पीठ दर्द

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Back pain
वर्गीकरण एवं बाह्य साधन
Spinal column curvature-en.svg
Different regions (curvatures) of the vertebral column
आईसीडी-१० M54.
आईसीडी- 724.5
डिज़ीज़-डीबी 15544
एम.ईएसएच D001416

'पीठ दर्द ("डोर्सलाजिया " के नाम से भी जाना जाता है) पीठ में होनेवाला वह दर्द है, जो आम तौर पर मांसपेशियों, तंत्रिका, हड्डियों, जोड़ों या रीढ़ की अन्य संरचनाओं में महसूस किया जाता है।'

इस दर्द को अक्सर गर्दन दर्द, पीठ के उपरी हिस्से के दर्द,पीठ के निचले हिस्से के दर्द या टेलबोन के दर्द(रीढ़ के आखिरी छोर की हड्डी में) में विभाजित कर सकते हैं। यह अचानक होनेवाला दर्द या स्थाई दर्द भी हो सकता है; यह लगातार या कुछ अन्तराल पर भी हो सकता है, यह दर्द किसी एक ही जगह पर हो सकता है या अन्य हिस्सों में फ़ैल भी सकता है यह एक हल्का या तेज दर्द हो सकता है या इसमें छेदने या जलन की अनुभूति हो सकती है। यह दर्द भुजा और हाथ में, पीठ के उपरी या निचले हिस्से में फ़ैल सकता है, (और पंजे या पैर में फ़ैल सकता है) और दर्द के अलावा इसमें कमजोरी, सुन्न हो जाना या झुनझुनी जैसे लक्षण भी शामिल हो सकते हैं।

पीठ का दर्द लोगों को अक्सर होने वाली शिकायतों में से एक है। अमेरिका में पीठ के निचले भाग में तेज दर्द (लूम्बेगो भी कहा जाता है) चिकित्सक के पास जाने के सबसे आम कारणों में पांचवें स्थान पर है। दस में से नौ वयस्कों को अपने जीवन के किसी न किसी बिंदु पर पीठ दर्द का अनुभव होता है और काम करने वाले दस में से पांच वयस्कों को हर साल पीठ दर्द होता है।[1]

रीढ़ नसों, जोड़ों, मांसपेशियों, शिराओं और अस्थिवंधों का एक परस्पर संबंधित जटिल अंतर्जाल है और ये सभी दर्द के उत्पादन में सक्षम हैं। बड़ी तंत्रिकाएं जो रीढ़ की हड्डी से आरंभ होकर पैर और हाथ में जाती हैं, वे दर्द को अधिकतम सीमा तक फैला सकती हैं।

वर्गीकरण[संपादित करें]

शारीर रचना की दृष्टि से पीठ दर्द को: गर्दन के दर्द, पीठ के ऊपरी हिस्से के दर्द, पीठ के निचले हिस्से के दर्द या टेलबोन के दर्द में विभाजित किया जा सकता है

इसकी अवधि की दृष्टि से: एक्यूट (अल्पकालिक) (4 सप्ताह से कम), (सब-एक्यूट 4-12 सप्ताह), स्थायी (12 से अधिक सप्ताह).

इसके कारण द्वारा: एमएसके, संक्रामक, कैंसर आदि

सम्बंधित स्थितियां[संपादित करें]

पीठ दर्द किसी गंभीर चिकित्सकीय समस्या का संकेत हो सकता है, हालांकि यह अक्सर अंतर्निहित कारण नहीं होता:

  • आंत्र और/या मूत्राशय असंयम या पैरों में बढती कमजोरी एक संभावित जीवन-घाती समस्या के प्रारूपिक चेतावनी संकेत हैं।
  • गंभीर बीमारी के अन्य लक्षणों के साथ (जैसे कि बुखार, अनपेक्षित रूप से वजन में कमी) होने वाला तेज पीठ दर्द (ऐसा दर्द जो नींद में विघ्न डालने जितना बुरा हो) से एक गंभीर अंतर्निहित चिकित्सकीय हालत का संकेत मिल सकता है।
  • पीठ दर्द किसी आघात के बाद जैसे कि कार दुर्घटना या गिरने से लगी चोट के बाद होता है और अस्थि विभंजन या किसी अन्य चोट का संकेत हो सकता है।
  • लोगों को अन्य चिकित्सकीय स्थितियों जैसेऑस्टियोपोरोसिस या अस्थि मज्जा के विविध ट्यूमर के साथ होनेवाला पीठ दर्द, जो उन्हें रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर के भारी जोखिम में डाल सकता है, होने पर तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता होती है।
  • कैंसर (विशेष रूप से स्तन, फेफड़े और प्रोस्टेट कैंसर जैसे रीढ़ की हड्डी में फैलने वाले कैंसर) जैसी बीमारी वाले व्यक्तियों को पीठ दर्द होने पर उसकी उपयुक्त जाँच करानी चाहिए जिससे रीढ़ के मेटास्टेटिक रोग के खतरे को दूर किया जा सके.

पीठ दर्द में आमतौर पर तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती है। पीठ दर्द के अधिकांश प्रसंग स्वयं-सीमित अर्थात् खुद कम हो जानेवाले और न बढ़नेवाले होते हैं। अधिकतर पीठ दर्द के लक्षण, विशेषकर एक्यूट अर्थात् तीव्र चरण में सूजन, की वजह से होते हैं, जो साधारण तौर पर दो सप्ताह से तीन महीनों तक रहता है।

कुछ अवलोकनात्मक अध्ययनॉ का सुझाव है कि अक्सर पीठ दर्द के लिए जिम्मेदार ठहराई जानेवाली दो स्थितियां लम्बर डिस्क हर्नियेशन और अपक्षयी डिस्क रोग, पीठ दर्द वाले लोगों में सामान्य आबादी की अपेक्षा अधिक व्याप्त नहीं हैं और इस दर्द का कारण बनने वाली प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी नहीं है।[2][3][4][5] अन्य अध्ययनॉ का सुझाव है कि 85% मामलों के लिए कोई शारीरिक कारण नहीं दिखाया जा सकता है।[6][7]

कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि एक्स-रे एवं अन्य चिकित्सकीय स्कैनों में पता चलनेवाली संरचनात्मक असामान्यताओं की अपेक्षा नौकरी पर तनाव और बिगड़े हुए पारिवारिक रिश्तों को पीठ दर्द से अधिक निकटता के साथ परस्पर सम्बंधित किया जा सकता है।[8][9][10][11]

विभेदक निदान[संपादित करें]

पीठ दर्द के कई संभावित स्रोत और कारण हैं।[12] हालांकि, दर्द के कारण के रूप में रीढ़ की विशिष्ट ऊतकों का निदान करने में समस्या उत्पन्न होती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि रीढ़ की हड्डी के ऊतकों से उत्पन्न होने वाले लक्षणों में काफी सामानता प्रतीत होती है और स्थानीय चेतना शून्य करनेवाली औषधि जैसे अंतर नैदानिक हस्तक्षेप प्रक्रियाओं के प्रयोग के बगैर इनमें अंतर करना बहुत मुश्किल है।

पीठ दर्द का एक संभावित स्रोत पीठ का स्केलेटल मसल (ढांचे की मांसपेशी) है। मांसपेशियों के उत्तकों में दर्द के संभावित कारणों में मांसपेशी तनाव(खिंची हुई मांसपेशियां) मांसपेशी अकड़न, और मांसपेशी असंतुलन शामिल हैं। हालांकि, इमेजिंग (प्रतिविम्वित) अध्ययन पीठ दर्द के कई मामलों में मांसपेशी ऊतक के नुकसान की धारणा का समर्थन नहीं करते हैं और मांसपेशियों की ऐंठन और मांसपेशी असंतुलन की न्यूरोफिजियोलॉजी या तंत्रिकातंत्र शरीरविज्ञान को भी ठीक तरह से समझा नहीं जा सका है।

पीठ के निचले हिस्से में दर्द का एक अन्य संभावित स्रोत रीढ़ के स्नोवियल जोड़ (जैसे जिगापोफिजियल जोड़) हैं। इन्हें पीठ के निचले हिस्से में स्थायी दर्द वाले लोगों के लगभग एक तिहाई में और गर्दन की मोच के बाद गर्दन में दर्द वाले अधिकांश लोगों में दर्द के प्राथमिक स्रोत के रूप में चिह्नित किया गया है।[12] हालांकि, जिगापोफिजियल जोड़ों के दर्द के कारण को पूरी तरह समझा नहीं जा सका है। गर्दन में मोच के बाद गर्दन में दर्द होनेवाले लोगों में कैप्सूल ऊतकों के नुकसान को कारण के रूप में प्रस्तावित किया गया है। जिगापोफिजियल जोड़ों से आरंभ होनेवाले रीढ़ के दर्द वाले लोगों के बारे में, एक सिद्धांत यह है कि उनकी श्लेष झिल्लियों के इन्वेजिनेशंस और फाइब्रो-एडिपोज मेसिक्वायड्स (जो कि आमतौर पर हड्डियों को आसानी से एक दूसरे पर ले जाने में मदद के लिए हड्डियों की गद्दी के रूप में कार्य करते हैं) जैसे अंतर जोड़ ऊतक विस्थापित, सूखे या फँसे हुए हो सकते हैं और फलस्वरूप नोसिसेप्शन को बढ़ाते हैं।

पीठ दर्द के कई अन्य आम संभावित स्रोत और कारण हैं: जिनमें स्पाइनल डिस्क हर्नियेशन और अपक्षयी डिस्क रोग या आइस्थेमिक स्पाँडिलोलिस्थीसिस,ऑस्टियोआर्थराइटिस (अपक्षयी जोड़ रोग)या रीढ़ की हड्डी में स्टेनासिस, आघात, कैंसर, संक्रमण, अस्थि भंग तथा सूजन की बीमारियाँ शामिल हैं।[25]

रेडिक्युलर दर्द (साइटिका) 'नॉन-स्पेसिफिक' अर्थात् गैर-विशिष्ट पीठ के दर्द के रूप में चिह्नित है और इनवेसिव निदान परीक्षणों के बगैर इसका निदान किया जा सकता है।

नॉन-डिस्कोजेनिक पीठ दर्द पर नए तौर पर ध्यान केन्द्रित किया गया है, जिसमें रोगियों का सामान्य या लगभग सामान्य एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाता है। जिन रोगियों में कोई रेडियोग्रफिक असामान्यताएं नहीं होतीं, एक नया परिक्षण उनमें डॉरसल रेमस की भूमिका की जाँच करता है। पॉस्टिरियर रेमी सिंड्रोम देखें.

प्रबंधन[संपादित करें]

पीठ दर्द का इलाज करते समय प्रबंधन का लक्ष्य दर्द की तीव्रता में जितनी जल्दी संभव हो अधिक से अधिक कमी प्राप्त करना; रोगी में अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में कार्य करने की क्षमता को बहाल करना, अवशिष्ट दर्द का सामना करने में रोगी की मदद तथा कानूनी और सामाजिक-आर्थिक बाधाओं के मध्य से रोगी के रास्ते को आरोग्य लाभ के लिए सुगम बनाना है। अधिकांश के लिए लक्ष्य पुनर्वास हेतु दर्द को एक संचालनीय स्तर पर रखना है, जो बाद में लंबे समय तक दर्द से राहत की और अग्रसर करे. इसका लक्ष्य गैर शल्य-चिकित्सा उपचार के उपयोग द्वारा दर्द का प्रबंधन और बड़ी शल्य-चिकित्सा से बचाव है, जबकि दूसरों के लिए शल्य-चिकित्सा बेहतर महसूस करने का शीघ्रतम रास्ता हो सकती है।

सभी उपचार सभी स्थितियों में या एक ही स्थिति के सभी व्यक्तियों के लिए काम नहीं करते और अनेक लोग पाते हैं कि अपने लिए सर्वोत्तम उपचार निर्धारित करने में उन्हें कई उपचार विकल्पों को आजमाने की जरूरत है। स्थिति का वर्तमान चरण भी (अल्पकालिक या स्थायी) उपचार के चुनाव का निर्धारणकारक घटक हो सकता है। पीठ दर्द के रोगियों में केवल एक अल्पसंख्यक वर्ग को (अधिकांश का अनुमान 1% - 10% है) सर्जरी की आवश्यकता होती है।

अल्पकालिक राहत[संपादित करें]

  • ताप चिकित्सा पीठ की अकड़न या अन्य स्थितियों के लिए उपयोगी है। कोक्रेन सहयोग से किये गए अध्ययनॉ के मेटा-विश्लेषण से निष्कर्ष निकला है कि ताप चिकित्सा पीठ के निचले हिस्से में होनेवाले अल्पकालिक तीव्र और कम तीव्र दर्द को कम कर सकती है।[13] कुछ रोगियों को लगता है कि नम ताप (एक गर्म स्नान या चक्कर) या लगातार कम स्तरीय ताप (जैसे कि ताप का आवरण जो 4 से 6 घंटे के लिए गर्म रहता है) सबसे अच्छा काम करता है। कुछ मामलों में ठंड संपीड़न चिकित्सा (जैसे कि बर्फ या ठंडे पैक का प्रयोग) पीठ के दर्द से राहत देने में प्रभावी हो सकती है।
  • मालिश उपचार विशेष रूप से एक अनुभवी थेरेपिस्ट (उपचारकर्ता) द्वारा किया जाने पर अल्पकालिक राहत प्रदान कर सकता है।[17] एक्यूप्रेशर या प्रेशर प्वायंट मसाज (दबाव बिंदु मालिश) पारम्परिक (स्वीडिश) मालिश से अधिक लाभप्रद हो सकता है।[18]

पारम्परिक उपचार[संपादित करें]

  • व्यायाम दर्द को कम करने के लिए एक प्रभावी तरीका हो सकता है, लेकिन एक लाइसेंस प्राप्त पेशेवर स्वास्थ्य कर्मी की देखरेख में ही किया जाना चाहिए. आम तौर पर, पीठ दर्द के अधिकांश उपचारों में लगातार खिंचाव और व्यायाम के कुछ तरीकों को एक आवश्यक घटक माना जाता है। हालांकि, एक अध्ययन में पाया गया है कि व्यायाम तीव्र या अल्पकालिक दर्द के लिए नहीं बल्कि स्थायी पीठ दर्द के लिए प्रभावी है[19] एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि अल्पकालिक दर्द की स्थिति में पीठ को गतिशील करनेवाले व्यायाम बर्दाश्त किये जाने योग्य आम गतिविधियों की निरंतरता से कम प्रभावी हैं।[20]
  • ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अनियमित नियंत्रित परीक्षण में पाया गया कि अलेक्जेंडर तकनीक ने स्थायी पीठ दर्द के रोगियों के लिए दीर्घकालिक लाभ प्रदान किया है[23]. बाद की एक समीक्षा से निष्कर्ष निकला है कि 'अलेक्जेंडर तकनीक के छः अभ्यास के साथ संयुक्त एक व्यायाम नुस्खा पीठ दर्द के प्राथमिक देखभाल के लिए सबसे प्रभावी और कम लागत का विकल्प उपचार लगता है।[17]
  • मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक कारणों[28] पर ध्यान केंद्रित करने के लिए शिक्षा और व्यवहार समायोजन - रेस्पाँडेण्ट-कॉग्निटिव थेरेपी (प्रतिवादी- संज्ञानात्मक उपचार) और प्रगतिशील विश्राम चिकित्सा स्थायी दर्द को कम कर सकते हैं।[29]

शल्यचिकित्सा[संपादित करें]

कभी-कभी शल्यचिकित्सा इन रोगों के मरीजों के लिए उपयुक्त हो सकती है:

अक्सर पीठ दर्द के कई लक्षणों और कारणों के लिए न्यूनतम अतिक्रामी शल्य (इनवेसिव सर्जिकल) प्रक्रियाएं एक समाधान बन रही हैं। इस तरह की प्रक्रियाएं रीढ़ की हड्डी की पारंपरिक शल्यक्रिया की अपेक्षा अधिक सटीक निदान और कम समय में स्वास्थ्य लाभ जैसेअधिक लाभ प्रदान करती हैं।[30]

संदिग्ध लाभ[संपादित करें]

  • पीठ की अकड़न या पीठ के स्थायी दर्द के लिए ठंड संपीड़न चिकित्सा की वकालत की जाती है और यह दर्द तथा सूजन को, विशेष रूप से गोल्फ, बागवानी या भार उठाने जैसे तनावपूर्ण व्यायामों के बाद होनेवाले दर्द को कम करती है। हालांकि, कोक्रेन सहयोग द्वारा आकस्मिक रूप से नियंत्रित परीक्षणों के मेटा-विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकला कि "पीठ के निचले हिस्से में होनेवाले दर्द में ठंड उपचार के लाभकारी होने के प्रमाण, निम्न गुणवत्ता के केवल तीन अध्ययनों पर आधारित तथा और भी कम हैं। "पीठ के निचले हिस्से के दर्द के लिए ठंड के उपयोग के बारे में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है।[13]
  • पूरे आराम या बिस्तर पर रहने की सलाह कम ही दी जाती है क्योंकि यह लक्षणों को और अधिक बिगाड़ सकता है[31] तथा आवश्यक होने पर यह एक या दो दिनों के लिए सीमित होता है। लंबे समय तक बिस्तर पर आराम या निष्क्रियता वास्तव में उल्टा प्रभाव डालते हैं, जिसके परिणामस्वरूप होनेवाली अकड़न से दर्द बढ़ जाता है।
  • संकर्षण की विधि या गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से पीठ के कशेरुओं को फ़ैलाने (के मामले में) वाली इनवर्सन थेरेपी(उलटा उपचार) पीठ दर्द के अस्थायी राहत के लिए उपयोगी है। रोगी यह अलगाव होने तक एक निश्चित अवधि के लिए एड़ियों या घुटनों से उलटी स्थिति में लटका रहता है। पूरी तरह लम्बवत लटकने (90 डिग्री) के बगैर भी यह परिणाम प्राप्त किया जा सकता है और 10 से 45 डिग्री जैसे कम कोण पर भी उल्लेखनीय लाभ देखे जा सकते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]
  • अल्ट्रासाउंड को लाभप्रद नहीं दिखाया गया है और यह लोगों की पसंद से बाहर हो गया है।[35]

गर्भावस्था[संपादित करें]

गर्भावस्था के दौरान लगभग 50% महिलाओं को पीठ के निचले हिस्से में दर्द होता है।[36] गर्भावस्था में पीठ दर्द, काफी तेज और गंभीर दर्द तथा विकलांगता का कारण बन सकता है एवं अगली गर्भावस्था में रोगियों के पीठ दर्द का कारण हो सकता है। गर्भावस्था के साथ पीठ दर्द का माता के बढ़ते वजन, व्यायाम, काम से संतुष्टि या गर्भावस्था के परिणाम कारकों जैसे जन्म के समय वजन, जन्म के समय लंबाई और अपगर स्कोर के संबंध में कोई उल्लेखनीय वर्द्धित खतरा नहीं पाया गया है।

गर्भावस्था में पीठ के निचले हिस्से के दर्द के साथ सम्वद्ध दर्शाए जानेवाले गर्भावस्था के बायोमेकेनिकल (जैवमशीनी) घटकों में उदर का मध्यत्ल्य और कमर का अनुप्रस्थ व्यास तथा गहराई शामिल हैं। खड़ा होना, बैठना, आगे झुकना, उठाना और टहलना गर्भावस्था में पीठ दर्द को बढ़ानेवाले मूल कारकों में है। गर्भावस्था में होनेवाले पीठ दर्द को, जांघ और नितंबों में फैलता दर्द, रात के समय मरीज को जगाने लायक तेज दर्द, रात के समय बढनेवाले दर्द या दिन के समय बढनेवाले दर्द के रूप में चिह्नित किया जा सकता है। उच्च प्रभाव, वजन-वाहक गतिविधियों और विशेष रूप से वे, जो सम्वद्ध संरचनाओं के विषम भार में शामिल हों: जैसे अत्यधिक घुमाव और उठाना तथा एक-पैर पर स्थित मुद्राएँ, सीढ़ी चढ़ना और पीठ या कूल्हे के अंतिम छोर के पास की दोहरावदार गति का परिहार दर्द को कम कर सकता हैं। घुटने मोड़े बिना जमीन पर सीधे झुकना गर्भावस्था में पीठ के निचले हिस्से पर गंभीर प्रभाव का कारण बनता है और सामान्य व्यक्तियों में यह विशेष रूप से कमर के पास के भाग में तनाव का कारण बनता है जो तनाव को कई गुना बढ़ा सकता है।

अर्थशास्त्र[संपादित करें]

राष्ट्रीय सरकारों द्वारा कामगारों के अस्वस्थता की वजह से छुट्टी लेने के कारण उत्पादकता के नुकसान के रूप में पीठ दर्द का प्रभाव नियमित रूप से उद्धृत होता है। कुछ राष्ट्रीय सरकारों, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम, ने समस्या से निपटने में मदद करने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता का अभियान शुरू किया है, उदाहरण के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षा के एक्जीक्यूटिव (कार्यकारी) का बेटर बैक्स(बेहतर पीठ) अभियान. संयुक्त राज्य अमेरिका में पीठ के निचले हिस्से के दर्द के आर्थिक प्रभाव से पता चलता है कि यह 45 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों में अपनी गतिविधियों को सीमित करने का पहला कारण है, चिकित्सकों के कार्यालयों में देखा जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा कारण, अस्पताल में भर्ती होने का पांचवां प्रमुख आम कारण एवं शल्य क्रिया का तीसरा प्रमुख कारण है।

अनुसंधान[संपादित करें]

  • वर्टेव्रोप्लास्टी में संपीड़न अस्थि विभंजन की वजह से नष्ट रीढ़ की संरचनाओं में सर्जिकल सीमेंट का पर्क्यूटानेअस इंजेक्शन शामिल है, जो रीढ़ केसंपीड़न अस्थिभंग के उपचार में अप्रभावी पाया जाता है।
  • [[इन्फ्लेमेटरी साइटोकाइन ट्यूमर नेक्रोसिस घटक-अल्फ़ा के विशिष्ट जीवविज्ञानी पदार्थों का उपयोग डिस्क से संबंधित पीठ दर्द में तेजी से राहत का कारण बन सकते हैं।|इन्फ्लेमेटरी साइटोकाइन ट्यूमर नेक्रोसिस घटक-अल्फ़ा के विशिष्ट जीवविज्ञानी पदार्थों का उपयोग डिस्क से संबंधित पीठ दर्द में तेजी से राहत का कारण बन सकते हैं।[37]]][37]

क्लिनिकल (नैदानिक) परीक्षण[संपादित करें]

उद्योग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों दोनों के द्वारा प्रायोजित कई चिकित्सकीय परीक्षण हो रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा प्रायोजित पीठ दर्द से संबंधित नैदानिक परीक्षणों को देखा जा सकता है NIH नैदानिक पीठ दर्द परीक्षण.

दर्द व्यक्तिपरक है और तटस्थ भाव से इसका परीक्षण असंभव है। कोई नैदानिक परीक्षण ऐसा नहीं है जिसे तटस्थ रूप से सत्यापित किया जा सकता है। नैदानिक परीक्षण रोगी की रिपोर्ट या दर्द की गंभीरता का 1 से लेकर 10 तक के पैमाने पर उपयोग करता है। कभी-कभी और विशेष रूप से बच्चों के साथ इमोटिकन (मुद्राओं) की एक श्रृंखला को मरीज के सामने प्रस्तुत करते हैं और उसे किसी एक इमोटिकन (मुद्राओं) को संकेतित करने के लिए कहा जाता है। हालांकि कुछ नैदानिक परीक्षणों के उत्पादों के लिए नियामक मंजूरी मिलने में सफलता मिल जाती है लेकिन यह इस बात का सबूत नहीं है कि वह उपचार अधिक प्रभावी है या उसमें कोई लाभ भी है। सभी परीक्षणों में रोगी की धारणा पर विश्वास किया जाता है। डॉक्टर यह सत्यापित नहीं कर सकते कि 5 का स्कोर 1 या 10 से अधिक उपयुक्त है और न ही यह निर्धारित कर सकते हैं कि एक मरीज के 5 के दर्जे की किसी अन्य मरीज के 5 से तुलना की जा सकती है।

2008 के एक अनियमित नियंत्रित परीक्षण में अलेक्जेंडर तकनीक के साथ सम्बंधित पीठ दर्द में उल्लेखनीय सुधार पाया गया है। व्यायाम और एटी के 6 अभ्यास के एक संयोजन ने पीठ दर्द को 72% या 24 एटी अभ्यास के बराबर कम किया है। उन 24 अभ्यास प्राप्त करनेवालों को पीठ दर्द 21 दिन के नियंत्रित औसत से 18 दिन कम रहा.[23]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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