वार्ता:मुहम्मद

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विकिपीडिया: मैनुअल ऑफ स्टाइल (इस्लाम से संबंधित लेख)#मुहम्मद[संपादित करें]

मुहम्मद के लिए कई सम्मान हैं जो आमतौर पर लेखों में उपयोग नहीं किए जाने चाहिए। इस्लाम के लेख में मुहम्मद इन सम्मानों पर अधिक विस्तार से चर्चा करते हैं, जिनमें सबसे आम हैं:

  • पैगंबर या (द) पवित्र पैगंबर (एक लोअरकेस 'एच' के साथ) के स्थान पर, या पूर्ववर्ती, "मोहम्मद"; या सिर्फ पैगंबर "मुहम्मद" से पहले - अनुशंसित कार्रवाई को सरल और NPOV को सिर्फ "मुहम्मद" को सरल बनाना है, सिवाय इसके कि यह किसी लेख में पहला संदर्भ, या लीड में पहला संदर्भ है, जिस स्थिति में इसे "इस्लामी" के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। पैगंबर मुहम्मद "यदि आवश्यक हो।
  • PBUH, या फुलर "शांति उस पर हो", मुहम्मद या अन्य इस्लामी पैगंबर के बाद - अनुशंसित कार्रवाई को हटाने के लिए है।
  • SAW, SAWW, आरी या फुलर संस्करण'allā 'llahu SAalayhi (वा-waālihi) वा-सल्लम, PBUH के वेरिएंट, कभी-कभी "मुहम्मद" के बाद उपयोग किया जाता है - अनुशंसित कार्रवाई को हटाने के लिए है।

https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:Manual_of_Style/Islam-related_articles#Muhammad
--Snehashishphilip (वार्ता) 15:23, 6 मई 2019 (UTC)

विकिपीडिया: विकिपीडिया क्या नहीं है#विकिपीडिया सेंसर नहीं है[संपादित करें]

कुछ मुस्लिम समुदायों में मुहम्मद को चित्रित करने का निषेध है। यह निषेध मुस्लिम समुदायों के बीच सार्वभौमिक नहीं है। चर्चा के लिए, इस्लाम में मोहम्मद और विसंगति के चित्रण देखें।

विकिपीडिया किसी भी धार्मिक निषेधों से बाध्य नहीं है। विकिपीडिया एक विश्वकोश है जो तटस्थ दृष्टिकोण से सभी विषयों का प्रतिनिधित्व करने का प्रयास करता है, और इसलिए किसी विशेष समूह के लाभ के लिए विकिपीडिया सेंसर नहीं है। इसलिए जब तक वे लेख के लिए प्रासंगिक हैं और विकिपीडिया की मौजूदा नीतियों में से किसी का भी उल्लंघन नहीं करते हैं, न ही उन स्थानों के कानून जहां विकिपीडिया के सर्वर होस्ट किए गए हैं, विकिपीडिया से कोई भी सामग्री या चित्र नहीं निकाले जाएंगे क्योंकि लोग उन्हें आपत्तिजनक या आपत्तिजनक पाते हैं। (यह भी देखें: विकिपीडिया: सामग्री अस्वीकरण)

इसमें विकिपीडिया इस्लाम से बाहर नहीं है। ऐसी सामग्री है जो अन्य धार्मिक लोगों के लिए समान रूप से अपमानजनक हो सकती है, जैसे कि 1868 में बहुआयुह में दिखाई गई तस्वीर (बहाई आस्था के अनुयायियों के लिए आक्रामक), या ज़ेनू में साइंटोलॉजी के "गुप्त सिद्धांत" के लिए आक्रामक (आक्रामक) साइंटोलॉजी के अनुयायियों), या मानव विकास की समयरेखा पर खाता (युवा पृथ्वी निर्माण के अनुयायियों के लिए आक्रामक)। इन सभी विभिन्न संवेदनाओं को प्रस्तुत करना एक तटस्थ विश्वकोश को लिखना असंभव बना देगा। मुहम्मद के चित्रण की सटीकता के बारे में कोई दावा नहीं किया गया है। इन चित्रों को चित्रित करने वाले कलाकार मुहम्मद के सैकड़ों साल बाद रहते थे और उन्हें खुद नहीं देख सकते थे। यह तथ्य छवि कैप्शन में बिल्कुल स्पष्ट किया गया है। चित्र विधिवत रूप से मुहम्मद को दर्शाती 14 वीं से 17 वीं शताब्दी की मुस्लिम कलाकृति के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं, न कि समकालीन चित्रों के रूप में। मुहम्मद के चित्रण के लिए मुस्लिम कलाकृति की अधिक विस्तृत चर्चा के लिए मुहम्मद के चित्रण देखें।

इसी तरह की कलात्मक व्याख्याओं का उपयोग होमर, शारलेमेन, पॉल ऑफ टार्सस और कई अन्य ऐतिहासिक आंकड़ों के लिए लेखों में किया जाता है। जब कोई सटीक चित्र (अर्थात जीवन के बाद चित्रित, या तस्वीरें) मौजूद हैं, तो विकिपीडिया पर यह एक लंबे समय से प्रचलित चित्र है जिसमें ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण कलाकृति और / या लोकप्रिय चित्रण के विशिष्ट उदाहरण शामिल हैं। ऐसे चित्रों का उपयोग करना, जिन्हें पाठक कलात्मक निरूपण समझते हैं, इसलिए जब तक वे चित्र प्रभावी ढंग से विषय का वर्णन नहीं करते हैं, तब तक उन्हें बिना किसी छवि का उपयोग किए अधिक शिक्षाप्रद माना जाता है। अनियमितता के संदर्भ में यादृच्छिक हाल के चित्रणों को अनुचित रूप से हटाया जा सकता है, जबकि ऐतिहासिक कलाकृति (इस मामले में, लेट मध्यकालीन या ओटोमन काल की) ने इस बात की प्रस्तुति में महत्वपूर्ण रूप से जोड़ा है कि कैसे मुहम्मद को पूरे इतिहास में सामयिक बनाया जा रहा था।

ये चित्रण मुहम्मद के चेहरे के तथ्यात्मक प्रतिनिधित्व के रूप में नहीं हैं; बल्कि, वे केवल कलाकारों की धारणाएं हैं। इस तरह के चित्रण आम तौर पर एक विशेष घटना के एक निश्चित पहलू को व्यक्त करते हैं, सबसे आम तौर पर इस घटना को, या शायद अधिनियम, इतिहास चित्रकला की पश्चिमी शैली के समान। इस प्रकार, चित्रण एक आधुनिक तस्वीर के अर्थ में सटीक होने के लिए नहीं हैं, और यहाँ प्रस्तुत हैं कि वे क्या हैं: अभी तक एक और रूप जिसमें मुहम्मद को चित्रित किया गया था।

इन चित्रों में से कोई भी लेख में एक केंद्रीय स्थिति नहीं रखता है, जैसा कि उनके स्थान से स्पष्ट है, और न ही वे विषय का अपमान करने का प्रयास कर रहे हैं। ईसाई धर्म के कई धड़े हैग्राफिक इमेजरी (यहां तक ​​कि इस पर लड़ाई के बिंदु तक) के उपयोग का विरोध करते हैं, लेकिन चित्र अभी भी विकिपीडिया पर हैं, वास्तव में वे क्या हैं - यानी। उक्त लोगों की कलात्मक प्रस्तुतियाँ।
https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:What_Wikipedia_is_not#Wikipedia_is_not_censored
--Snehashishphilip (वार्ता) 15:33, 6 मई 2019 (UTC)

लेख में पूर्ण रूप से तब्दीली ज़रूरी है[संपादित करें]

सदस्यों से गुज़ारिश है कि, यह लेख विकी शैली में नहीं बल्कि वार्तापत्र लेख रूप में लग रहा है। इसे संपूर्ण रूप से विकी शैली में लिखने की ज़रूरत है। अगर सदस्य इजाज़त दें तो मैं चाह्ता हूं कि इस्को शुरू से अंग्रेजी विकी से अनुवाद करूं या फिर विकी शैली में लिखूं। मनोज खुराना, सदस्य:सत्यम् मिश्र जी ज़रा बतायें। --अह्मद निसार (वार्ता) 11:35, 26 जुलाई 2016 (UTC)

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हज़रत मुहम्मद का जीवान[संपादित करें]

हज़रत मुहम्मद[محمد صلی اللہ علیہ و آلہ و سلم] का जन्म सन ५७० इसवी में हुआ था। इन्होंने इस्लाम धर्म का प्रवर्तन किया । ये इस्लाम के सबसे महान नबी और आख़िरी सन्देशवाहक (अरबी: नबी या रसूल , फ़ारसी : पैग़म्बर) माने जाते हैं जिन को अल्लाह ने फ़रिश्ते जिब्राएल द्वारा क़ुरआन का सन्देश' दिया था । मुसलमान इनके लिये परम आदर भाव रखते हैं । ये इस्लाम के आख़री ही नहीं बल्कि सबसे सफल संदेशवाहक भी माने जाते है। मुहम्मद वह श्ख़स हैं जिन्होने हमेशा सच बोला और सच का साथ दिया । इनके दुश्मन भी इनको सच्चा कहते थे और ये बात इतिहास में पहली बार मिलती है । मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) का जन्म अरब के रेगिस्तान में मुस्लिम इतिहासकारों के अनुसार 20 अप्रैल 571 ई. में हुआ। मुहम्मद (सल्ललाहु अल्लहि वसल्लम) के पिता का नाम अब्दुल्लह और उनकी माता का नाम अमीना था। ‘मुहम्मद’ का अर्थ होता है ‘जिस की अत्यन्त प्रशंसा की गई हो।’ मेरी नज़र में आप अरब के सपूतों में महाप्रज्ञ और सबसे उच्च बुद्धि के व्यक्ति हैं। क्या आपसे पहले और क्या आप के बाद, इस लाल रेतीले अगम रेगिस्तान में जन्मे सभी कवियों और शासकों की अपेक्षा आप का प्रभाव कहीं अधिक व्यापक है।जब आप पैदा हूए अरब उपमहीद्वीप केवल एक सूना रेगिस्तान था। मुहम्मद(सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की सशक्त आत्मा ने इस सूने रेगिस्तान से एक नए संसार का निर्माण किया, एक नए जीवन का, एक नई संस्कृति और नई सभ्यता का। आपके द्वारा एक ऐसे नये राज्य की स्थापना हुई, जो मराकश से ले कर इंडीज़ तक फैला और जिसने तीन महाद्वीपों-एशिया, अफ़्रीक़ा, और यूरोप के विचार और जीवन पर अपना अभूतपूर्व प्रभाव डाला।

मुहम्मद(सल्ललहु अल्लेहि व सल्लम) का बचपन[संपादित करें]

अरब का मशहूर रिवाज थ के जैसे ही बच्चा पैदा होता तो उसे पर्वरिश के लिये अरब के कंजर दूध पिलाने वाली धाय के पास भेज देते थे ताकि बच्चे एक खुले और स्वस्थ् वातावरण मे पर्वरिश हो और बदले मे मक्का के लोग इन्हे पैसे दे देते। मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) कि धाय का नाम "हलीमा" था। जब वो मक्का आये बच्चे लेने तब सख्त केहेर था और हलीमा के परिवार के लिये खाने पीने के लिये कुछ नही था। उन्के साथियो को बच्चे मिल गये पर उन्हे कोई नही मिला। लौट रहे थे तो मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) को ले जाने का प्रस्ताव आया। बच्चा का बाप नही था इस्लिये वो हिच किचा रहे थे। आखिर मे उन्हे लगा के खालि हाथ जाने से बेहतर है कि इस बच्चे को ले जाये। इतिहास गवाह है कि मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) को साथ ले जाने से हलीमा के घराने मे बहुत बद्लाव आया। वह बच्चा उनके लिये शुभ साबित हुवा। घर मे खाने कि कमी खत्म हो गयी। उन्हे लगने लगा कि यह बच्चा अल्लह कि तरफ से आशीर्वाद था। मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) उन्के साथ ४-५ साल तक रहे। सहिह मुस्लिम मे वर्णन है कि जब वो हलीमा के साथ रह्ते थे तो एक दिन जिब्राईल (अलैहि वसल्लाम) नामक एक फरिश्ता उन्के पास आये और उनका सीना खोल्र कर दिल को निकाल कर उस मे से एक छोटासा खून का थक्का निकाला और कहा कि वो तुमारे अन्दर शैतान का हिस्सा है। जिब्राईल (अलैहि वसल्लाम) ने उनके दिल को ज़म्ज़म से सोने के बर्तन मे धोया आस पास बच्चे जो खेल रहे थे वो उनकी धाय को जा कर केह्ते है कि मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) को किसि ने खतल् दिया उन्की धाय दौद कर उनके पास आते है और देखते है कि वो बिल्कुल स्वस्त है। लेकिन अनस (रज़ि अल्लहु अनुहु)केह्ते है कि उनके बाँए छति पर एक निशान था। आत्मसंयम एवं अनुशासन भी थे ‘‘जो अपने क्रोध पर क़ाबू रखते है।’’ क़ुरआन, 3:134) एक क़बीले के मेहमान का ऊँट दूसरे क़बीले की चरागाह में ग़लती से चले जाने की छोटी-सी घटना से उत्तेजित होकर जो अरब चालीस वर्ष तक ऐसे भयानक रूप से लड़ते रहे थे कि दोनों पक्षों के कोई सत्तर हज़ार आदमी मारे गए, और दोनों क़बीलों के पूर्ण विनाश का भय पैदा हो गया था, उस उग्र क्रोधातुर और लड़ाकू क़ौम को इस्लाम के पैग़म्बर ने आत्मसंयम एवं अनुशासन की ऐसी शिक्षा दी, ऐसा प्रशिक्षण दिया कि वे युद्ध के मैदान में भी नमाज़ अदा करते थे। उनका बेदाग़ आचरण था। जवानी मे ही उनहे धयान करते थे। वो घटें गार रे हिरा मे बैठते थे। जब वुन्हे पहली बार जिब्राएल (अल्लेहिस सल्लम) के ज़रीये सन्देशा दिया तो वो बहुत डर गये थे। वो दौड़ते हुवे अपनी पत्नी खतिजा के पास जाते है और उन्हे जिब्रएल के बारे मे बताते है।

क़ुरान का आना[संपादित करें]

पेहली बार सन्देशा आने के बाद कुछ दिन थक उनहे सन्देशा आना बंन्द हो गया था बाद मे वो दुखी हो गये थे। उन्होने पहाड़ो से कुद ने की भी कोशिश की पर हर बार जिब्राएल (अल्लेहि व सल्लम) उन्हे रोक लेते थे और केहते की आप अल्लह के सन्देशवाहक है तब वो शांति से वापस आ जाते और तब से जब भी सन्देशा आने मे देर हो जता तो वो वही करते और हर बार जिब्रएल वही केहते। पेहले उन्की पत्नि ने इस्लाम क़ुबूल किया। कुछ साल बाद मुहम्मद (सल्ललहु अल्लेहि वसल्लम) अपने घर मे अपने खरीबि रिशतेदारो जैसे ज़ैद(रज़ि अल्लहु अन्हु) जो उन्की बेटी फातिमा के पति थे और उन्की बेटी को भी बुलाया और इस्लाम के बारे मे केहने लगे। उन साब लोगो ने इस्लाम क़ुबूल किया और वो मुसल्मान बन गये। मुहम्मद(सल्लहु अल्लेहि व सल्लम) मुसल्मानो को अपनी आत्म को पवित्र रखना ज़िन्दागी की ऐश जैसे शराब,जुवा से साब दुर रहने के लिये कहा गया। सारा क़ुरान आने के लिये २३ साल लगे थे नमाज़ पड़ने का हुक्म अल्लाह ने पेहले नही बताया गया पर जब मुहम्मद(सल्लहु अल्लेहि व सल्लम) आस्मान मे जाते है मिराज के लिये तब अल्लह उनहे ५ वक़्त कि नमज़ पड़ने का हुक्म देते है।

इस्लाम के ५ स्तम्ब है[संपादित करें]

साक्षी होना (शहादाह)- इस का शाब्दिक अर्थ है गवाही देना। इस्लाम में इसका अर्थ मे इस अरबी घोषणा से हैः अरबी:لا اله الا الله محمد رسول الله हिन्दी: अल्लाह् के सिवा और कोई पूजनीय( एबादत ) (पूजा के योग्य) नहीं और मुहम्मद (सल्लल्लहु अलैहि वस्सल्लम्) अल्लह् के रसूल हैं। इस घोषणा से हर मुसलमान ईश्वर की एकेश्वरवादिता और मुहम्मद (सल्लहु अल्लेहि व सल्लम) के रसूल होने के अपने विश्वास की गवाही देता है। यह इस्लाम का सबसे प्रमुख सिद्धांत है। हर मुसलमान के लिये अनिवार्य है कि वह इसे स्वीकार करे। एक गैर-मुस्लिम को इस्लाम स्वीकार करने के लिये केवल इसे स्वीकार कर लेना पर्याप्त है। प्रार्थना (सलात)- इसे हिन्दुस्तानी में नमाज़ भी कहते हैं। यह एक प्रकार की प्रार्थना है जो अरबी भाषा में एक विशेष नियम से पढ़ी जाती है। इस्लाम के अनुसार नमाज़ ईश्वर के प्रति मनुष्य की कृतज्ञता दर्शाती है। यह मक्का की ओर मुँह कर के पढ़ी जाती है। हर मुसलमान के लिये दिन में ५ बार नमाज़ पढ़ना अनिवार्य है। विवशता और बीमारी की हालत में इसे नई टाला जा सकता है। दान (ज़कात)- यह एक वार्षिक दान है जो कि हर आर्थिक रूप से सक्षम मुसलमान को निर्धनों को देना अनिवार्य है। अधिकतर मुसलमान अपनी वार्षिक आय का २.५% दान में देते हैं। यह एक धार्मिक कर्तव्य इस लिये है क्योंकि इस्लाम के अनुसार मनुष्य की पून्जी वास्तव में ईश्वर की देन है। और दान देने से जान और माल कि हिफा.जत होती हे । व्रत (रमज़ान्) (सौम)- इस के अनुसार इस्लामी कैलेण्डर के नवें महीने में सभी सक्षम मुसलमानों के लिये (फ.जर्)है । वस वकीये के बाद मुहम्मद(सलल्लाहु अलेहि वसलम) को अल्लह की तरफ से सन्देशा आना शुरु हो गये।

तटस्थ दृष्टिकोण[संपादित करें]

विकिपीडिया की नीति तटस्थ दृष्टिकोण देना है और हर बार संबंधित व्यक्ति के साथ सल्ललाहु अलैही व सल्लम जैसे अनावश्यक शीर्षक जोड़ना नहीं है। यह किसी भी व्यक्ति के प्रचार के लिए नहीं है। दुनिया केवल मुसलमानों की नहीं है। कई अन्य धर्म और कई अन्य लोग हैं जो अलौकिक निरर्थक घटनाओं में विश्वास नहीं करते हैं और वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करते हैं।--Snehashishphilip (वार्ता) 18:48, 1 मई 2019 (UTC)

विकिपीडिया की नीति तटस्थ दृष्टिकोण देना है ये आपने सही कहा लेकिन एक बार भी सल्ललाहु अलैही व सल्लम लिखना मना कहाँ है जो इस्लाम कि मान्यता है और अन्य धर्मीय लोगोंका सवालही नही वे मुहम्मद सल्ल. के चरीत्र के बारे में पढते हैं आप उनको भी घसीट रही हैं और इस्लाम में मुहम्मद सल्ल. का फोटो निषिद्ध है तो फोटो डालकर आप जानभुजकर क्यों वाचकों को गलत जानकारी दे रही हो. Jamirlagiwale (वार्ता) 10:16, 4 मई 2019 (UTC)

@Snehashishphilip: जी, जेसै की आपने लिखा अन्य लोग हैं जो अलौकिक निरर्थक घटनाओं में विश्वास नहीं करते हैं और वैज्ञानिक स्वभाव विकसित करते हैं। तो वह अपने इसी नजरिए से देखें और पढ़ें और मुझे लगता है कि आप भी इसी तथ्यों में विश्वास करतें है। लेकिन आप विकीपीडिया की उल्लेखनीयता को नही बदल सकते। जिस शब्द को आपने बार बार हटाया वह कोई प्रचार सामग्री नही है। चाहें आप कितनी बार हटायें इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता क्योकि लेख को पहली स्थिति में करने में हमें केवल दस सेकंड लगते और आपको हटाने में अधिक समय लगता है। और आपका प्रतिएक सम्पादन एक ही लेख और एक ही उद्देश्य पर प्रकाशित किया गया है। जिससे आपकी भावनाओं तथा स्वभाव का पता चलता है। -जे. अंसारी वार्ताAnimalibrí.gif 17:05, 4 मई 2019 (UTC)
@J ansari:@Jamirlagiwale: विकिपीडिया की जीवनी शैली दिशा-निर्देश सभी पैमानों को छोड़ने की सलाह देते हैं, जैसे कि पैगंबर, (द) पवित्र पैगंबर, (pbuh), या (SAW), जो मुहम्मद के नाम से पहले या अनुसरण करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कई संपादक इस तरह के सम्मानों को एक तटस्थ दृष्टिकोण के बजाय इस्लामी दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के रूप में मानते हैं जिसे बनाए रखने के लिए विकिपीडिया की आवश्यकता है। विकिपीडिया: नामकरण परंपराओं (लोगों) को पैगंबर जैसे उपाधियों या सम्मानों के उपयोग के खिलाफ भी सिफारिश की जाती है, जब तक कि यह असंतोष से निपटने का सबसे सरल और सबसे तटस्थ तरीका नहीं है। जब छूट आवश्यक है, तो अनुशंसित रूप इस्लामी पैगंबर मुहम्मद है।

सभी भाषाओं में विकिपीडिया पर इस नीति का पालन किया जाता है। नीति के लिए नीचे दिए गए लिंक देखें:
https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:Manual_of_Style/Islam-related_articles#Muhammad

https://en.wikipedia.org/wiki/Talk:Muhammad#The_name_of_the_Prophet_Muhammad_(PBUH)
पृथ्वी पर 76% से अधिक आबादी है जो गैर-मुस्लिम है।मुसलमानों के लिए मुहम्मद के चित्र निषिद्ध हो सकते हैं (हालांकि यह 13 वीं शताब्दी ईस्वी तक उपयोग में था), लेकिन गैर-मुस्लिमों के लिए नहीं।


--Snehashishphilip (वार्ता) 15:21, 6 मई 2019 (UTC)

@Snehashishphilip: विकिपीडिया सभी विषयों पर प्रामाणिक और उपयोग, परिवर्तन व पुनर्वितरण के लिए स्वतन्त्र ज्ञानकोश बनाने का एक बहुभाषीय प्रकल्प है। यह यथासम्भव निष्पक्ष दृष्टिकोण वाली सूचना प्रसारित करने के लिए कृतसंकल्प है। विकिपीडिया किसी भी धर्म को बढ़ाबा नहीं देता। सभी धर्मो के धर्मग्रंथों अथवा धर्मगुरुओं पर सम्मानजनक सामग्री प्रदान करता है और ना ही किसी धर्म अथवा विषेस के विरुद्ध सामग्री पोस्ट करता है और ना करने देता। किउंकि किसी भी व्यक्ति की आस्थ को ठेस ना पहुंचे। और जो सन्दर्भ आपने नामों बारे में दिए है वह विकी के किसी काम के नही है जैसा की हिंदी विकी अंग्रेजी विकी या अन्य विकी के अनुसार नहीं चलता हिंदी विकी के खुद निति नियम और मापदंड है। आपकी दृष्टि के अनुसार, पैगंबर, महात्मा, हज़रत, जी, सहाब, श्री, सल्ललाहु अलैही व सल्लम, साहिब, गुरु, आदि सम्मानजनक शीर्षक प्रचार सामग्री में आते है तो इसे अपने नज़रिया से ऐसे ही पढ़े और देखे विकिपीडिया को अपनी विचारधारा और विचारों के प्रभावित ना करें। जहाँ तक आपकी चित्रों संबंधित समस्या है तो सकरात्मक चित्र और सामग्री अच्छे संदर्भ के साथ प्रस्तुत करें अन्यथा आपके दुवारा जोड़ी गई सामग्री को हटा दिया जायेगा और यह पर अंग्रेजी विकी की चर्चा को कॉपी पेस्ट ना करें। धन्यवाद -जे. अंसारी वार्ताAnimalibrí.gif 10:00, 12 मई 2019 (UTC)
@J ansari:अंग्रेजी विकिपीडिया में उल्लिखित दिशानिर्देश सभी भाषाओं में विकिपीडिया पर लागू होते हैं।--Snehashishphilip (वार्ता) 15:25, 13 मई 2019 (UTC)
  • @J ansari: जी, सल्ललाहु अलैही व सल्लम या सल्ल नियम विरुद्ध ही है। ये एक तरह से उपाधि है जो विकि पर तटस्थ दृष्टिकोण के कारण निषेध है। इसकी तुलना आप राम के नाम से पहले श्री से कर सकते हैं।--हिंदुस्थान वासी वार्ता 17:00, 15 मई 2019 (UTC)