मार्ताण्ड वर्मा (उपन्यास)

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
मार्ताण्ड वर्मा  
पुस्तक का शीर्षक पृष्ठ
लेखक सी॰ वी॰ रामन् पिल्लै
मूल शीर्षक മാർ‍ത്താണ്ഡവർ‍മ്മ
अनुवादक बी॰ के॰ मेनोन् (१९३६) - अंग्रेज़ी
ओ॰ क्रिष्ण पिल्लै (१९५४) – तमिल
आर्॰ लीलादेवी (१९७९) - अंग्रेज़ी
कुन्नुकुऴि कृष्णन् कुट्टि (१९९०) - हिन्दी(अपूर्ण)
प॰ पद्मनाभन् तम्पि (२००७) – तमिल
देश भारत
भाषा मलयालम
प्रकार अतिशयोक्तिपूर्ण कथा
ऐतिहासिक उपन्यास
प्रकाशक लेखक (१८९१)
साहित्य प्रवरतक सहकरण संघम (१९७३ से)
डी॰ सी॰ बुक्स् (१९९२ से)
केरल साहित्य अकादमी (१९९९)
कमलालया बुक डिप्पो (१९५४ – तमिल), (१९३६ – अंग्रेज़ी)
सटेरलि़ङ पब्लिषेर्स (१९७९) – अंग्रेज़ी
केरल हिन्दी प्रचार सभा (१९९० - हिन्दी)
साहित्य अकादमी (१९९८ – अंग्रेज़ी), (२००७ – तमिल)
प्रकाशन तिथि जून ११, १८९१
मीडिया प्रकार छपाई (अजिल्द, सजिल्द)
आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ ISBN 81-7690-000-1
ISBN 81-7130-130-4
उत्तरवर्ती धरमराजा, राम राजा बहदूर्

मार्ताण्ड वर्मा, केरल का साहित्यकार सी॰ वी॰ रामन् पिल्लै का १९८१ में प्रकाशित हुआ एक मलयालम उपन्यास है। राजा रामा वर्मा के अंतिम शासनकाल से मार्ताण्ड वर्मा का राज्याभिषेक तक वेणाट (तिरुवितान्कूर) का इतिहास आख्यान करना एक अतिशयोक्तिपूर्ण कथा[1][2] रूप में ही इस उपन्यास प्रस्तुत किया है। कोल्लवर्ष ९०१-९०६[3] ([ग्रेगोरी कैलेंडर]: १७२७-१७३२) समय में हुआ इस कहानी का शीर्षक पात्र को सिंहासन वारिस का स्थान से हटाने के लिए पद्मनाभन् तम्पि और एट्टुवीट्टिल् पिल्लों ने लिटाया दुष्कर्म योजनाओं से संरक्षित करना अनन्तपद्मनाभन्, मान्कोयिक्कल् कुरुप्पु और सुभद्र लोगों से जुटे है यह कथा।

मलयालम साहितय का पहला[4] ऐतिहासिक उपनयास होकर यह साहित्यक रचना प्रस्तुत अनुभाग में ऐतिहासिक आख्यायिका[5] नामक एक शाखा आरंभ[6][7] किया। तिरुवितान्कूर इतिहास धरमराजा, राम राजा बहदूर नामक उपनयासों में जारी रहता है। इस तीन उपन्यासों को सीवीयुटे चरित्राख्यायिककल (सी वी का ऐतिहासिक विवरणात्मकें) नाम से प्रस्तुत साहितय में कहा जाते हैं।

यह उपन्यास मलयालम साहित्य में रोमांचक कहानी[5] और इतिहास का एक उत्कृष्ट मिश्रित कृती माना जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. C.V. रामन् पिल्लै; B.K. मेनोन् (१९३६). MARTHANDA VARMA (अंग्रेज़ी में) (First Ed. संस्करण). तिरुवनन्तपुरम: कमलालया बुक डिप्पो. A Historical Romance
  2. बिन्दु मेनोन्. M (जून २००९). "Romancing history and historicizing romance". Circuits of Cinema: a symposium on Indian cinema in the 1940s and '50s (अंग्रेज़ी में). नई जिल्ली: Seminar: Internet Edition.
  3. C.V. रामन् पिल्लै (१८९१). മാർ‍ത്താണ്ഡവർ‍മ്മ [मार्ताण्ड वर्मा] (मलयालम में) (१९९१ संस्करण). कोट्टयम: साहित्य प्रवरतक सहकरण संघम. पपृ॰ २६, २२१.
  4. "Novel and Short Story to the Present Day" [आज तक का उपन्यास और लघुकथा]. History of Malayalam Literature [मलयालम साहित्य का इतिहास] (अंग्रेज़ी में).
  5. Dr. K. राखवन् पिल्लै (१९९२). മാർ‍ത്താണ്ഡവർ‍മ്മ [मार्ताण्ड वर्मा] (मलयालम में). कोट्टयम: D.C. बुक्स्. पृ॰ २८.
  6. राजी अजेष् (२००४). "മലയാള ചരിത്ര നോവലുകളുടെ വഴികാട്ടി" [मलयालम साहित्य में ऐतिहासिक उपन्यासों के मार्गदर्शन] (मलयालम में).
  7. T. शशी मोहन् (२००५). "ചരിത്രം, നോവല്‍, പ്രഹസനം = സി വി" [इतिहास, उपन्यास, प्रहसन = सी॰ वी॰] (मलयालम में). वेबदुनिया मलयालम, २१ मार्च २००८.