आई एन एस कोच्चि

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
आई एन एस कोच्चि के कमीशन समारोह का दृष्य
कैरियर (भारत)
नाम: कोच्चि
स्वामित्व: भारतीय नौसेना
प्रचालक: भारतीय नौसेना
निर्माता: माझगाँव डॉक लिमिटेड
वे संख्या: डी ६४
आधारशिला: 25 अक्टूबर 2005
जलावतरण: 18 सितम्बर 2009
प्रायोजक: रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
नाम दिया: कोच्ची
सेवा शुरु: 30 सितम्बर 2015
सेवा में: है
गृहपत्तन: मुंबई बंदरगाह[1]
ध्येय: जही शत्रुन् महाबाहो[2]
सामान्य विशेषताएँ
वर्ग और प्रकार: विध्वंसक - कोलकाता श्रेणी
विस्थापन: 7,500 टन[3][4]
लम्बाई: 163 मी॰ (535 फीट)
चौड़ाई: 17.4 मी॰ (57 फीट)
स्थापित शक्ति: ४½ मेगावॉट
प्रणोदन: कोगैग
गति: 30 नॉट (56 किमी/घंटा; 35 मील/घंटा) से ज्यादा
सहन-शक्ति: ३३०० नॉटिकल मील
नाविक संख्या: ४० अधिकारी + ३५० नाविक = कुल ३९०[2]
संवेदक और
संसाधन प्रणाली:
  • थेल्स एलडब्ल्यु-08 डी-बैंड वायु खोजी रडार[5]
  • आईएआई एल/एम-2248 एमएफ़-स्टार एस-बैंड ए.इ.एस.ए. बहुपयोगी रडार
  • आईएआई एल/एम-2238 एल-बैंड स्टार निगरानी रडार
  • बीईएल हुम्सा-एनजी बो सोनार
  • बीईएल नागिन चालू पटसित ऐरे सोनार[6]
  • बीईएल इलेक्ट्रॉनिक मॉड्युलर व कंट्रोल एल्पिकेशन्स (इएमसीसीए मैक4) समाघात प्रबंधन प्रणाली
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध
और लूभाव (फंदे):
  • एल्बिट सिस्टम्स डीसीवर मैक II प्रत्युपाय प्रणाली और सुरक्षात्मक कमरा
  • आयुध:

    वायुरोधी प्रक्षेपास्त्र:
    4 × 8-सेल वीएलएस, कुल 32;[7]
    बराक ८ प्रक्षेपास्त्र (मारक दूरी: 0.5 कि॰मी॰ (0.31 मील) से 70 कि॰मी॰ (43 मील)[8]) नौकारोधी प्रक्षेपास्त्र:
    2× 8-सेल युवीएलएम 16 ब्रह्मोस नौकारोधी प्रक्षेपास्त्रों के लिए

    बंदूकें:

    1 × 130 मिमी बंदूक
    4 × एके-६३० सी आई डब्ल्यु एस

    पनडुब्बी मारक हथियार:
    4× तारपीडो ट्यूब
    आरबीयू-६००० पनडुब्बी रोधी रॉकेट
    जहाज़ पर विमान: 2x हेलीकॉप्टर: *वेस्टलैंड सी किंग * ध्रुव

    आई एन एस कोच्चि (डी-६४) (INS Kochi, D-64) भारतीय नौसेना का एक युद्धपोत है जिसे ३० सितम्बर २०१५ को नौसेना में शामिल किया गया।[2][9] [10] यह आईएनएस कोलकाता के बाद कोलकाता-श्रेणी विध्वंसक श्रृंखला का दूसरा युद्धपोत है।[1]

    25 अक्‍टूबर, 2005 को इस जहाज का पेंदा रखा गया और इसे 18 सितंबर 2009 को लांच किया गया।

    विशेषताएँ[संपादित करें]

    भारत द्वारा बनाया गया क्षमतावान सतही युद्धक है। यह 164 मीटर लंबा और लगभग 17 मीटर चौड़ा है तथा इसकी भार क्षमता 7500 टन है। इस पोत में सामूहिक गैस तथा गैस (सीओजीएजी) प्रेरक प्रणाली है, जिसमें चार उच्‍च शक्ति के उलटने योग्‍य गैस टर्बाइन लगे हैं और यह तीस नॉट से अधिक की गति प्राप्‍त कर सकता है। पोत की विद्युत ऊर्जा चार गैस टर्बाइन जनरेटर और एक डीजल अल्‍टरनेटर से प्राप्‍त होती है, यह दोनों 4.5 मेगावाट बिजली पैदा करते हैं। इस युद्धपोत में 40 अधिकारी और 350 नौसैनिक रह सकते हैं।[10]

    युद्धक प्रणालियाँ[संपादित करें]

    आईएनएस कोच्‍ची में राडार से बच निकलने के लिए नया डिजाइन है और इसमें स्‍वदेशी युद्ध क्षमता का बड़ा भाग है। इसमें अत्‍याधुनिक हथियार लगाए गए हैं। युद्ध पोत में लम्‍बी दूरी के सतह से हवा में मिसाइल सीधे रूप में लांच करने वाला सेंसर और अनेक कार्य करने वाला राडार एमएफ-स्‍टार है। यह केवल कोलकाता वर्ग के युद्धक पोतों में ही लगा है। यह अग्रणी सुपर सोनिक तथा जमीन से जमीन तक मार करने वाला ब्रह्मोस मिसाइल भारत-रूस संयुक्‍त उद्यम का- से लैस है। 76 एमएमके सुपर रैपिड गन माउंट (एसआरजीएम) तथा एके630 सीआईडब्‍ल्‍यूएस लगे हैं, जो हवा में और जमीन पर लक्ष्‍य साध सकते हैं। यह दोनों स्‍वदेश निर्मित हैं। संपूर्ण समुद्र रोधी हथियार और इसके ऊपर लगे सेंसर सूट में स्‍वदेशी रॉकेट लांचर, स्‍वदेशी टवीन ट्यूब टोरपेडो लांचर (आईटीटीएल) और कमान पर लगे नई पीढ़ी का हमसा सोनार भारतीय स्‍वदेशी प्रयास के बेहतरीन उदाहरण हैं। सेंसर सूट में अन्‍य अग्रणी जमीन से वायु निगरानी करने वाला राडार तथा इलेक्‍ट्रोनिक युद्धक प्रणाली लगी है। हथियारों और सेंसरों के साथ अत्‍याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली (सीएसएम-15ए) को एकीकृत किया गया है। यह दो चेतक हैलिकोप्‍टरों के संचालन के लिए लैस है।[10]

    इस युद्धपोत को नेटवर्क ऑफ नेटवर्क्‍स के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है, क्‍योंकि इसमें ऐसिंफक्रोनस ट्रांसफर मोड बेस्‍ड इंटिग्रेडिट विशेष डाटा नेटवर्क (एआईएसडीएन), युद्धक प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस), स्‍वचालित विद्युत प्रबंधन प्रणाली (एपीएमएस) तथा ऑक्सिलियरी कंट्रोल सिस्‍टम (एसीएस) जैसे सूक्ष्‍म डिजिटल नेटवर्क हैं। एआईएसडीएम सूचना मार्ग है, जिस पर सभी सेंसर और हथियार संबंधी डाटा रहते हैं। मेरीटाइम डामेन जानकारी देने के लिए सीएनएस का उपयोग स्‍वदेशी डाडा लिंक प्रणाली का इस्‍तेमाल करके अन्‍य प्‍लेटफर्मों से सूचना एकीकरण में किया जाता है। विद्युत आपूर्ति प्रबंधन एटीएमएस के इस्‍तेमाल से होता और एसीएस के जरिए रिमोट कंट्रोल और मशीन की निगरानी की जाती है।[10]


    इन्हें भी देखें[संपादित करें]

    सन्दर्भ[संपादित करें]

    1. "INS Kochi commissioned at Mumbai". भारतीय नौसेना. 30 सितंबर 2015. अभिगमन तिथि 30 सितंबर 2015.
    2. "आईएनएस कोच्चि नौसेना के बेड़े में शामिल". नवभारत टाइम्स. 30 सितम्बर 2015. अभिगमन तिथि 30 सितम्बर 2015.
    3. "Navy gets its largest destroyer". द हिन्दू. 13 जुलाई 2014. अभिगमन तिथि 15 जुलाई 2014.
    4. "Largest destroyer project of Navy hit by delay". Defence Express. 6 जून 2013. अभिगमन तिथि 15 जुलाई 2014.
    5. "Bharat Electronics Ltd. awards LW08 contract to Thales". Thalesgroup.com. 2 जुलाई 2008. अभिगमन तिथि 2 अप्रैल 2010.
    6. "Indian Navy to get four new destroyers". dnaindia.com. 17 मार्च 2009. अभिगमन तिथि 2 अप्रैल 2010.
    7. सोम, विष्णु (16 अगस्त 2014). "On INS Kolkata, PM is Only Partially Correct". एनडीटीवी. अभिगमन तिथि 8 मार्च 2015. At the moment, she is designed to carry only 32 Barak surface-to-air missiles...
    8. "Israeli navy equipping warships with new missile system: report". XinhuaNet. 29 जुलाई 2013. अभिगमन तिथि 29 जुलाई 2013.
    9. "INS Kochi stealth guided missile destroyer commissioned". द इकोनॉमिक टाइम्स. 30 सितम्बर 2015. अभिगमन तिथि 30 सितम्बर 2015.
    10. "श्री मनोहर पर्रिकर ने आईएनएस कोच्‍ची का जलावतरण किया". पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार. 30 सितंबर 2015. अभिगमन तिथि 1 अक्टूबर 2015.

    बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]