पाला

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शीत लहर के चलते वायुमंडल में उपस्थित जल वाष्प जब पेड़ पौधों की पत्तियों अथवा किसी ठोस पदार्थ के सम्पर्क में आती है जिनका तापमान 0°सेल्सियस अथवा इससे नीचे है तो यह बर्फ की चादर के रूप में जमने लग जाती है। यह पाला कहलाती है।[1][2]

फसलों पर प्रभाव[संपादित करें]

पाले के कारण पेड़ पौधों की कोशिकाओंऊतकों में उपस्थित जल के बर्फ़ में बदल जाने की वजह से इसका आयतन बढ़ जाता है।आयतन बढ़ने से पौधे के ऊतक, कोशिकाएं व संवहनी नलिकाएं आदि फट जाती हैं जिससे पौधे की मृत्यु हो जाती है। सम्पूर्ण फसल भी कई बार नष्ट हो जाती है। इससे बचाव के लिए किसान खेतों में खड़ी फसलों में पानी से सिंचाई करते हैं।इस पानी को पौधा जब अवशोषित कर अपने शरीर मे ग्रहण करता है तो अंदर जमी बर्फ घुल जाती है और पौधे मरने से बच जाते हैं।[3]


संदर्भ[संपादित करें]

  1. "Definition of FROST". www.merriam-webster.com (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2021-01-09.
  2. "WeatherQuestions.com: What causes frost?". weatherstreet.com. अभिगमन तिथि 2021-01-09.
  3. "Frost tolerance of vegetables".

बाहरी कड़ियां[संपादित करें]