ज़िला न्यायालय (पाकिस्तान)

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पाकिस्तान
की राजनीति और सरकार

पर एक श्रेणी का भाग
संविधान

पाकिस्तान की जिला अदालतें , पाकिस्तान में जिला स्तर पर गतिशील हैं और अदालतें प्रांतीय न्यायालयों के अधीन संवैधानिक स्थिति में कार्य निष्पादित करते हैं। जिला अदालतें, पाकिस्तान के सभी प्रांतों के हर जिले में स्थापित की गई हैं और यह दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई के अधिकार क्षेत्र शामिल होती हैं। प्रत्येक जिले के मुख्य कार्यालयों में, जिला अदालतों के तहत कई सारे अतिरिक्त जिला और सत्र मनसनिन की तैनाती भी होती है कि जिला अदालतों में मामलों की सुनवाई करते हैं। जिला और सत्र मनसनिन को जिले भर में संबल कार और न्यायिक अधिकार होते हैं। जिला अदालतों में सत्र अदालत आमतौर पर अपराध जैसे हत्या , व्यभिचार , चोरी , चोरी आदि के मामलों की सुनवाई करती है। इसके अलावा मामूली प्रकृति के दीवानी मामलों की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र भी अदालत को प्राप्त होता है। प्रशासनिक सेवाओं की बेहतर आपूर्ति के लिए अब हर कस्बे और शहर में जिला अदालतों के अधीन एक अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश तैनात किया गया है, जो कि हर तरह से आवंटित गए क्षेत्र में दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए जिम्मेदार होता है। इस अदालतें जब आपराधिक मामलों की सुनवाई करती हैं तो यह सत्र अदालत जबकि दीवानी मामलों की सुनवाई के दौरान जिला अदालत कहलाती है। मुकदमेबाजी के दौरान महत्वपूर्ण मामलों को सिर्फ जिला और सत्र न्यायाधीश की अदालत में पेश किया जाता है। जिला और सत्र न्यायाधीश, हर जिले में एक मामले में जिला न्यायाधीश उच्च माना जाता है। मुकदमेबाजी के दौरान अगर अभियोगी के किसी भी पक्ष को जिला अदालतों के फैसले पर आपत्ति हो, वे प्रांतीय न्यायालय (कोर्ट) में स्थापित एक एप्लेट बोर्ड में याचिका दायर कर सकता है, जिसका उद्देश्य जनता को पारदर्शी सबसे न्याय की आपूर्ति है।

न्यायाधीशों की नियुक्ति[संपादित करें]

न्यायिक मजिस्ट्रेट व सिविल जज[संपादित करें]

सिविल जज सं न्यायिक मैजिस्ट्रेट को भी, लोक सेवा आयोग के प्रस्ताव के आधार पर, प्रांतीय उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किया जाता है।यह आयोग, प्रतिवर्ष, खुले प्रतिस्पर्धा परीक्षा आयोजित करती है, जिनमें विभिन्न सम्बंधित विषयों पर प्रश्न होते हैं। इस पद के लिए मूल योग्यता एलएलबी की डिग्री एवं २ वर्षा की सम्बंधित वकालत का अनुभव होती है। लिकठिन परीक्षा में उत्तीर्ण प्रत्याशी को मानसिक परीक्षा एवं साक्षात्कार से गुज़ारना पड़ता है, जिसके पश्चात्, परिणाम के अनुसार, आयोग द्वारा उच्च न्यायालय को सिफ़ारिश भेजी जाती है।

ज़िला न्यायाधीश[संपादित करें]

अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश को प्रांतीय उच्च न्यायालय द्वारा, वकीलों व अधीनस्थ न्यायाधीशों के पूरे समूह में से चुन कर नियुक्त किया जाता है। इस पद पर नियुक्ति के लिए सक्षम होने के लिए, एक वकील के पास कम-से-कम १० वार्ष का अच्छे नाम के साथ अनुभव होना चाहिए, तथा उसे उच्च न्यायालय द्वारा आयोजित एक परीक्षा में भी उत्तीर्ण होना होता है। अधीनस्थ न्यायाधीशों को भी वरिष्ठता के आधार पर वरिष्ठ सिविल जज से पदोन्नत किया जाता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]