डच इस्ट इंडिया कंपनी

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डच इस्ट इंडिया कंपनी नीदरलैंड की एक व्यापारिक कंपनी है जिसकी स्थापना १६०२ में की गई एवं इसे २१ वर्षों तक मनमाने रूप से व्यापार करने की छूट दी गई। भारत आने वाली यह सर्वप्रथम यूरोपीय कंपनी थी।

परिचय[संपादित करें]

सत्रहवीं सदी के शुरुआती दौर में दक्षिण-पूर्व एशिया के मसाला बाजारों में प्रवेश के इरादे से डच यहां आए। भारत में ‘डच ईस्ट इंडिया कंपनी’ की स्थापना वर्ष 1602 में हुई थी। वैसे इससे पहले 1596 में भारत आने वाला प्रथम डच नागरिक कारनेलिस डेहस्तमान था। डचों का पुर्तगालियों से संघर्ष हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने भारत के समस्त मसाला उत्पादन के क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया। वर्ष 1605 में डचों ने पुर्तगालियों से अंवायना ले लिया और धीरे-धीरे मसाला द्वीप पुंज (इंडोनेशिया) में उन्हें हराकर अपना प्रभुत्व स्थापित किया। डचों ने जकार्ता जीतकर 1619 ई. में इसके खंडहरों पर बैटेविया नामक नगर बसाया। 1639 में उन्होंने गोवा पर घेरा डाला और इसके दो साल बाद यानी 1641 में मलक्का पर कब्जा कर लिया। वर्ष 1658 में उन्होंने सीलोन की अंतिम पुर्तगाली बस्ती पर अधिकार जमा लिया। डचों ने गुजरात में कोरोमंडल समुद्र तट, बंगाल, बिहार तथा उड़ीसा में अपनी व्यापारिक कोठियां खोलीं। डच लोग मुख्यत: मसालों, नीम, कच्चे रेशम, शीशा, चावल व अफीम का व्यापार भारत से करते थे। 1759 ई. में हुए ‘वेदरा के युद्ध’ में अंग्रेजों से हार के बाद डचों का भारत में अंतिम रूप से पतन हो गया।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]