"सिवनी ज़िला" के अवतरणों में अंतर

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| जनगणना का वर्ष = 2011
| जनगणना स्तर =
| जनसंख्या = 10213,343 79,131
| घनत्व =
| क्षेत्रफल =
[[सिवनी जिला]] मुख्यालय नागपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 7 और जबलपुर नागपुर के बीच स्थित है।
जिले का कुल क्षेत्रफल 8785 वर्ग कि.मी.. है।
== इतिहास==
इस जिले को 4 राजस्व सबडिवीजन सिवनी, लखनादौन, केवलारी, घंसौर और 8 तहसील में बांटा गया है, जिसमे
सिवनी जिले के नामकरण के संबंध में जिले में अनेक दंतकथायें एवं धारणायें प्रचलित है। इतिहास के पृष्ठों में यह जिला मंडला के गौंड राजाओं के 52 गंढों में से एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। नगर मुख्यालय में तीन गढ चावडी, छपारा और आदेगांव प्रमुख थे। गौंड राजाओं के पतन के पश्चात सन 1700 ई. में नागपुर के भोसले के साम्राज्य के अधीन आ गया। सत्ता का केन्द्र छपारा ही था। सन् 1774 में छपारा से बदलकर मुख्यालय सिवनी हो गया। इसी समय दीवानगढी का निर्माण हुआ और सन् 1853 में मराठों के पतन एवं रघ्घुजी तृतीय की मृत्यु निःसंतान होने के कारण यह क्षेत्र ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रभाव में आ गया। सन् 1857 की क्रान्ति के पश्चात कम्पनी का समस्त शासन ब्रिटिश हुकूमत के अधीन हो गया। मुख्यालय में दीवान साहब का सिवनी ग्राम, मंगलीपेठ एवं भैरोगंज ग्राम मिलकर सिवनी नगर बना। इसके बाद सन् 1867 में सिवनी नगरपालिका का गठन हुआ। सिवनी में वनोपज हर्रा, बहेडा, आंवला एवं महुआ बहुतायात में होता है। महुआ का अधिक उत्पादन होने के कारण सन् 1902 में डिस्लरी का निर्माण हुआ। सन् 1909 तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर श्लोकाक विस्तार करते हुए रेल्वे लाईन का विचार किया। सन् 1904 में बंगाल नागपुर नैरोगेज रेल्वे का आगमन हुआ। सन् 1938 में बिजली घर के निर्माण ने नगर में एक नये युग का सूत्रपात किया। नगर की गलियां और घर बिजली की रोशनी से जगमगा उठे।
#सिवनी
सन् 1939 से 1945 के मध्य द्वितीय विश्व युद्व ने अंग्रेजी साम्राज्य की जडे हिला दी।
#[[लखनादौन]]
नागपुर से जबलपुर एन.एच. 7 के मध्य सिवनी ना केवल प्रमुख व्यापारिक केन्द्र था बल्कि जंगल अधिक होने के कारण अंग्रेजों के लिए सुरक्षित स्थान भी था। महात्मा गांधी के अथक प्रयासों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अमर बलिदान से 15 अगस्त 1947 को हमारा देश स्वतंत्र हुआ।
#[[केवलारी]]
सिवनी जिला सन् 1956 में पुनः जिला बना। जिला बनने पर प्रथम कलेक्टर श्री ए.एस. खान पदस्थ हुए।
#[[घंसौर]]
== जिले की प्रशासनिक संरचना ==
#[[छपारा]]
सिवनी नगर इस जिले का मुख्यालय है||इस जिले में 8 तहसीले (1) सिवनी,(2) बरघाट,(3) केवलारी,(4) [[लखनादौन]],(5) धनौरा,(6) घंसौर,(7) [[छपारा]] , (8) कुरई है | संपूर्ण जिला 8 विकासखंडो (1) सिवनी,(2) बरघाट,(3) केवलारी,(4) लखनादौन,(5) धनौरा,(6) घंसौर,(7) छपारा , (8) कुरई में विभक्त है , जिनमे 5 विकासखंड (1) लखनादौन,(2) धनौरा,(3) घंसौर,(4) छपारा,(5) कुरई एवं 3 सामुदायिक विकासखंड (1) सिवनी,(2) बरघाट,(3) केवलारी है |
#[[कुरई]]
#[[बरघाट]]
#[[धनौरा]] है
 
जिले की विधानसभा
#[[सिवनी]]
#[[बरघाट]]
#[[केवलारी]]
#[[लखनादौन]] है
जिले के लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है।
यह के पड़ोसी जिले उत्तर दिश की ओर [[जबलपुर]],मंडला, नरसिँहपुर जिले है पूर्व दिशा कि ओर [[बालाघाट जिला]] पश्चिम दिश की ओर [[छिंदवाड़ा ज़िला]] और दक्षिण दिशा कि ओर [[नागपुर]] हैं।
==पेंच राष्ट्रीय उद्यान==
जिले का मुख्य आकर्षण पेंच टाइगर सेंचुरी है जो [[जबलपुर]] से 192 और [[नागपुर]] से 92 कि॰मी॰ की दूरी पर है।
सिवनी जिले में पर्यटन के रूप में पेंच राष्ट्रीय उद्यान प्रसिद्व है। पेंच राष्ट्रीय उद्यान में भ्रमण के लिए जाने के लिए दो गेट है। पहला गेट सिवनी से नागपुर रोड पर 20 कि.मी. ग्राम सुकतरा से पश्चिम दिशा में लगभग 20 कि.मी. की दूरी पर ग्राम कर्माझिरी से तथा दूसरा सिवनी से नागपुर रोड पर सिवनी से 50 कि.मी. की दूरी पर ग्राम खवासा से 12 कि.मी. पश्चिम में टुरिया ग्राम से भ्रमण की सुविधा में है। दोनो गेट पर वन विभाग, पर्यटन विभाग एवं प्राइवेट होटल एवं वाहनों की सुविधा पर्यटकों के लिए उपलब्ध रहती है। पार्क माह अक्टूबर से पर्यटकों के भ्रमण के लिए खोला जाता है तथा जून- जुलाई के बाद भ्रमण बंद कर दिया जाता है। पेंच राष्ट्रीय उद्यान में बाघ, नीलगाय, बारहसिंगा, हिरन, मोर, बन्दर, काले हिरन, सांभर, जंगली सुअर, सोनकुत्ता एवं अन्य जानवर तथा अनेक प्रकार के पक्षी बहुतायत में पाये जाते है। उद्यान के बीचों बीच से पेंच नदी बहती है। नदी पर एक छोटा सा तालाब है, जिस पर तोतलाडोह बांध भी बना हुआ है जहां पर बिजली बनाई जाती है एवं मछली पालन भी किया जाता है। इसकी स्थापना 1984 में की गई थी।
इसके पयर्टन का उत्कृष्ट मौसम मार्च से जून है।
राष्ट्रीय उद्यान की शुरूआत 1 अक्टूबर से और बंद 30 जून को होता हैं। मौसमः मार्च से जून
[[पेंच राष्ट्रीय उद्यान]]
757.85 किलोमीटर पर फैला है यह बफर जोन के अन्तर्गत आता है [[पेँच नदी]] इसी राष्ट्रीय उद्यान से होकर गई जिससे जंगली जानवर के लिए ये नदी जीवनदायनी से कम नहीं हैं। इस बाघ अभ्यारण में बाघ, नीलगाय, बारहसिंगा, हिरन, मोर, बन्दर, काले हिरन, सांभर, जंगली सुअर, सोनकुत्ता एवं अन्य जानवर तथा अनेक प्रकार के पक्षी बहुतायत में पाये जाते है। खासकर बाघ को देखेने पर्यटक दूर दूर से आते हैं।
 
== मोँगली लैँड ==
[[नोबेल पुरस्कार]] विजेता [[रुडयार्ड किपलिंग]] जब भारत लौटे और लगभग अगले साढ़े छह साल तक यहीं रह कर काम किया।लिखी गयी कहानी [[द जंगल बुक]] जंगल बुक के कथानक में मोगली नामक एक बालक है जो जंगल में खो जाता है और उसका पालन पोषण भेड़ियों का एक झुंड करता है, अंत में वह गाँव में लौट जाता है।
 
==जनसांख्यिकी==
सन् 2001 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या 1166608 है। जिसमें 1045921 ग्रामीण एवं 120687 शहरी जनसंख्या है। जिले में 429104 अनुसूचित जनजाति के लोग13,79,131 है।
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