मधेसी

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नेपाल का झंडा

नेपाल के दक्षिणी भाग के मैदानी क्षेत्र के निवासियों को मधेसी कहते हैं। इस क्षेत्र को 'तराई क्षेत्र' भी कहते हैं। इसी क्षेत्र को "मधेश" भी कहते हैं। मधेश शब्द 'मध्यदेश' का अपभ्रंश है।

मैथिली, अवधी, भोजपुरी और अन्य भाषाएँ (जो भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार में बोली जाती है) बोलने वाले लोग जो बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों जैसे दिखते हैं और जिनकी संस्कृति और रीति-रिवाज बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगो जैसी है लेकिन जो स्थायी रूप से नेपाल में रहते हैं, वो लोग नेपाल में मधेसी कहलाते हैं। नेपाल के मधेसी और भारत के बिहारी या उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्से में रहने वाले लोगों में कुछ भी असमानता नहीं है, अन्तर केवल यह है कि मधेसी सीमा के उस पार रहते हैं।

इतिहास[संपादित करें]

प्राचीन समय में मिथिला और अवध स्वतंत्र राज्य थें। 17वीं सदी में जब नेपाल के राजा छोटे छोटे राज्यों को नेपाल में एकीकरण कर रहें थें तब मिथिला और अवध के छोटे से भू-भाग पर नेपाल ने कब्ज़ा कर लिया था बाद में अंग्रेजों ने मिथिला और अवध के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया।

उल्लेखनीय मधेसी[संपादित करें]

  • रामबरन यादव - नेपाल के राष्ट्रपति
  • सी के राउत (वैज्ञानिक)
  • राजेन्द्द्र महतो (नेपाल सद्भावना पार्टी)
  • उदित नारायण (पार्श्व गायक)
  • गजेन्द्र नारायण सिंह (१९८५ में नेपाल सद्भावना पार्टी के संस्थापक)
  • रामराज प्रसाद सिंह (राजनेता)

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]