"सिवनी ज़िला" के अवतरणों में अंतर

Jump to navigation Jump to search
1 बैट् जोड़े गए ,  2 वर्ष पहले
सम्पादन सारांश रहित
इस वृक्ष का उपयोग ढोलक बनाने में किया जाता है। यह जिला सतपुड़ा पर्वत के उत्तर-दक्षिण में स्थित हैं।यह जिला इमारती लकड़ी का मुख्य स्रोत है। सागौन इस जिले में मुख्य रूप से पाया जाता है।
[[सिवनी जिला]] मुख्यालय नागपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 और जबलपुर नागपुर के बीच स्थित है।
जिले का कुल क्षेत्रफल 8758 वर्ग कि.मी.. है। ओर कुल ग्रामपंचायत 645 है। कुल ग्राम 1,599 है। 1 नगर पालिका सिवनी, है नगर पंचायत 2 है [[लखनादौन]], बरघाट है।
== इतिहास==
सिवनी जिले के नामकरण के संबंध में जिले में अनेक दंतकथायें एवं धारणायें प्रचलित है। इतिहास के पृष्ठों में यह जिला मंडला के गौंड राजाओं के 52 गंढों में से एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। नगर मुख्यालय में तीन गढ चावडी, छपारा और आदेगांव प्रमुख थे। गौंड राजाओं के पतन के पश्चात सन 1700 ई. में नागपुर के भोसले के साम्राज्य के अधीन आ गया। सत्ता का केन्द्र छपारा ही था। सन् 1774 में छपारा से बदलकर मुख्यालय सिवनी हो गया। इसी समय दीवानगढी का निर्माण हुआ और सन् 1853 में मराठों के पतन एवं रघ्घुजी तृतीय की मृत्यु निःसंतान होने के कारण यह क्षेत्र ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रभाव में आ गया। सन् 1857 की क्रान्ति के पश्चात कम्पनी का समस्त शासन ब्रिटिश हुकूमत के अधीन हो गया। मुख्यालय में दीवान साहब का सिवनी ग्राम, मंगलीपेठ एवं भैरोगंज ग्राम मिलकर सिवनी नगर बना। इसके बाद सन् 1867 में सिवनी नगरपालिका का गठन हुआ। सिवनी में वनोपज हर्रा, बहेडा, आंवला एवं महुआ बहुतायात में होता है। महुआ का अधिक उत्पादन होने के कारण सन् 1902 में डिस्लरी का निर्माण हुआ। सन् 1909 तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर श्लोकाक विस्तार करते हुए रेल्वे लाईन का विचार किया। सन् 1904 में बंगाल नागपुर नैरोगेज रेल्वे का आगमन हुआ। सन् 1938 में बिजली घर के निर्माण ने नगर में एक नये युग का सूत्रपात किया। नगर की गलियां और घर बिजली की रोशनी से जगमगा उठे।
161

सम्पादन

दिक्चालन सूची