महामाया मंदिर,रतनपुर,बिलासपुर

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छत्तीसगढ़ राज्य के संरक्षित स्मारक

महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ राज्य के बिलासपुर जिले में रतनपुर नगर में स्थित है। यह स्मारक छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा संरक्षित है। यह मंदिर ५१ शक्तिपीठों में से एक है।

यह मंदिर लगभग १२वीं शताब्दी में निर्मित माना जाता है। मंदिर के अंदर महामाया माता का मंदिर है। वैसे तो सालभर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है लेकिन मां महमाया देवी मंदिर के लिए नवरात्रों में मुख्य उत्सव, विशेष पूजा-अर्चना एवं देवी के अभिषेक का आयोजन किया जाता है।

आदि भवानी महामाया देवी भगवान बुद्ध की माता है इनके पिता का नाम सुप्रबुद्ध है ये कपिलवस्तु की महाराजा शुद्धोधन की महारानी थी इन्हें ही धन की देवी कहते है प्राचीन समय से ही सम्पूर्ण भारत मे इनकी पूजा होती है फसल जब घर पर किसान लाकर भण्डार कर लेते थे तब धन की इस खुशी मे दीपक जलाते थे वही आज दिवाली है किवंदती अनुसार महामाया के मृत शरीर के कई टुकरे या मृत राख या मिट्टी पूरे भारत मे लोग ले जाकर जहां रखे वही स्थल आज का मंदिर है महामाया की पूजा यूपी के दलित अति प्राचीन समय से करते आ रहे है हाथी की मूर्ति (महामाया के गर्भ का प्रातीक है),सफेद कमल पुष्प (कोईया फूल)भगवान के जन्म का प्रतीक है धार ,पूडी लप्सी,चुनरी, गुडहल फूल,दीपक और उसके साथ महामाया कीर्तन महामाया देवी का वास्तविक पूजा है कीर्तन एक पुरुष साडी पहनकर नाचता है अन्य लोग मृदंग व वाद्ययंत्र बजाकर कीर्तन गीत गाते है साथ ही धार हाथी की मूर्ति फूल आदि चढावा प्राचीन है पुत्र प्राप्ति वाले निःसन्तान महिला अपने आंचल फैलाकर उस पर साडी पहने पुरुष को नचाने से उसकी मनोकामना पूर्ण होती है ऐसा दलित आज भी करते है यह पूजा पूर्णिमा को करते है[संपादित करें]

कीर्तन ....सुमिरो रे आदि भवानी हे महामाया ....2

कोलिय देश जन्मिव देवी ,कपिलवस्तु बसलिव हे माया ...2


रहलिव सुप्रबुद्ध की राजदुलारी रे हे माया ...2

सुमिरो रे...2

महाराज शुद्धोधन कै महारानी रहलिव हे माया ...2

देवदाह मे लिहिव तू जनमवा रे हे महामाया ...2

सुमिरो रे ....2

लुम्बिनी वन मे भगवान के जन्मलिव हे माया...2

जन्म मरण कै परमसत्य जग जनलिस हो माया ...2

सुमिरो रे......2

हाथी मुर्तिया महामाया जी के सोहय हो ....2

हाथी मुर्तिया है देवी कै गर्भ निशानी हे माया ...2

सुमिरो रे....2

कोइयां फूलवा महामाया जी के सोहय हो ....2

कोइयां फूलवा है भगवान कै जन्म निशानी हे माया ..2

सुमिरो रे .....2

घोडा मूर्तिया डीहै के सोहय हो ...2

घोडा मूर्तिया है भगवान जन्म निशानी हे माया ...2

सुमिरो रे....2

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वैसे तो पूरा भारत आज भी विभिन्न जगहो पर महामाया देवी की पूजा करता है किन्तु दलित आज भी विशेष रुप से पूजते है