपी हरन, संयुक्त सचिव, विदेश मंत्रालय, श्री आर सी मिश्र, संयुक्त सचिव, संस्कृति मंत्रालय, श्री बी जयशंकर, मॉरीशस में भारत के उच्चायुक्त उपस्थित थे और मॉरीशस की ओर से श्री एस रेगन, स्थायी सचिव, शिक्षा एवं मानव संसाधन मंत्रालय, श्री एन के बल्लाह, स्थायी सचिव, कला एवं संस्कृति मंत्रालय, श्री वी चितू, प्रथम सचिव, विदेश कार्य मंत्रालय, श्रीमती एस बहादुर, सहायक सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय तथा डॉ॰(श्रीमती) विनोद बाला अरूण, महासचिव, विश्व हिन्दी सचिवालय उपस्थित थे।

महासचिव[संपादित करें]

भारत सरकार तथा मॉरीशस की सरकार के बीच सम्पन्न द्विपक्षीय करार के अनुसार विश्व हिन्दी सचिवालय का प्रथम महासचिव मॉरीशस से होगा और इसका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। तद्नुसार मारीशस से डॉ॰(श्रीमती) विनोद बाला अरूण की विश्व हिन्दी सचिवालय की प्रथम महासचिव के रूप में नियुक्त की गई है।

डॉ॰ अरुण ने जनवरी 2010 में अपना कार्यकाल समाप्त किया जिसके उपरांत उप-महासचिव डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद मिश्र को महासचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार सोंपा गया। फरवरी 2011 में डॉ॰ मिश्र का कार्यकाल सम्पन्न हुआ तथा अगस्त 2011 तक श्री गंगाधरसिं सुखलाल कार्यवाहक महासचिव रहे।

29 अगस्त 2011 से श्रीमती पूनम जुनेजा ने तीन वर्षोँ के लिए महासचिव पद ग्रहण किया। इससे पूर्व श्रीमती जुनेजा भारत में संसदीय राजभाषा समिति के सचिव रही हैं।

उपमहासचिव[संपादित करें]

भारत सरकार तथा मॉरीशस की सरकार के बीच सम्पन्न द्विपक्षीय करार के अनुसार विश्व हिन्दी सचिवालय का प्रथम उपमहासचिव भारत से होगा और इनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा। तद्नुसार भारत से डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद मिश्र की विश्व हिन्दी सचिवालय के प्रथम उपमहासचिव के रूप में नियुक्त किये गए। डॉ॰ विनोद बाला अरुण का कार्यकाल समाप्त होने पर डॉ॰ राजेंद्र प्रसद मिश्र को महासचिव पद का अतिरिक्त कार्यभार सौपा गया तथा मॉरीशस सरकार के ओर से श्री गंगाधरसिंह गुलशन सुखलाल उप-महासचिव पद पर नियुक्त हुए।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "शासी परिषद के वर्तमान सदस्य". vishwahindi.com. पाठ "http://www.vishwahindi.com/hi/governing_council.aspx" की उपेक्षा की गयी (मदद); नामालूम प्राचल |access date= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); गायब अथवा खाली |url= (मदद)