चम्बल परियोजना

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यह भारत की एक प्रमुख नदी घाटी परियोजना है। इसके अंतर्गत चंबल नदी पर तीन बांध - गांधी सागर (मंदसौर)मध्यप्रदेश , राणा प्रताप सागर (रावतभाटा)चित्तौड़ , जवाहर सागर बांध (बूंदी),कोटा बेराज (कोटा) बनाए गए हैैं। इस परियोजना से राजस्थान और मध्यप्रदेश मे सिंचाई और मिट्टी सरंक्षण हुआ है। इसकी सिंचाई क्षमता 5 लाख हेक्टेयर है। जल विधुत 386 मेगावाट है। चम्बल परियोजना तीन चरणो मे पुर्ण हुई 1 गान्धी सागर बान्ध विधुत क्षमता 115mw 2 राणा प्रताप सागर बान्ध विधुत क्षमता 172mw 3 जवाहर सागर बांध विधुत क्षमता 99mw

परियोजना का प्रारम्भ[संपादित करें]

राजस्थान में चम्बल घाटी परियोजना प्रारम्भ 1953-54 राजस्थान का हिस्सा – 50% गांधीसागर बांध – चम्बल परियोजना के प्रथम चरण में 1950 में स्थापित मध्यप्रदेश के चौरासीगढ़ स्थान के पास रामपुरा मानपुरा के पठारो के बीच निर्मित बांध कोटा सिंचाई बांध – कोटा ताप विद्युत घर स्थापित

चम्बल परियोजना भारत की नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है। इस परियोजना के अंतर्गत तीन बाँध, पाँच बिजलीघर और एक बड़ा बैराज़ बनाया गया है।

यह परियोजना मध्य प्रदेश व राजस्थान की सरकार का सयुंक्त उपक्रम है। चम्बल परियोजना के प्रथम चरण में 'गाँधी सागर बाँध' एवं कोटा बेराज, द्वितीय चरण में 'राणा प्रताप सागर बाँध' 172mw और तीसरे चरण में 'जवाहर सागर बाँध'33×3=99mw बनाए गये थे।[1]

नदी[संपादित करें]

चम्बल मध्यप्रदेश में इंदौर जिले के जानापाव (महु) (विंध्यान क्षेत्र) नामक स्थान से निकलती है यह उत्तर दिशा की और बहती है मध्यप्रदेश से बहते हुये राजस्थान में दक्षिण से पूर्वी दिशा में उत्तरप्रदेश में प्रवेश करती है जो बाद में यमुना नदी में मिल जाती है।

स्थान[संपादित करें]

मध्यप्रदेश राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश

उद्देश्य[संपादित करें]

इस परियोजना के माध्यम से ऊर्जा, कृषि सिंचाई करना, एवं पेयजल की योजना किर्यान्विती करना प्रमुख है।

लाभान्वित होने वाले राज्य[संपादित करें]

राजस्थान 50%, मध्यप्रदेश 50%

राजस्थान के छः जिलों में चंबल नदी बहती है जो निम्नलिखित हैं चितौड़गढ़,बूंदी,कोटा,सवाई_माधोपुर,करौली,धौलपुर

सन्दर्भ[संपादित करें]