कालाढूंगी

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कालाढूंगी
Kaladhungi
कालाढूंगी में लौहोद्योग, सन् 1862/1863 का चित्र
कालाढूंगी में लौहोद्योग, सन् 1862/1863 का चित्र
कालाढूंगी is located in उत्तराखण्ड
कालाढूंगी
कालाढूंगी
उत्तराखण्ड में स्थिति
निर्देशांक: 29°17′N 79°21′E / 29.28°N 79.35°E / 29.28; 79.35निर्देशांक: 29°17′N 79°21′E / 29.28°N 79.35°E / 29.28; 79.35
देश भारत
प्रान्तउत्तराखण्ड
ज़िलानैनीताल ज़िला
जनसंख्या (2011)
 • कुल7,611
भाषा
 • प्रचलितहिन्दी, कुमाऊँनी

कालाढूंगी (Kaladhungi) भारत के उत्तराखण्ड राज्य के नैनीताल ज़िले में स्थित एक नगर है।[1][2][3]

विवरण[संपादित करें]

कालाढूंगी हल्द्वानी-रामनगर तथा बाजपुर-नैनीताल सड़कों के चौराहे पर हल्द्वानी से २६ किलोमीटर, नैनीताल से ३० किलोमीटर तथा बाजपुर से १९ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कालाढूंगी नैनीताल जनपद की ८ तहसीलों में से एक भी है। कालाढूंगी जिम कार्बेट का शीतकालीन आवास भी था। अब उनके कालाढूंगी स्थित बंगले को म्यूजियम बना दिया गया है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध शिकारी और बाद में जिम कार्बेट वन्य जीव अभ्यारण्य की स्थापना के हिमायती जिम कार्बेट ने अपनी पुस्तकों "कुमाऊं के आदमखोर" " रुद्रप्रयाग का आदमखोर तेंदुआ" "कहानी जंगल की" "माई इंडिया" आदि पुस्तकों में कालाढूंगी का विवरण दिया है। उनके विवरणों में लिखा है कि कालाढूंगी पर्वतीय ढालों के अंत में स्थित गांव था। जो कि नैनीताल की कठोर सर्दियों से बचने का उपयुक्त स्थान था, क्योंकि यहां की जलवायु तराई के इलाकों की भांति उष्ण थी। खेती हेतु पर्याप्त जमीन थी। चारों ओर घने जंगल थे। जो विविध वन्यजीवों से भरे थे। जहां अक्सर शिकारी अपने भोजन व मनोरंजन हेतु शिकार करने जाते थे। कभी कभी एक मील से भी पास कोई बाघ या तेंदुआ विचरण करता पाया जाता था। जो स्थानीय निवासियों को कोई हानि पहुंचाए बिना फिर जंगल में भाग जाते थे।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Start and end points of National Highways". मूल से 22 सितंबर 2008 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 23 April 2009.
  2. "Uttarakhand: Land and People," Sharad Singh Negi, MD Publications, 1995
  3. "Development of Uttarakhand: Issues and Perspectives," GS Mehta, APH Publishing, 1999, ISBN 9788176480994