जामिया मंज़रे इस्लाम
मंजर-ए-इस्लाम भारत के उत्तर प्रदेश के बरेली में स्थित एक इस्लामी मदरसा है। इसकी स्थापना 1904 में कई विद्वानों ने मिलकर की थी, जिनमें अहमद रज़ा ख़ान, हसन रज़ा ख़ान, अमजद अली आज़मी, लुत्फुल्लाह अलीगढ़ी, ज़फ़रुद्दीन बिहारी और अन्य शामिल थे।[1][2]
इस मदरसे ने 2004 में अपनी सौवीं सालगिरह मनाई। इस मौके पर मासिक पत्रिका "आला हज़रत" में कई विशेष लेख प्रकाशित किए गए। इस पत्रिका के प्रधान संपादक सुबहान रज़ा ख़ान हैं। उन्होंने मदरसे में जगह की कमी को देखते हुए इसे विस्तार देने की योजना भी बनाई।
इतिहास
[संपादित करें]इस्लामी विद्वान ज़फ़रुद्दीन बिहारी ने मंजर-ए-इस्लाम की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने अहमद रज़ा ख़ान को यह सुझाव दिया था कि बरेली में एक नया मदरसा बनाया जाए, क्योंकि उस समय बरेली में जो एकमात्र मदरसा था, उस पर देओबंदी विचारधारा का प्रभाव था। शुरू में अहमद रज़ा ख़ान इस प्रस्ताव को लेकर झिझक रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने मदरसा बनाने के लिए सहमति दे दी।
हसन रज़ा ख़ान मंजर-ए-इस्लाम के पहले प्रशासक (इंतज़ामिया प्रमुख) बने। मदरसे के शुरुआती शिक्षकों में हाजी हकीम अमीरुल्लाह बरेलवी, इरशाद हुसैन फ़ारूकी रामपुरी, और लुत्फुल्लाह अलीगढ़ी शामिल थे। हालांकि अहमद रज़ा ख़ान वहाँ औपचारिक रूप से शिक्षक नहीं थे, लेकिन वे अस्र की नमाज़ के बाद ज़फ़रुद्दीन बिहारी और अमजद अली आज़मी को सहीह अल-बुख़ारी की दरस (पाठ) दिया करते थे। फिर भी, मंजर-ए-इस्लाम अपने प्रतिद्वंदी मदरसे दारुल उलूम देवबंद की तुलना में लंबे समय तक कम औपचारिक (कम संगठित) रहा।[3]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Sanyal, Usha (2008-01-01). "The Madrasa Manzar-i Islam, Bareilly, and Jamia Ashrafiyya, Mubarakpur". Madrasas in South Asia: teaching terror?.
- ↑ "International Yoga Day 2023: मदरसा छात्रों का प्राणायाम और कपालभाति क्रिया देख हो जाएंगे दंग, देखें फोटो". Patrika News. अभिगमन तिथि: 2025-10-13.
- ↑ "Independence Day row: Barelvi madrasas defy Yogi govt order on national anthem". Hindustan Times (अंग्रेज़ी भाषा में). 2017-08-15. अभिगमन तिथि: 2025-10-13.