प्रदेश संख्या १

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प्रदेश संख्या १
—  प्रदेश  —
Provinces of Nepal 2015.png
देश Flag of Nepal.svg नेपाल
प्रदेश का प्रस्तावित नाम
गठन २० सितम्बर २०१५
प्रस्तावित राजधानी धनकुटा
क्षेत्र
 • कुल 25,905
जनसंख्या (2011)
 • कुल 45,34,943
 • घनत्व <
समय मण्डल नेपाल समय (यूटीसी +5:45)
Geocode NP-ON
मुख्य भाषा नेपाली

प्रदेश संख्या १ नेपाल के सात प्रदेशों में से एक है। २० सितम्बर २०१५ को लागू हुए संविधान में नए सात प्रदेशों का प्रावधान है।[1] इस प्रदेश का नामांकन प्रदेश संसद (विधान परिषद) द्वारा किया जाएगा। इसकी राजधानी कहाँ होगी यह भी प्रदेश संसद द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

इस प्रदेश के पूर्व में भारत का सिक्किम राज्य है तथा साथ में पश्चिम बंगाल का उत्तरी हिस्सा दार्जीलिंग सटा हुआ है। उत्तर में हिमालय के उस पार तिब्बत स्थित है रही तो दक्षिण में भारत का बिहार स्थित है।

२५,९०५ वर्ग किमी के क्षेत्रफल में ४४ निर्वाचन क्षेत्र फैले हुए हैं। १०,४३८ किमी का क्षेत्रफल पर्वतों से घिरा हुआ है, १०,७४९ किमी का क्षेत्रफल पहाड़ी है और पूर्वी तराई का फैलाव ४,७१८ किमी में है।

निपआ. (निर्वाचन परिसीमन आयोग) के रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश संख्या १ में एफपीटीपी (फर्स्ट पास्ट द पोस्ट निर्वाचन) पद्धति के तहत २८ संसदीय सीट और ५६ प्रादेशिक सीट होंगे।[2]

२०११ के जनगणना के अनुसार, इस राज्य में लगभग ४५ लाख लोग रहते हैं, जिसका जनसंख्या घनत्व १७५.६ प्रति वर्ग किलमीटर है।[3]

Nepal Province 1.jpg

इतिहास[संपादित करें]

ऐतिहासिक प्रमाणों से पता चलता है कि यह क्षेत्र किरात अधिराज्य का एक हिस्सा था जो विदेह के पूर्व में हिमालयी क्षेत्र में फैला हुआ था। महाभारत और अन्य हिन्दू धर्म-ग्रंथों में इस बात का उल्लेख है।

शाह वंश द्वारा नेपाल एकीकरण से पहले तक यहां छोटे- छोटे लिम्बु रियासत और किरात रियासत थें। १७७१ से १७७५ के बीच गोरखा अधिराज्य के राजा पृथ्वीनारायण शाह ने इन्हें युद्ध में हराकर अपने अधीन कर लिया।

मोरंग, सुनसरी और झापा के हिस्से एक समय में मोरंग अधिराज्य हुआ करता था, जो लिम्बुवान का एक राज्य था। यह राज्य लिम्बु राजा मवरोंग हांग द्वारा स्थापित किया गया था। बाद में इस राज्य पर गोरखा के राजा ने अधिकार प्राप्त कर लिया।

भूगोल[संपादित करें]

प्रदेश संख्या १ नेपाल का सबसे पूर्वी राज्य है, जिसका कुल क्षेत्रफल २५,९०५ किमी है। यह उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण के तराई तक फैला हुआ है। उत्तर में आठ हज़ारी पर्वत श्रृंखला हैं तो दक्षिण में फैले हुए मैदानी क्षेत्र हैं। इस क्षेत्र कि सबसे बड़ी नदी कोशी नदी है। नेपाल में कोशी के पश्चिम से शिवालिक कि पहाड़ियां शुरू होती है जो उत्तराखंड से आगे तक जाती है। शिवालिक को नेपाल में चूरे कहते हैं। विश्व कि सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट इसी राज्य में तिब्बत सिमा से सटा हुआ है।

यह प्रदेश भौगोलिक रूप से ३ प्राकृतिक खंडों में बंटा हुआ है। सबसे उत्तरी हिस्सा हिमालयी है, जिसकी ऊंचाई ४००० मी से अधिक है। यहां ७००० मी से अधिक ऊंचाई कि कई चोटियां हैं। ये चोटियां हमेशा बर्फ से ढकी रहती हैं। इस क्षेत्र कि मुख्य चोटियां हैं: एवरेस्ट, मकालू, ल्होत्से और कंचनजंघा। एवरेस्ट विश्व कि सब से ऊंची चोटी है जो इसी प्रदेश में है। ताप्लेजुँग, संखुवासभा और सोलुखुम्बु हिमालयी क्षेत्र में पड़ने वाले जिले हैं। इन जिलों से दक्षिण तरफ के क्षेत्र पहाड़ी क्षेत्र कहे जाते हैं। पहाड़ी क्षेत्र के जिले हैं: भोजपुर, धनकुटा, ईलाम, खोटाँग, ओखलढुंगा, पांचथर और तेह्रथुम। पहाड़ी जिले वनों से ढके हैं, जहां विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे और जीव-जंतु रहते हैं। सब से दक्षिणी हिस्से के तीन जिले: झापा, मोरंग और सुनसरी तराई क्षेत्र में पड़ते हैं जो भारत के बिहार राज्य से सटे हैं। तराई क्षेत्र उपजाऊ हैं जो खेती के लिए योग्य क्षेत्र हैं। नेपाल का सब से न्यूनतम ऊंचाई वाला क्षेत्र केचन कलन इसी क्षेत्र के झापा जिले में पड़ता है, जिसकी ऊंचाई ६० मी है। उदयपुर प्रदेश संख्या १ का भित्री मधेस या भित्री तराई' (inner Terai) क्षेत्र है। इसे भित्री मधेश इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह क्षेत्र बीच में तराई है, परंतु इसके दक्षिण में शिवालिक कि पहाड़ियां हैं और उत्तर में महाभारत कि श्रेणियां। शिवालिक कि पहाड़ियों और महाभारत कि पहाड़ियों के बीच का हिस्सा किसी घाटी कि तरह प्रतीत होता है।

पर्वत[संपादित करें]

प्रदेश संख्या १ के उत्तरी हिस्से में विश्व का सर्वोच्च पर्वत शिखर है और कई ऐसे पर्वत हैं जो बहुत ऊंचा होने का खिताब रखते हैं।

प्रदेश संख्या १ में स्थित पर्वत:

पर्वत/शिखर मीटर फीट खंड नोट
माउंट एवरेस्ट 8,848 29,029 खुम्बु महालंगूर   विश्व का सर्वोच्च शिखर (समुद्र तल से)
कंचनजंघा 8,586 28,169 उत्तरी कंचनजंघा   पृथ्वी पर तीसरा सबसे ऊंचा
ल्होत्से 8,516 27,940 एवरेस्ट समूह   चौथा सबसे ऊंचा
मकालू 8,463 27,766 मकालू महालंगूर   पांचवा सबसे ऊंचा
चोयु 8,201 26,906 खुम्बू महालंगूर   छठा सबसे ऊंचा
ज्ञानचुंग कांग 7,952 26,089 खुम्बू महालंगूर   एवरेस्ट और चोयु के बीच में
नुप्तसे 7,861 25,791 एवरेस्ट समूह   ल्होत्से से 319 बाहर निकला हुआ
जन्नु 7,711 25,299 कुम्भकर्ण कंचनजंघा  
काब्रु 7,412 24,318 सिंगलिला कंचनजंघा  
किरात चुली 7,365 24,163 कंचनजंघा  
नंगपाई गोसुम 7,350 24,114 खुम्बू महालंगूर  
चाम्लांग 7,321 24,019 बरुन महालंगूर   विश्व में ७९वाँ#
पुमोरी 7,161 23,494 खुम्बू महालंगूर   १९६२ में पहली बार चढ़ा गया
बरुनत्से 7,129 23,389 बरुन महालंगूर    १९५४ में पहली बार चढ़ा गया
आमा डाबलाम 6,812 22,349 बरुन महालंगूर    "माँ और उनके गले की हार"
कांगतेगा 6,782 22,251 बरुन महालंगूर   १९६३ में पहली बार चढ़ा गया
चो पोलु 6,735 22,096 बरुन महालंगूर   १९९९ में पहली बार चढ़ा गया
लिंगट्रेन 6,714 22,028 खुम्बू महालंगूर   १९३५ में पहली बार चढ़ा गया
नुम री 6,677 21,906 बरुन महालंगूर   २००२ में पहली बार चढ़ा गया
खुम्बूत्से 6,640 21,785 खुम्बू महालंगूर   एवरेस्ट के पश्चिम में पहला पर्वत
थामसेर्कु 6,623 21,729 बरुन महालंगूर   १९६४ में पहली बार चढ़ा गया
पांगबोचे 6,620 21,719 कुटांग हिमालय  
ताबोचे 6,542 21,463 खुम्बू महालंगूर   १९७४ में पहली बार चढ़ा गया
मेरा शिखर 6,476 21,247 हिमालय   ट्रैकिंग शिखर
चोलात्से 6,440 21,129 खुम्बू महालंगूर   ताबोचे से जुड़ा हुआ
कुसुम कंन्गुरु 6,367 20,889 बरुन महालंगूर   ट्रैकिंग शिखर (difficult)
ओम्बीगाईचन 6,340 20,801 बरुन महालंगूर  
कोंगड़े री 6,187 20,299 बरुन महालंगूर   ट्रैकिंग शिखर (कठिन)
इम्जा त्से 6,160 20,210 खुम्बू महालंगूर   द्वीप शिखर के नाम से भी जाना जाता है। प्रसिद्ध ट्रैकिंग शिखर
लोबुचे 6,145 20,161 खुम्बू महालंगूर   ट्रैकिंग शिखर
निरेखा 6,069 19,911 खुम्बू महालंगूर   ट्रैकिंग शिखर (कठिन)
पोकाल्डे 5,806 19,049 खुम्बू महालंगूर   ट्रैकिंग शिखर (मध्यम)
पर्वत खुम्बिला 5,761 18,901 महालंगूर   अब तक नहीं चढ़ा गया
काला पत्थर 5,545 18,192 खुम्बू मह   पुमोरी के नीचे प्रसिद्ध हाईकिंग
गोक्यो री 5,357 17,575 हिमालय   प्रसिद्ध हाईकिंग शिखर
South Side: View from Mera Peak

नदियां[संपादित करें]

दुधकोशी नदी

इस प्रदेश में बहने वाली नदियां हैं:

मुख्य नदी:

अन्य नदी:

  • बरुन नदी
  • इम्जा खोला
  • होंगु नदी
  • बरुआ नदी
  • त्रियुगा नदी

मौसम[संपादित करें]

नेपाल के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्र में अलग-अलग तरह के जलवायु देखा जा सकता है। देश में आठ जलवायु क्षेत्र हैं, उष्णकटिबंधीय से लेकर सफेद हिम तक।

१००० मी० से नीचे के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में हर दशक में एक बार से भी कम पाला (तुषार) (frost) पड़ता है। इसे निम्न उष्णकटिबंधीय (३०० मी० से नीचे) और उच्च उष्णकटिबंधीय (१००० मी० से ३०० मी०) में प्रतिभाग किया जा सकता है।

उपोष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्र १००० मी० से २००० मी० तक कि ऊंचाई वाले क्षेत्र में फैला है। नेपाल कि अधिकतर जनसंख्या उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र में वास करती है। इस क्षेत्र में हर साल लगभग ५३ दिनों तक पाला का सामना करना पड़ता है।

तापीय जलवायु क्षेत्र २००० से ३००० मी० कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फैला हुआ है। यहां हर साल १५३ दिनों तक पाले पड़ सकते हैं।

सबअल्पाइन क्षेत्र ३००० से ४००० मी० कि ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं। यहां भी लोगों कि बस्तियां देखी जा सकती है। यहां हर साल लगभग २२९ दिनों तक पाले पड़ते हैं।

अल्पाइन क्षेत्र ४००० से ५००० मी० कि ऊंचाई वाले क्षेत्र हैं। यहां लोगों का वास नहीं है। लोग यहाँ गर्मी के दिनों में भेड़, बकरियाँ, याक आदी लेकर आते हैं और सर्द शुरू होने से पहले यहां से चले जाते हैं।

५००० मी० से ऊपर का क्षेत्र सालों भर बर्फ से ढका रहता है। यहां पर लोग नहीं रहते और ना हि गर्मियों के दिनों में यहां कोई भेड़-बकरियाँ लेकर जाता है।

ऋतुएँ[संपादित करें]

नेपाल में मुख्यत: चार ऋतुएं हैं, ऊंचाई के अनुसार ऋतुएँ तराई से हिमालय तक एक जैसी नहीं रहतीं। गर्म ऋतु में तराई में अधिक गर्मी पड़ती है, तापमान ४०° (१०४ एफ) तक पहुंच जाती है, वहीं सर्दियों में पहाड़ी और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ठंड पड़ती है। कई जगहों पर हिम-वृष्टियाँ भी होती हैं।

मुख्य ऋतुएँ:

  • सर्द ऋतु: (दिसंबर-फरवरी)
  • गर्म ऋतु: (मार्च-मई)
  • वर्षा ऋतु: (जून-अगस्त)
  • पतझड़: (सितम्बर-नवम्बर)

प्रशासनिक विभाजन[संपादित करें]

२० सितम्बर २०१५ को नए संविधान जारी होने के बाद प्रदेश संख्या १ अस्तित्व में आया। इससे पहले यह क्षेत्र पूर्वांचल विकास क्षेत्र नाम से जाना जाता था। पूर्वांचल विकास क्षेत्र नेपाल के पांच विकास क्षेत्रों में से एक था। पूर्वांचल में १६ जिले थें पर अब प्रदेश संख्या १ में सिर्फ १४ जिले हैं। इसके दो जिले सिराहा और सप्तरी को प्रदेश संख्या २ में डाल दिया गया है।

प्रदेश संख्या १ के जिले:

पर्यटन[संपादित करें]

वैसे तो पूरा नेपाल पर्यटन के हिसाब से सैलानियों का मनपसंद बिंदु है फिर भी प्रदेश संख्या १ जो पूर्वी नेपाल भी कहलाता है, कुछ खास ही है। यहां माउंट एवरेस्ट, कंचनजंघा, मकालू, ल्होत्से और पुमोरी जैसे दुनिया के कुछ ऊंचे पर्वत हैं, तो सगरमाथा राष्ट्रीय उद्यान, मकालू-वरुण राष्ट्रीय उद्यान, कंचनजंघा संरक्षण क्षेत्र, कोशी टापू वन्यजन्तु आरक्षण जैसे उद्यान और संरक्षण क्षेत्र भी हैं।

प्रदेश संख्या १ में स्थित कुछ प्राकृतिक पर्यटन और धार्मिक पर्यटन स्थलों के नाम;

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]