तज़किया

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तज़किया (تزكية) एक अरबी-इस्लामिक शब्द है, जो "टाजकिग़ाह आल-नफ्स" का अर्थ है "स्वयं की शुद्धि"। यह पवित्र आत्मा की पवित्रता के स्तर और अल्लाह की इच्छा को प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न आध्यात्मिक चरणों के माध्यम से अहं-केंद्रीयता के अपने विस्मयकारी स्थिति से नफ्स (कामुक स्व या इच्छाओं) को बदलने की प्रक्रिया को संदर्भित करता है। इसका आधार ज्ञात प्रामाणिक सुन्नत ( इल्म ) से शरीयत और कर्मों को सीखने में है और जीवन के माध्यम से अपने कामों में लगाना है जिसके परिणामस्वरूप अल्लाह की आध्यात्मिक जागरूकता पैदा हो रही है (लगातार जागरूक रहते हुए कि वह हमारे ज्ञान के साथ हमारे साथ है) हम सब जानते हैं कि हम आपके विचारों और कार्यों में उनके निरंतर स्मरण या धीर होने के साथ-साथ इहसान का उच्चतम स्तर है। इस शब्द का एक और समान शब्द इज़ाला है।

उर्दू साहित्य में तजकिया ऐसी पुस्तक को कहते हैं जिसमें कवियों के संक्षिप्त जीवन रूप और उनकी रचनाओं के उदाहरण दिए गए हों। ये पुस्तकें गवेषणात्मक नहीं होती है। किंतु इससे साहित्य का इतिहास लिखने में बहुत सहायता मिलती है। उर्दू कवियों के अधिकतर तज़किए फ़ारसी लिपि में लिखे गए हैं।

तज़किया (और तर्बिय्याह और तालीम की संबंधित अवधारणाएँ - प्रशिक्षण और शिक्षा) खुद को सचेत सीखने की प्रक्रिया तक सीमित नहीं करता है: बल्कि यह धार्मिक जीवन के कार्य को रूप देने का काम है: जीवन के हर पल को किसी की स्थिति को याद करते हुए व्यवहार करना। अल्लाह के सामने।

सन्दर्भ[संपादित करें]