द्वारिकाधीश मंदिर, मथुरा
दिखावट
| श्री द्वारकाधीश मन्दिर | |
|---|---|
| धर्म | |
| संबंधन | हिन्दू धर्म |
| ज़िला | मथुरा |
| देवता | द्वारकाधीश (द्वारकानाथ) राधारानी (वृन्दावनेश्वरी) |
| त्यौहार | जिण्डोला उत्सव, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, होली, शरद पूर्णिमा |
| अवस्थिति | |
| अवस्थिति | मथुरा |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| देश | भारत |
उत्तर प्रदेश में स्थान | |
| निर्देशांक | 27°30′18″N 77°41′06″E / 27.5051227°N 77.6850175°E |
| वास्तुकला | |
| प्रकार | राजस्थानी |
| निर्माण पूर्ण | 1814[1] |
| ऊँचाई | 169.77 मी॰ (557 फीट) |
मथुरा का द्वारिकाधीश मंदिर नगर के राजाधिराज बाज़ार में स्थित है। यह मन्दिर अपने सांस्कृतिक वैभव कला एवं सौन्दर्य के लिए अनुपम है। श्रावण के महीने में प्रति वर्ष यहाँ लाखों श्रृद्धालु सोने–चाँदी के हिंडोले देखने आते हैं। मथुरा के विश्राम घाट के निकट ही असकुंडा घाट के निकट यह मंदिर विराजमान है।
इतिहास
[संपादित करें]ग्वालियर राज्य के कोषाध्यक्ष सेठ गोकुल दास पारीख ने इसका निर्माण 1814–15 में प्रारम्भ कराया, जिनकी मृत्यु पश्चात इनकी सम्पत्ति के उत्तराधिकारी सेठ लक्ष्मीचन्द्र ने मन्दिर का निर्माण कार्य पूर्ण कराया। वर्ष 1930 में सेवा पूजन के लिए यह मन्दिर पुष्टिमार्ग के आचार्य गिरधरलाल जी कांकरौली वालों को भेंट किया गया। तब से यहाँ पुष्टिमार्गीय प्रणालिका के अनुसार सेवा पूजा होती है।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ उद्धरण त्रुटि:
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